पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली जाने से उनकी पार्टी जेडीयू में टूट और आंतरिक कलह की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं. जेडीयू पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत के सुर तेज होते जा रहे हैं. पहले बाहुबली नेता आनंद मोहन बागी हुए थे. अब मोकामा से जेडीयू के विधायक अनंत सिंह के तेवर भी बगावती हो गए हैं. दरअसल, अनंत सिंह ने आगामी एमएलसी चुनाव में अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है. 'छोटे सरकार' ने ऐलान किया है कि वह नीरज कुमार का समर्थन नहीं करेंगे, बल्कि उनके खिलाफ मैदान में उतर रहे अनुज सिंह का साथ देंगे. उनके इस बयान से सियासी गलियारे में हलचल मच गई है. हालांकि, 'छोटे सरकार' ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि ई कोई पार्टी का चुनाव नहीं है. इसमें सिंबल थोड़े ही ना मिलता है. इसमें जो अच्छा आदमी रहता है, उसको हमलोग वोट देते हैं.
अनंत सिंह की बगावत से पार्टी को कितना नुकसान?
अनंत सिंह भूमिहार समाज से आते हैं. बिहार जाति आधारित गणना के आंकड़ों के अनुसार, भूमिहार जाति की आबादी सिर्फ 2.89 प्रतिशत है. इसके बावजूद प्रदेश में सत्ता की चाभी भूमिहारों के हाथों में होती है. अगर अनंत सिंह की बात करें तो मोकामा और उससे जुड़ी तमाम सीटों पर उनका काफी प्रभाव देखने को मिलता है. वह जेल में रहते हुए भी चुनाव जीत जाते हैं, इससे उनकी सियासी ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है. उनकी बगावत से इलाके में सवर्ण (विशेषकर भूमिहार) और पिछड़ा वर्ग के समीकरण प्रभावित होते हैं. इसका डायरेक्ट असर मोकामा, बाढ़ और इससे सटे मुंगेर, तारापुर, जमालपुर, शेखपुरा, बरबीघा, लखीसराय और सूर्यगढ़ा विधानसभा सीटों पर पड़ेगा.
नीरज कुमार का विरोध क्यों कर रहे अनंत सिंह?
अनंत सिंह और जेडीयू MLC नीरज कुमार की अदावत पुरानी है. साल 2015 में नीरज कुमार ने बतौर जेडीयू कैंडिडेट अनंत के खिलाफ विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद से दोनों के बीच 'दुश्मनी' जगजाहिर है. 2025 चुनाव में नीरज ने अनंत सिंह के लिए प्रचार नहीं किया था. उनका कहना है कि आपराधिक छवि वाले शख्स का वह समर्थन नहीं कर सकते. नीरज कुमार के कड़े विरोध के बाद भी नीतीश कुमार ने अनंत सिंह को टिकट दिया था और उन्होंने जेल जाने के बाद भी चुनाव जीतने में कामयाबी हासिल की थी.
आनंद मोहन सिंह भी हो चुके हैं बागी
इससे पहले बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह भी जेडीयू से बागी हो चुके हैं. आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद बिहार की शिवहर सीट से जेडीयू की लोकसभा सांसद हैं, जबकि उनके बेटे चेतन आनंद नवीनगर सीट से जेडीयू के ही विधायक हैं. इसके बावजूद आनंद मोहन ने जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व पर अपनी पार्टी को कमजोर करने और पैसे लेकर मंत्रिपद बांटने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने कहा था कि जेडीयू के कुछ नेताओं ने नीतीश कुमार को जिंदा दफन कर दिया है. आनंद मोहन ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार की मजबूरी का फायदा उठाकर थैली की राजनीति हो रही है.
'मुझे कोई जानकारी', अनंत सिंह के बागी तेवर पर श्रवण कुमार का रिएक्शन
अनंत सिंह के बागी तेवर पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. जदयू नेता ने कहा कि अनंत सिंह के बयान को भी नहीं देखा है, इसलिए इस पर किसी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा. हालांकि, पटना के सियासी हलकों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि अनंत सिंह के इस रुख पर पार्टी का कोई भी बड़ा नेता बयान देने से बच रहा है. इसके अपने सियासी मायने हो सकते हैं, क्योंकि अनंत सिंह को नीतीश कुमार का करीबी नेता माना जाता है.
पूर्व विधायक गोपाल मंडल जदयू को छोड़ दिए
21 अगस्त, 2026 को जदयू के पूर्व विधायक गोपाल मंडल ने बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि हम जदयू को छोड़ दिए, अब पार्टी ही नहीं रहेगी, जदयू को बीजेपी चबा जाएगी. जदयू का अब कुछ नहीं चलता है. नीतीश कुमार का भी अब पार्टी में कुछ नहीं चलता है. पार्टी को गैर आदमी चला रहा है, जिसकी कोई जगह नहीं है. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जदयू ने गोपल मंडल को टिकट नहीं दिया था. वह निर्दलीय चुनावी मैदान में थे, लेकिन वह हार गए.
संजय वर्मा ने जदयू से दिया इस्तीफा, प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ी
जदयू नेता 1 सितंबर, 2026 दिन मंगलवार को बड़ा झटका तब लगा, जब पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव संजय वर्मा ने इस्तीफा दे दिया. संजय वर्मा ने जदयू की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ी दी थी. उन्होंने अपना इस्तीफा जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को भेजा था. बता दें कि संजय वर्मा जदयू में राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. हालांकि, सजय वर्मा ने इस्तीफा क्यों दिया? इसका जिक्र पत्र में नहीं है.
वरिष्ठ पत्रकार दीपक कुमार दीपू कहते हैं कि नीरज और अनंत सिंह में पार्टी के अंदर पहले से ही आपसी रंजिश बनी हुई है, खासकर तब से जब अनंत सिंह राजद में चले गए थे. उस समय पूरी पार्टी की तरफ से अनंत सिंह के खिलाफ नीरज कुमार बोल रहे थे, जो लड़ाई व्यक्तिगत वर्चस्व और महत्वाकांक्षा का रूप ले चुकी है. रही बात आनंद मोहन की, तो वह पार्टी के अंदर खुद को अलग-थलग पा रहे हैं, नतीजतन वह पार्टी के चंद नेताओं को आड़े हाथों लेकर पूरी पार्टी पर अपना वर्चस्व चाह रहे हैं.