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कैमरे पर गुनाह कबूला और मच गया सियासी घमासान, क्या अनंत के 'तीर' से हिलेगी नीतीश की 'कमान'?

अनंत सिंह लय में बोल गए हैं या उनसे किसी ने यह बयान दिलवाया है, क्योंकि सियासत में हीरो परदे के पीछे से अपना रोल निभाता है. जो भी हो, बिहार की राजनीति में अनंत सिंह की यह स्वीकारोक्ति लंबे समय तक याद रखी जाएगी.

Written BySunil Mishra
Published: Oct 16, 2026, 07:52 PM IST|Updated: Oct 16, 2026, 08:51 PM IST
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कैमरे पर गुनाह कबूला और मच गया सियासी घमासान, क्या अनंत के 'तीर' से हिलेगी नीतीश की 'कमान'?
Image Credit: अनंत सिंह, मोकामा विधायक (File Photo)

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    Sunil Mishra

    Sunil Mishra

    इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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    अनंत सिंह ने बिहार की राजनीति में धमाका कर दिया है. उन्होंने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए बयान में दावा किया था कि नीतीश कुमार के साथ रहते मैंने 9 मर्डर करवाए थे. हालांकि, बाद में वे अपने बयान से मुकर गए और कहा कि मेरे 9 लोग लालू प्रसाद यादव के राज में मारे गए थे. भले ही अनंत सिंह अपने बयान से पलट गए हों, लेकिन बिहार की राजनीति को बहुत बड़ा मुद्दा मिल गया है. खासतौर से विपक्ष की ओर से सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या सुशासन का आधार इन 9 लोगों का मर्डर था. अनंत सिंह का यह बयान तब आया है, जब राज्य में कानून और व्यवस्था के हालात बदतर स्थिति में हैं. आए दिन हत्या की घटनाएं हो रही हैं. दिनदहाड़े लड़कियों को कोचिंग जाते समय छेड़ा जा रहा है. साफ शब्दों में कहें तो विपक्ष को बैठे बिठाए अनंत सिंह ने एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है, जो लंबे समय तक बिहार की राजनीति को झकझोरता रहेगा. आइए, जानते हैं इस बयान के परिणाम क्या हो सकते हैं.

    READ ALSO: अनंत सिंह का यू-टर्न: जदयू विधायक बोले- 'गलत चलाया गया हमारा बयान, लालू राज में मारे गए थे मेरे 9 आदमी'

    पुलिस अधिकारियों को जांच शुरू करने का मिल सकता है आधार

    भारतीय साक्ष्य अधिनियम में कहा गया है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट से इतर अगर सार्वजनिक मंचों से या मीडिया के सामने कोई ऐसे बयान देता है तो उसे इकबालिया माना जा सकता है, लेकिन केवल बयान के आधार पर दोष सिद्धि नहीं हो सकती. फिर भी पुलिस अधिकारियों को केस की फाइल खोलने और जांच शुरू करने का आधार जरूर मिल जाता है. पुलिस पर इस बात का दबाव बढ़ सकता है कि वह सन् 1990 और 2000 के दशकों में मोकामा, बाढ़ और पटना क्षेत्र में हुए मर्डर की घटनाओं, जिनकी फाइल क्लोज कर दी गई थी, उनकी फिर से पड़ताल करे. अगर कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक संरक्षण में मर्डर की घटना को अंजाम देना कबूल करता है तो कानून के हिसाब से वह जांच के घेरे में आ जाता है.

    नीतीश कुमार के सुशासन पर सीधा सवाल

    2005 के बाद से नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स सुशासन, क्राइम के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और कानून का राज ​स्थापित करने के दावों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. जनता दल यूनाइटेट और एनडीए के नेता इस बात का दावा करते नहीं अघाते कि नीतीश कुमार ने बिहार को जंगलराज से निकालकर यहां कानून का राज स्थापित किया. अनंत सिंह का बयान नीतीश कुमार के सुशासन के दावों पर सीधा चोट करता है और सवाल उठाता है कि क्या सुशासन का आधार वहीं 9 मर्डर थे, जिनका कबूलनामा अनंत सिंह ने कैमरे के सामने किया है. इस तरह अनंत सिंह ने नीतीश कुमार की जीवन भर की राजनीतिक कमाई को धक्का पहुंचाने का काम किया है.

    विपक्ष को मिल गया बड़ा हथियार

    जनता दल यूनाइटेड और एनडीए की ओर से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल को जंगलराज की संज्ञा दी जाती रही है और इसी बिना पर पिछले 20 साल से एनडीए की बिहार में सरकार भी चली आ रही है. राजद की ओर से जैसे ही बिहार में कानून व्यवस्था का मामला उठाया जाता है, सत्तापक्ष की उंगली सीधे लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल की ओर उठ जाती है और इस तरह विपक्ष का मुंह बंद हो जाता है. हालांकि, तेजस्वी यादव लगातार बिहार में कानून व्यवस्था का मसला उठाते रहे हैं. अनंत सिंह का यह बयान एक तरह से उन्हें बड़ा राजनीतिक हथियार दे गया है. विपक्ष यह मांग कर सकता है कि अनंत सिंह ने जिन घटनाओं की ओर इशारा किया है, उनकी न्यायिक जांच हो.

    एनडीए के प्रवक्ताओं और नेताओं में बढ़ेगी असहजता

    अनंत सिंह ने जिस बेबाकी से कबूलनामा किया है, उसे तो एनडीए का कोई भी नेता और प्रवक्ता डिफेंड नहीं कर पाएगा. इससे बाकी घटक दलों के नेताओं में असहजता की भावना पैदा हो सकती है. अभी बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर मतदान होने वाले हैं, जिसमें 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं. यहां के मतदाताओं में अनंत सिंह के बयान का प्रभाव पड़ना लाजिमी है. कितना प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाला समय बताएगा. एनडीए के नेता पीएम मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के राज में बिहार के स्वर्णिम विकास का दावा करते हैं, लेकिन अनंत सिंह के इस बयान ने उनको भी चकित कर दिया है.

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    Anant Singh