बेगूसराय में पवित्र सिमरिया धाम से लखीसराय के अशोकधाम तक निकलने वाली अमृत लक्खी महोत्सव यात्रा का आज (25 सिंतबर, 2026) से शुभारंभ हो गया है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आज लक्खी महोत्सव यात्रा का उद्घाटन किया. इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, 'आज, पावन अनंत चतुर्दशी के शुभ अवसर पर बेगूसराय के पवित्र सिमरिया धाम से लखीसराय के अशोकधाम तक निकलने वाली अमृत लक्खी महोत्सव यात्रा का शुभारंभ किया.'
उन्होंने लिखा- 'यात्रा के शुभारंभ से पूर्व पवित्र मां गंगा में स्नान कर पूज्य श्री चिदात्मन महाराज जी के आश्रम में अनंत चतुर्दशी महोत्सव के अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा समस्त क्षेत्रवासियों एवं बिहारवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की.'
'अमृत लक्खी महोत्सव यात्रा केवल एक यात्रा नहीं'
मंत्री ने आगे लिखा, 'पौराणिक मान्यताओं में सिमरिया धाम का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. समुद्र मंथन की कथा से जुड़े इस पावन धाम को आदि कुंभ स्थली के रूप में भी जाना जाता है. अमृत की पवित्र स्मृतियों से जुड़ी इस धरती से प्रारंभ हुई अमृत लक्खी महोत्सव यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, संस्कृति और हमारी सुदीर्घ सनातन परंपरा का जीवंत संगम है. यह पावन यात्रा हमारी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने, उसे स्मरण करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का एक सुंदर माध्यम बने, यही मंगलकामना है. हर हर गंगे, हर हर महादेव.'
क्या है इस यात्रा की मान्यता?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह पर्व समुद्र मंथन के दौरान शिवसागर में माता लक्ष्मी के प्रकट होने, अमृत कलश की स्थापना की पौराणिक कथा और मान्यता से जुड़ा हुआ है. इसी कारण इस क्षेत्र का नाम माता लक्ष्मी के नाम पर लखीसराय पड़ा था. समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत कलश को लखीसराय के बरहिया में स्थापित किया गया था. इसे आदि कुंभ स्थली के नाम से भी जाना जाता है.
अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर अमृत लक्खी महोत्सव यात्रा और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. भक्त सिमरिया धाम से लाए गए गंगा के पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं. इसमें स्थानीय लोग, धार्मिक संत और जाने-माने कलाकार और राजनेता शामिल होते हैं. आज कृषि मंत्री ने इस यात्रा का शुभारंभ किया है.