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बिहार की राजनीति में अपराध की चर्चा न हो, ऐसा कैसे हो सकता है. राजनीति में अपराध को लेकर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर की ओर से राज्यसभा सदस्यों के आपराधिक रिकॉर्ड का अध्ययन किया गया है. इस अध्ययन के अनुसार, बिहार के 16 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने अपने चुनावी हलफनामे में क्रिमिनल केस का जिक्र किया है. इसका मतलब यह है कि बिहार के 44 प्रतिशत राज्यसभा सांसदों के खिलाफ आपराधिक केस चल रहे हैं. इससे यह जाहिर होता है कि राजनीति में आपराधिक मामले केवल विधानसभा और लोकसभा के सदस्यों के खिलाफ ही नहीं हैं, बल्कि उच्च सदन भी इससे अछूता नहीं है. यह अध्ययन बताता है कि बिहार के राज्यसभा सांसदों में संजय कुमार झा सबसे धनवान व्यक्ति हैं. एडीआर की यह रिपोर्ट 2 नवंबर, 2026 को जारी की गई है.
रिपोर्ट में एडीआर और इलेक्शन वॉच ने देश के 233 मौजूदा राज्यसभा सांसदों में से 230 के हलफनामों का विश्लेषण किया है. रिपोर्ट कहती है, देश के 72 राज्यसभा सांसदों ने खुद के खिलाफ आपराधिक केस घोषित किया है. इनमें से 37 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.
बिहार इस मामले में राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है. बिहार उन राज्यों में शुमार है, जहां राज्यसभा सांसदों के बीच आपराधिक मामलों का अनुपात बहुत ज्यादा है. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि जिस सांसद के खिलाफ आपराधिक मामले हैं, वो दोषी हैं. यह केवल उनके चुनावी हलफनामों में दी गई जानकारी पर आधारित रिपोर्ट है.
एडीआर की इस रिपोर्ट में राज्यसभा सांसदों की संपत्ति का भी अध्ययन किया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के राज्यसभा सांसद और जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की घोषित संपत्ति 22.69 करोड़ रुपये है. बीजेपी के मनन कुमार मिश्रा की संपत्ति 14.95 करोड़ रुपये और राजद के फैयाज अहमद की संपत्ति 12.25 करोड़ रुपये बताई गई है. बीजेपी के ही शिवेश कुमार की संपत्ति 9.28 करोड़ रुपये, जेडीयू के खीरू महतो की 8.79 करोड़ रुपये, नितिन नवीन की 3.50 करोड़ रुपये है.
एडीआर की रिपोर्ट कहती है, 230 राज्यसभा सांसदों की कुल घोषित संपत्ति 26,508 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इस लिहाज से औसतन हर सांसद पर 115.25 करोड़ रुपये बैठता है. खास बात यह है कि देश के 32 सांसदों ने अपनी संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है. ये आंकड़े देश में धन के असमान वितरण की ओर इशारा करते हैं. जनप्रतिनिधि समाजसेवा करते हुए कई गुना अपनी संपत्ति बढ़ाते जाते हैं और आम आदमी अपनी संपत्ति दोगुनी तक नहीं कर पा रहा है.
पढ़ाई लिखाई की बात करें तो देश के 230 राज्यसभा सांसदों में से 185 स्नातक या उससे अधिक पढ़ाई करके सदन में पहुंचे हैं. इसके अलावा देश के उच्च सदन में कुल 36 महिला सांसद हैं, जो कुल सांसदों का 16 फीसदी ही हैं.