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बिहार के गैर मान्यता प्राप्त 107 दलों की ऑडिट और चंदा रिपोर्ट CEO बिहार की वेबसाइट पर नहीं! ADR की रिपोर्ट से उठे गंभीर सवाल

राजनीतिक दल बनाना भी एक चोखा धंधा बन गया है. चुनाव लड़ने की कोई बाध्यता नहीं और चंदा लेने की कोई सीमा नहीं. मतलब पैसा आने का रास्ता चारों तरफ से है, लेकिन खर्च करना आपकी इच्छा पर निर्भर है. ऐसे में पारदर्शिता और शुचिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है.

बिहार के गैर मान्यता प्राप्त 107 दलों की ऑडिट और चंदा रिपोर्ट CEO बिहार की वेबसाइट पर नहीं! ADR की रिपोर्ट से उठे गंभीर सवाल
Image Credit: एडीआर की नई रिपोर्ट (AI Image)

बिहार के गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए एक गंभीर रिपोर्ट आई है, जिसको लेकर कोई भी अचरज में पड़ सकता है. 29 अक्टूबर, 2026 को आई ADR की यह रिपोर्ट गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की ऑडिट और चंदा रिपोर्ट का अध्ययन करती है. इस रिपोर्ट के आधार पर बिहार के गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल पैदा होते हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार में 167 गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों में से 60 दलों की या तो चंदा रिपोर्ट उपलब्ध है या ऑडिट रिपोर्ट, जबकि 107 दलों की कोई भी रिपोर्ट राज्य के सीईओ की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि 167 में से केवल 36 दलों ने ऑडिट और चंदा, दोनों रिपोर्ट उपलब्ध कराए हैं. चुनाव के दौरान ऐसे राजनीतिक दल जनता से चंदा तो वसूलते हैं, लेकिन जब अपनी आमदनी और खर्च का हिसाब देने की बारी आती है तो उसमें फिसड्डी साबित होते हैं.

एडीआर की रिपोर्ट बताती है कि बिहार के 167 में से कम से कम 60 दलों की एक रिपोर्ट सीईओ की वेबसाइट पर है. 20 दलों की केवल ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध है तो 4 दलों की चंदा रिपोर्ट. 36 दलों की ऑडिट और चंदा, दोनों रिपोर्ट उपलब्ध है. प्रतिशत में बात करें तो 167 दलों में से केवल 21.56 प्रतिशत दलों की ऑडिट और चंदा, दोनों रिपोर्ट उपलब्ध हैं, तो 35.93 प्रतिशत दलों की केवल एक रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में है.

देशभर की बात करें तो 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 2074 रजिस्टर्ड गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों में से 734 दलों की कम से कम एक रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में है. बाकी 1330 दलों की ऑडिट और चंदा रिपोर्ट संबंधित राज्यों के सीईओ की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है. प्रतिशत में बात करें तो देशभर में 65 प्रतिशत पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दलों का पूरा वित्तीय ब्योरा पब्लिक डोमेन में नहीं है. बिहार कम से कम उन राज्यों में शामिल है, जहां कम से कम एक वित्तीय विवरण मिलने की स्थिति राष्ट्रीय औसत से बेहतर है.

चुनाव नहीं लड़ने वाले दल को भी करोड़ों का चंदा

रिपोर्ट का दूसरा पहलू यह है कि कुछ गैर मान्यता प्राप्त दलों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में करोड़ों रुपये के चंदे और आय के बारे में जानकारी दी है.

राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी: इसने 2024-25 में 55.47 करोड़ रुपये की कुल आय घोषित की है. इसमें से पार्टी ने 55.46 करोड़ रुपये खर्च दिखाए हैं. इस पार्टी को दो बार में एक कंपनी से 80 लाख रुपये का चंदा मिला. रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव, 2025 में 50 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे और 65 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे, लेकिन एक भी सीट पर कामयाबी नहीं मिली थी.

भारतीय जनतंत्र विकास पार्टी: इस पार्टी ने 51 करोड़ रुपये से अधिक रुपये चंदे से हासिल होने की जानकारी दी. एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पार्टी ने चुनाव नहीं लड़ा था. फिर भी इतना बड़ा चंदा मिलना आश्चर्यजनक है.

प्रबल भारत पार्टी: इसने 30 करोड़ से ज्यादा रुपये चंदे के रूप में घोषित किए हैं. 2025 के विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने एक सीट पर चुनाव लड़ा और उसे 1155 वोट हासिल हुए थे. इतने वोटों में तो सीट मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता. सवाल यही खड़ा होता है कि जब कोई दल चुनावी राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं है और सफलता भी हासिल नहीं कर पा रहा है तो उसे इतना चंदा कहां से मिल रहा है.

प्रशांत किशोर ने 10 बार में 10 करोड़ रुपये अपनी पार्टी को दिए

जन सुराज पार्टी की बात करें तो एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार पार्टी का पंजीकृत पता दिल्ली बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी ने 243 में से 238 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे और उसे 16 लाख 77 हजार 583 वोट हासिल हुए थे. फिर भी एक विधानसभा सीट वह नहीं जीत पाई थी. एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, 15 पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दलों को बिहार चुनाव में मिले कुल वोटों में जन सुराज की हिस्सेदारी 93.8 प्रतिशत थी. 2024-25 में पार्टी को 101.325 करोड़ रुपये की आय हुई और उसने 9.2078 करोड़ रुपये खर्च किए. पार्टी को 104 बार दान के जरिए 10 शीर्ष दानदाताओं ने 97.72 करोड़ रुपये दिए थे. खास बात यह है कि प्रशांत किशोर ने अपनी ही पार्टी को 10 बार में 10 करोड़ रुपये के दान दिए थे.

क्या कहते हैं नियम?

एडीआर की रिपोर्ट कहती है कि 1 अक्टूबर, 2014 को चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जरूरी दिशानिर्देश दिए थे. इनमें से एक निर्देश यह भी था कि गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय में जरूरी वित्तीय रिपोर्ट जमा करनी होगी.

इन रिपोर्ट में ऑडिट रिपोर्ट, चंदा रिपोर्ट, चुनावी खर्च की जानकारी, 20 हजार रुपये से अधिक के दान का विवरण देना जरूरी है.

यहां एक बात बताना जरूरी है कि किसी दल की रिपोर्ट सीईओ की वेबसाइट पर नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि उसने रिपोर्ट जमा नहीं या कोई वित्तीय अनियमितता हुई है. एडीआर का विश्लेषण केवल उपलब्ध दस्तावेजों और आंकड़ों पर आधारित है. एक बात गौर करने वाली है कि बिहार में छोटे राजनीतिक दलों की संख्या लगातार बढ़ रही है. राजनीतिक दलों की जवाबदेही केवल चुनाव लड़ने और वोट पाने तक सीमित नहीं हो सकती. उसके पास कहां से पैसा आया, किसने चंदा दिया, कितना खर्च हुआ, यह जानकारी जनता को होनी चाहिए.

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About the Author

Sunil Mishra

Sunil Mishra

इंडस्ट्री में 2 दशकों का अनुभव है तो खबरों की बाजीगरी आती है. डिजिटल मीडिया में आधे दशक हो चुके हैं. लंबे समय तक प्रिंट मीडिया में काम करना डिजिटल की दुनिया में मददगार साबित हुआ. दैनिक जागरण से शुरू हुआ सफर, अमर उजाला, हिन्दुस्तान, News Nation, ABP और India Ahead होते हुए Z Bihar Jharkhand तक पहुंचा है. बिहार और झारखंड की स्थानीय और राजनीतिक खबरों की विशेष समझ.
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