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Bihar News: स्कूल और कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए अब शिक्षा की राह पहले से अधिक सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरी बनाने की पहल की जा रही है. बिहार में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस दीदी (अभया ब्रिगेड) का गठन किया गया है. वर्दी में तैनात महिला पुलिसकर्मी छात्राओं के लिए केवल सुरक्षा प्रहरी ही नहीं, बल्कि बड़ी बहन की भूमिका भी निभा रही हैं, ताकि छात्राएं बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं बता सकें. इस वर्ष जुलाई में इस विशेष महिला टीम के गठन की अंतिम अधिसूचना जारी की गई थी. इसके बाद अगस्त तक महज एक महीने में पुलिस दीदी की टीमों ने 790 मनचलों के खिलाफ कार्रवाई की और विभिन्न थानों में 21 मामले दर्ज कराए.
1,040 पुलिस दीदी टीमों का हुआ गठन
राज्यभर में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सभी जिलों में थाना स्तर पर 1,040 पुलिस दीदी टीमों का गठन किया गया है. इन टीमों को स्कूलों, महिला कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों, मॉल, पार्कों, सिनेमा हॉल और बाजारों जैसे संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है. प्रत्येक स्कूटी पर दो महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं, जो संबंधित थानाध्यक्षों के नियंत्रण में काम करती हैं. इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 अगस्त को एक हजार स्कूटी वितरित की थीं. इसके अलावा, 1,500 स्कूटी खरीदने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है. मुख्यमंत्री के अनुसार, बिहार में महिलाओं की सुरक्षा के लिए लगभग 2,700 स्कूटी और 2,000 से अधिक मोटरसाइकिल उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि महिलाएं निर्भीक होकर शिक्षा हासिल कर सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें.
इस अभियान से हजारों छात्र-छात्राएं हुए जागरूक
पुलिस दीदी की पहल के तहत सुरक्षा के साथ-साथ जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है. स्वतंत्रता दिवस की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर 21 जुलाई से 10 अगस्त तक विशेष अभियान 'ऑपरेशन विधि पालक युवक' चलाया गया. इस दौरान पुलिस दीदी की टीमों ने कुल 2,694 संस्थानों का दौरा किया, जिनमें 2,113 स्कूल, 67 कॉलेज और 514 अन्य संस्थान शामिल थे. अभियान के तहत 2,79,941 छात्र-छात्राओं को छेड़छाड़, पीछा करने और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई. इसका उद्देश्य छात्राओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और किसी भी तरह की परेशानी होने पर बिना डर के पुलिस से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित करना है.
पुलिस दीदी की पहल से बढ़ा छात्राओं का आत्मविश्वास
पुलिस दीदी की पहल का असर छात्राओं के आत्मविश्वास में भी दिखाई देने लगा है. गर्दनीबाग स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की 11वीं की छात्रा आलिया तंजीम का कहना है कि पुलिस दीदी की टीम से संवाद करने के बाद उनमें नया हौसला आया है. अब उन्हें विश्वास है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी बात खुलकर रख सकती हैं. वहीं, शास्त्रीनगर राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की 11वीं की छात्रा जिया पांडेय के अनुसार, स्कूल के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से सुरक्षा का एहसास होता है और उनका ध्यान अब पढ़ाई पर अधिक रहता है. छपरा की रहने वाली और पटना के जेडी विमेंस कॉलेज में पढ़ने वाली निखत परवीन भी इस पहल को काफी मददगार मानती हैं. उनका कहना है कि घर से दूर रहकर पढ़ाई करने के दौरान कॉलेज और हॉस्टल के आसपास पुलिस दीदी की तैनाती से ऐसा महसूस होता है, जैसे कोई अभिभावक उनके साथ मौजूद हो.
वर्दी में सुरक्षा, रिश्तों में विश्वासस पुलिस दीदी का यहीं मूलमंत्र
पुलिस दीदी की टीम में शामिल महिला पुलिसकर्मी भी छात्राओं के साथ विश्वास का रिश्ता बनाने पर जोर दे रही हैं. शास्त्रीनगर थाने में कार्यरत पुलिस दीदी आशना भारती का कहना है कि उनकी कोशिश रहती है कि वे बच्चियों से केवल पुलिसकर्मी बनकर नहीं, बल्कि बड़ी बहन की तरह मिलें. उनका मूल मंत्र है, 'वर्दी में सुरक्षा, रिश्तों में विश्वास.' वहीं, गांधी मैदान थाने में तैनात और मगध कॉलेज के पास ड्यूटी करने वाली पुलिस दीदी प्रीति कुमारी बताती हैं कि पहले छात्राएं अपनी परेशानियां साझा करने में झिझकती थीं, लेकिन अब वे खुद आगे आकर अपनी बात बताती हैं. किसी संदिग्ध व्यक्ति के दिखाई देने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. बिहार में पुलिस दीदी की यह पहल महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित माहौल देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इसका उद्देश्य न केवल छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर रोक लगाना है, बल्कि बेटियों को भयमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना भी है.