ड्राइवर की नींद पर नजर रखती है कार, खतरा भांपते ही देती है अलर्ट; जानिए कैसे काम करता है Fatigue Detection System
सफर के दौरान ड्राइवर को आने वाली हल्की सी झपकी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. इसी खतरे को टालने के लिए गाड़ियों में अब फटीग डिटेक्शन सिस्टम आ रहा है, जो पलकें झपकते ही अलर्ट जारी कर जान बचा लेता है.
लंबे सफर के दौरान ड्राइवर को अगर अचानक झपकी आ जाए, तो कुछ सेकंड की लापरवाही बहुत महंगी साबित हो सकती है. यही वजह है कि अब कार कंपनियां ऐसी एडवांस टेक्नोलॉजी ला रही हैं, जो ड्राइवर की थकान और नींद के इशारों को समय रहते पहचानकर अलर्ट कर देती है. यह सिस्टम ड्राइवर की आंखों और चेहरे की एक्टिविटी पर नजर रखता है और खतरा महसूस होते ही अलार्म या चेतावनी जारी करता है. आइए जानते हैं, आखिर कैसे काम करती है ड्राइवरों की जान बचाने वाली यह टेक्नोलॉजी और इसमें कौन-कौन से सेंसर इस्तेमाल किए जाते हैं.
आज के समय में गाड़ियों में कई एडवांस्ड तकनीक मिलती है, जिसमें एक ड्राइवर फटीग डिटेक्शन सिस्टम यानी थकान और नींद पहचानने वाली तकनीक भी मिलती है. यह सिस्टम ड्राइवर को झपकी आने पर तुरंत अलर्ट कर हादसे से बचाता है.
नींद और थकान बनी हादसों की बड़ी वजह
सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी CDC के डेटा के अनुसार, करीब 25 में से 1 लोग कभी न कभी गाड़ी चलाते समय सो जाता है. ट्रिपल ए (AAA) फाउंडेशन फॉर ट्रैफिक सेफ्टी की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि करीब 21 प्रतिशत जानलेवा सड़क हादसों का मुख्य कारण ड्राइवर की थकान होती है. अमेरिका में हर साल सुस्ती और नींद के कारण से 3 लाख से ज्यादा पुलिस -रिपोर्टेड एक्सीडेंट होते हैं, जिनमें 6 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा देते हैं.
कैसे काम करता है फटीग डिटेक्शन सिस्टम?
ऑटोमेकर कंपनियां इस गंभीर समस्या से बचने के लिए दो तरीकों से काम करने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं-
डायरेक्ट मॉनिटरिंग
कार के डैशबोर्ड या स्टीयरिंग व्हील पर लगे इंफ्रारेड कैमरे ड्राइवर के चेहरे, आंखों के झपकने की स्पीड (PERCLOS), बार-बार उबासी लेने और सिर के झुकने के पैटर्न को ट्रैक करते हैं.
इनडायरेक्ट मॉनिटरिंग
लेन-कीपिंग कैमरे यह देखते हैं कि कार बार-बार लेन से बाहर तो नहीं भटक रही है. स्टीयरिंग शाफ्ट में लगे खास सेंसर ड्राइवर के हाथ की छोटी से छोटी हलचल को मापते हैं.
बॉश और दूसरी कंपनियों का स्मार्ट सिस्टम
ऑटोमोबाइल कंपनी बॉश का सिस्टम करीब 70 अलग-अलग सिग्नल्स का एक साथ विश्लेषण करता है. यह सिस्टम गाड़ी चलाने के समय, ट्रिप की लंबाई, इंडिकेटर का इस्तेमाल और यहां तक कि दिन के समय को भी ध्यान में रखता है. अगर ड्राइवर का ड्राइविंग स्टाइल सामान्य से अलग दिखता है, तो डैशबोर्ड पर कॉफी कप का आइकन बनकर आ जाता है और ऑडियो-विजुअल अलर्ट बजने लगता है. हालांकि अभी सभी कारों में यह फीचर नहीं मिलता है, अभी प्रीमियम कारों में यह फीचर मिल रहा है. लेकिन आने वाले समय में लगभग सभी कारों में यह फीचर देखने को मिल सकता है.
कुछ गाड़ियों के GPS सिस्टम सुस्ती का अहसास होते ही आसपास के रेस्टोरेंट या कैफे की लोकेशन स्क्रीन पर दिखाने लगते हैं. वर्तमान में टेस्ला, फोर्ड, होंडा और मर्सिडीज-बेंज जैसी दिग्गज कंपनियां अपनी गाड़ियों में इस प्रकार के ड्राइवर अटेंशन मॉनिटर दे रही हैं. हालांकि यह तकनीक अभी गाड़ी को खुद रोक नहीं सकती, लेकिन समय रहते अलर्ट देकर ड्राइवर को सतर्क जरूर कर देती है.