लोगों को घर से निकाला, पकड़े गए संदिग्ध...जिस बेस से अमेरिका ने हटाए बी-1 बॉम्बर, क्या वहां हुआ था हमला?
जब से अमेरिका ने ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड एयरबेस से बी-1 बॉम्बर्स हटाए हैं. सवालों का एक दौर शुरू हो गया है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी कि अमेरिका ने यह कदम उठाया. दावा यह भी किया जा रहा है कि हो सकता है अमेरिकी बॉम्बर्स पर ईरान ने हमला किया हो.
अमेरिका ने ब्रिटेन के ग्लूसेस्टरशायर के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस से अपने बी-1 बॉम्बर के बेड़े को अचानक हटा लिया है. 3.6 अरब पाउंड की कीमत वाले इन जहाजों को ईरानी ड्रोन हमले से बचाने के लिए हटाया गया है. वहीं, पिछले 10 दिन से इस एयरबेस के करीब रहने वाले गांववालों को ऐसा लग रहा है जैसे वे किसी जबरदस्त एक्शन फिल्म का हिस्सा हों. ऐसा कहना है जिला पार्षद ट्रिस्टन विल्किंसन का, जो इस कदम को कहानी में एक और मोड़ जैसा बता रहे हैं.
जहां तैनात थे बी-1 बॉम्बर, वहां हो रहीं अजीब घटनाएं
अब वहां कुछ ऐसा हो रहा है, जिसकी कल्पना करना भी अजीब है, जैसे ग्रामीणों को घरों से निकालना, संदिग्ध आतंकवादियों पर पुलिस की छापेमारी, और पूरे यूरोप में गुप्त एजेंटों की तैनाती. स्थानीय लोग लगातार यही सवाल पूछ रहे हैं अब आगे यहां क्या होगा? क्योंकि घटनाएं, दावे और फिर जवाबी दावे हर घंटे और भी अजीब होते जा रहे हैं. संभावना जताई जा रही है कि शायद वहां कोई हमला हुआ था. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है.
RAF फेयरफोर्ड बेस की बाहरी बाड़ से 3.2 किमी से भी कम दूरी पर एक हरा-भरा इलाका है वेल्फोर्ड. 1983 में नासा का स्पेस शटल इस बेस पर उतरा था. फेयरफोर्ड को 'ट्रांसओशनिक एबॉर्ट लैंडिंग साइट' के तौर पर चुना गया था, ताकि आपातकालीन लैंडिंग की जरूरत वाले शटल यहां उतर सकें, क्योंकि यहां 3.2 किमी लंबा रनवे था.
सच तो यह है कि अमेरिका दशकों से इस बेस का इस्तेमाल करता रहा है. लेकिन यहां न तो कोई दुकान है और न ही कोई पब. सिर्फ 19वीं सदी का एक चर्च है, जहां महीने में एक बार प्रेयर होती है. यहां रोमांच जैसा कुछ नहीं था.
मगर मार्च के बाद हालात बदल गए. पूर्व पीएम कीर स्टारमर ने अमेरिका को मिडिल ईस्ट में हवाई हमलों के लिए इस बेस को 'स्टेजिंग पोस्ट' के तौर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी दी. इसके बाद, 300 मिलियन पाउंड की कीमत वाले बॉम्बर विमान यहां आने लगे.
लोगों की जिंदगी में आई टेंशन
अचानक फेयरफोर्ड ईरान के निशाने पर आ गया. और वेल्फोर्ड के अच्छे-भले लोगों की जिंदगी में टेंशन आ गई. इलाके में कुछ महीनों से तनाव बढ़ रहा था. तेहरान से मिली धमकियों के बाद वहां पुलिस की मौजूदगी काफी बढ़ा दी गई थी.
50 साल से RAF फेयरफोर्ड के बाहरी इलाके में रह रही एक महिला ने बताया कि हाल ही में बेस के कुछ गेटों पर 'बड़ी-बड़ी कंक्रीट की दीवारें' और गाड़ियां दिखाई दी थीं.
मार्च में, लंदन में ईरान के राजदूत सैयद अली मौसवी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि तेहरान इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या ब्रिटिश सैन्य अड्डे सही टारगेट हैं, क्योंकि अमेरिकी बॉम्बर विमानों ने ईरान पर हमले के लिए इनका इस्तेमाल किया था.
जुलाई में गांववालों की चिंता और बढ़ गई, जब ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खास तौर पर फेयरफोर्ड का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह वाकई एक निशाना है और उस पर हमला करने की धमकी दी.
बाड़ की तरफ बंदूक लेकर लेकर दौड़े गार्ड्स?
26 सितंबर को शाम करीब 4:30 बजे, एक 'लाइव इवेंट' के कारण हथियारबंद पुलिस ने बाहरी बाड़ के पास हो रहे मैच को रोक दिया. ग्रुप में शामिल एक शख्स ने कहा, 'हमने पिछली शाम भी बिना किसी परेशानी के खेला था, लेकिन शनिवार को दो गार्ड बंदूकें लेकर बाड़ की ओर दौड़े और कहा, 'आप यहां नहीं रह सकते. यहां एक लाइव घटना चल रही है.' इससे पहले यह माना जा रहा था कि पुलिस को कुछ गड़बड़ होने का पता आठ घंटे बाद चला था.
तभी सुबह-सुबह एक पार्टी से घर लौट रही एक स्थानीय महिला किसान को एक सड़क पर तीन सफेद वैन खड़ी मिलीं, जो लावारिस लग रही थीं.
हैरान होकर उसने अपनी कार घुमाई, तभी उसने देखा कि चेहरे पर नकाब पहने कुछ आदमी पेड़ों और खेतों के बीच से होते हुए कुछ सौ फीट दूर एयरबेस की ओर भाग रहे थे. उसने 999 पर कॉल किया और बाद में अपने लोकल व्हाट्सएप ग्रुप पर मैसेज करके पड़ोसियों को अपने दरवाजे बंद रखने की चेतावनी दी. दस मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पांच युवकों को गिरफ्तार कर लिया.
एक ग्रामीण के रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज में उन्हें सड़क के बीचों-बीच बैठे हुए दिखाया गया है, जिनके हाथ पीछे की ओर बंधे हुए हैं. पुलिस को शक था कि उन्होंने सुसाइड वेस्ट (आत्मघाती जैकेट) पहनी हो सकती है, इसलिए उन पांचों के शरीर के ऊपरी हिस्से के कपड़े उतरवा दिए गए थे. जल्द ही इसे एक बड़ी घटना घोषित कर दिया गया और आपातकालीन सेवाओं की भारी तैनाती की गई, जिसमें 400 मीटर के घेरे में 'हैजर्डस एरिया रिस्पॉन्स टीम' भी शामिल थी.
लोगों को घर खाली करने का आदेश
वेल्फोर्ड के ज्यादातर निवासियों को इस बारे में तब पता चला, जब अधिकारियों ने उनके दरवाजे खटखटाकर जगाया और तुरंत घर खाली करने को कहा. बाद में लोग अपने पालतू जानवरों को वहीं छोड़कर पास के साइरेनसेस्टर लीजर सेंटर चले गए, जिसका इस्तेमाल आपातकालीन आश्रय स्थल के तौर पर किया जा रहा था.
जूलियन टड्सबरी और उनकी पत्नी उन 85 परिवारों में शामिल थे, जिन्हें घर खाली करने का आदेश दिया गया था. सुबह 7 बजे उन्होंने ड्रेसिंग गाउन पहने हुए दरवाजा खोला. टड्सबरी ने बताया, 'वहां कई पुलिसकर्मी और ड्राइववे में तीन पुलिस कारें थीं. उन्होंने कहा कि आपको घर खाली करना होगा, कोई बड़ी घटना हुई है, लेकिन वे ज्यादा जानकारी नहीं दे सके.'
गांव को सुरक्षित रूप से खाली कराने के बाद, एक बम डिस्पोजल रोबोट ने तीन सफेद वैन की जांच शुरू की. इनमें से दो वैन के पिछले दरवाजे खुले थे और उनके आसपास जमीन पर बड़े-बड़े काले बैरल बिखरे हुए थे.
महिला किसान ने कहा, 'जब एयर बेस हाई अलर्ट पर हो तो रात 1 बजे किसी आम नागरिक का कोई अजीब गतिविधि देखना आम बात नहीं है. मुझे यह बहुत हैरानी वाली बात लगती है. यह बहुत अजीब बात है कि उन्हें इस बारे में पता नहीं चला और मुझे फोन करना पड़ा. यह सोचना ही हैरानी भरा है कि आपका सामना आतंकवादियों से हुआ और हो सकता है कि आपने किसी आतंकवादी साजिश को नाकाम कर दिया हो'.
फेयरफोर्ड घटना में ईरान का हाथ!
जाहिर है, इस मामले में ईरान का नाम तुरंत सामने आया. प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने BBC को बताया कि सरकार का मानना है कि RAF फेयरफोर्ड की घटना में ईरान का हाथ था. हालांकि, उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी. ईरान ने इसमें शामिल होने से इनकार किया है.
इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को पता था कि वे लोग बड़ा नुकसान पहुंचाने की फिराक में थे और 'हम लंबे समय से उन पर नजर रखे हुए थे'. हालांकि, UK के सुरक्षा सूत्रों ने तुरंत कहा कि ये गिरफ्तारियां न तो पहले से तय थीं और न ही खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थीं.
इन पांच लोगों को विस्फोटक से जुड़े अपराधों और आतंकवादी हमले की तैयारी के शक में हिरासत में लिया गया था. लेकिन अगले ही दिन उन्हें पुलिस जमानत पर रिहा कर दिया गया. राष्ट्रपति ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस फैसले की आलोचना की. यह वाकई हैरान करने वाली बात थी.
क्या अमेरिका को दिया गया संदेश?
तो असल में वहां क्या हो रहा था? एक थ्योरी यह है कि यह ईरान के समर्थन वाली एक झूठी अफवाह हो सकती है, जिसका मकसद दहशत फैलाना और अमेरिका को यह संदेश देना था कि बेस पर बम हमला करना कितना आसान हो सकता है. या फिर यह कोई खतरनाक धोखा या हमले की तैयारी थी.
काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग की सीनियर नेशनल कोऑर्डिनेटर विक्की इवांस ने कहा, 'ग्लोस्टरशायर की घटनाओं से जुड़े हालात की जांच बहुत जटिल है और हमारी स्पेशलिस्ट टीमें कई पहलुओं पर जांच कर रही हैं. जैसा कि हमने साफ किया है, हम सभी संभावित पहलुओं पर गौर कर रहे हैं, जिसमें किसी दूसरे देश की भूमिका भी शामिल है.'
संदिग्धों को किया गया गिरफ्तार
मामला तब और उलझ गया जब पिछले गुरुवार को पता चला कि एक छठे व्यक्ति को (जिसके पास ईरान और ब्रिटेन दोनों की नागरिकता है) बेस पर हमले की साजिश रचने के शक में गिरफ्तार किया गया. 27 साल के इस शख्स को सेंट्रल लंदन के वेस्टमिंस्टर में 2006 के टेररिज्म एक्ट की धारा 5 के तहत आतंकवादी गतिविधियों की तैयारी के शक में पकड़ा गया. पुलिस ने बताया कि एक और 22 साल के शख्स को भी वेस्टमिंस्टर में इसी अपराध के शक में गिरफ्तार किया गया.
इस बीच डोनाल्ड ट्रंप फिर से सामने आए. उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा, 'कुछ खतरे थे और दुश्मन को उकसाने के बजाय, हम दुश्मन को पकड़ेंगे और हराएंगे. लेकिन हम उन्हें वहां क्यों छोड़ें? इसलिए हमने उन्हें थोड़ी दूर हटा दिया, बहुत दूर नहीं.'
जब उनसे पूछा गया कि क्या कोई 'स्पेशल खतरा' था, जिसकी वजह से विमानों को हटाया गया, तो उन्होंने जवाब दिया, हम ऐसा कह सकते हैं. वे गलती से नहीं उड़े थे.' यह भी खबर आई थी कि विमानों को वापस बुलाने की इतनी जल्दी थी कि B-1 विमान तब उड़ान भर गए, जब उनके लिए ईंधन भरने वाले विमानों का इंतजाम अभी किया ही जा रहा था. लेकिन सोमवार को मार्को रुबियो ने इस वापसी को ज्यादा अहमियत नहीं दी और कहा कि इसका RAF बेस पर संदिग्ध आतंकी साजिश से कोई सीधा संबंध नहीं था.
ड्रोन्स से हमले की थी प्लानिंग
फिर मंगलवार को पता चला कि यह असल में और भी खतरनाक साजिश का हिस्सा था. ईरान ड्रोन्स का इस्तेमाल करके विमानों पर हमला करना और बेस पर तैनात सैकड़ों अमेरिकी कर्मियों को मारना चाहता था.
ब्रिटिश और अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह प्लान पिछले साल यूक्रेन के ड्रोन हमले की तर्ज पर बनाया गया था, जिसमें रूस के पांच बेस पर कम से कम 40 एयरक्राफ्ट तबाह हो गए थे. उस जबरदस्त हमले को रूस का 'पर्ल हार्बर' कहा गया था. इससे पुतिन की वॉर मशीन्स को करीब 6,66,42,10,80,000 रुपये का नुकसान हुआ और देश की क्रूज मिसाइल क्षमता एक-तिहाई से ज्यादा कम हो गई. लेकिन, यूएस के लिए, फेयरफोर्ड से B-1 बॉम्बर्स को अचानक वापस बुलाने का बहुत ही असामान्य फैसला शर्मिंदगी की बात है.