बख्तरबंद गाड़ी, दिल्ली में हाईटेक तैयारी! पुतिन की एंट्री से पहले तीन लेयर सुरक्षा घेरा; 25,000 सुरक्षाकर्मियों का पहरा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं. लेकिन उससे पहले उनके विमान नोएडा एयरपोर्ट पर लैंड कर चुके हैं. साथ ही दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. एनएसजी ने भी मॉक ड्रिल की है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए आ रहे हैं. इस साल ब्रिक्स का प्रेसिडेंट नेशन भारत है. इसलिए पूरी दुनिया की नजर दिल्ली के ब्रिक्स समिट में है. लेकिन रूसी राष्ट्रपति का दौरा एक और मायने में खास है. रूसी राष्ट्रपति का दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत के साथ सबसे बड़ी डिफेंस डील का मसौदा तैयार है. चीन और ईरान के साथ भी भारत के रिश्ते नए दौर में जाते दिख रहे हैं. पुतिन का ये दौरान जितना रणनीतिक रूप से अहम है, उनके लिए सुरक्षा के भारी बंदोबस्त भी दिल्ली में किए गए हैं.
ये 9 महीने में दूसरी बार है, जब रूस के राष्ट्रपति पुतिन दिल्ली पहुंचने वाले हैं. इस बार ब्रिक समिट और उससे पहले भारत से सबसे बड़ी डिफेंस डील के लिए. ये कोई आम दौरा नहीं, बल्कि इस पर दुनिया भर की नजर है, लिहाजा सुरक्षा के लिहाज से भी ये काफी अहम दौरा है. पुतिन के आने से पहले एनएसजी कमांडोड मॉल ड्रिल कर रहे हैं कि कैसे वह आपात स्थिति से निपटने में कामयाब हो सकते हैं.
इस ड्रिल से पहले रूस का मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान नोएडा के एयरपोर्ट पर लैंड कर चुका है. रूस का ये इल्यूशिन आईएल-76 विमान राष्ट्रपति के कहीं जाने से कुछ घंटे पहले ही पहुंच चुका है. इस विमान में रूसी राष्ट्रपति के सिक्योरिटी स्टाफ से लेकर उनकी कारें, और सुरक्षा के पूरे साजो सामान मौजूद होता है. तभी तो इसे चलता फिरता क्रेमलिन, यानी रूसी राष्ट्रपति का आवास कहते हैं. इस मिलिट्री प्लेन के जरिए पुतिन की सुरक्षा के लिए जरूरी रूस के विशेष सुरक्षा अधिकारी और उनकी बख्तरबंद गाड़ी दिल्ली पहुंच चुकी है.
हालांकि दिसंबर 2025 में जब पुतिन दिल्ली आए थे, तो अपने प्रोटोकॉल से अलग होकर पीएम मोदी के साथ एक ही कार में सवार हुए. तब इस कार की एयरपोर्ट से लेकर फाइनल डेस्टिनेशन तक अभूतपूर्व सिक्योरिटी देखने को मिली थी. इस बार की तैयारी इससे अलग दिख रही है.
कैसा है पुतिन का प्लेन
- पुतिन के प्लेन का नाम IL-96-3000 PU है.
- इस विमान को फ्लाइंग मिलिट्री हेडक्वार्टर कहा जाता है.
- इसमें ग्लोबल सिक्योरिटी फ्रेमवर्क की हर सुविधा होती है.
- इसमें मल्टी लेयर मिसाइल जैमिंग सिस्टम लगा होता है.
- ये सिस्टम किसी भी अटैक को न्यूट्रलाइज करने में सक्षम है.
- दिल्ली के एयरस्पेस में आते ही 2 सुखोई-30 प्लेन को एस्कॉर्ट करेंगे.
प्लेन से उतरने के बाद पुतिन तीन लेयर के कमांडो घेरे में चलते हैं. पहला लेयर उनके निजी कमांडोज का होता है. दूसरा घेरा केजीबी अधिकारियों का होता है और तीसरा घेरा मेजबान देश के कमांडोज और स्पेशल फोर्सेज का होता है.
व्लादिमीर पुतिन साल 2000 से सत्ता में हैं. सोवियत तानाशाह जोसेफ स्टालिन के बाद क्रेमलिन के किसी भी नेता के मुकाबले उनका कार्यकाल सबसे लंबा रहा है.
- पुतिन की सुरक्षा की बात करें तो उनके हर कदम पर सैकड़ों बॉडीगार्ड बारीकी से नजर रखते हैं, जो 24 घंटे उनके साथ रहते हैं.
- रूसी राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा में जुटी सीक्रेट टीम को SBP के नाम से जाना जाता है.
- ख़ासतौर से राष्ट्रपति और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए समर्पित है.
- पुतिन के साथ जब ये विदेशी दौरे पर जाते हैं, तो वे खुद को चार मंडलियों में बांट लेते हैं.
- पुतिन का खाना चुपके से तैयार किया जाता है और वह जो कुछ भी पीते हैं उसे पहले उनके निकटतम सलाहकार जांचते हैं.
बहरहाल, पुतिन, इसी प्रोटोकॉल के साथ ब्रिक्स सम्मेलन में आ रहे हैं, जो 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाला है. इसमें रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी पहुंचेंगे. इस सम्मेलन के लिए पूरी दिल्ली में स्पेशल सिक्योरिटी ड्रिल चल रही है.
- VIP मूवमेंट के मद्देनजर दिल्ली में लगभग 25,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है.
- इसमें NSG के कमांडो और ट्रैफिक पुलिस की व्यापक तैनाती की गई है.
- समिट एरिया में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के 4800 ट्रेन्ड जवान तैनात किए गए हैं.
- सुरक्षा घेरे में आधुनिक ड्रोन, जैमर, स्नाइपर और AI-सक्षम कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
भारत पहुंचे पुतिन के स्पेशल सिक्योरिटी एजेंट्स के मुताबिक पुतिन को हेलीकॉप्टर पसंद नहीं है, वह आमतौर पर मोटरसाइकिल सवारों, कई बड़ी काली कारों के साथ एक बड़े काफिले में यात्रा करते हैं. इसके लिए कई बार हवाई क्षेत्र में कोई भी ड्रोन उड़ाने पर पाबंदियां लगा दी जाती है. यातायात रोक दिया जाता है. दिल्ली में पुतिन के लिए इसी मॉडल का सिक्योरिटी अरेंजमेंट किया गया है.