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बख्तरबंद गाड़ी, दिल्ली में हाईटेक तैयारी! पुतिन की एंट्री से पहले तीन लेयर सुरक्षा घेरा; 25,000 सुरक्षाकर्मियों का पहरा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं. लेकिन उससे पहले उनके विमान नोएडा एयरपोर्ट पर लैंड कर चुके हैं. साथ ही दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. एनएसजी ने भी मॉक ड्रिल की है.

Written By Rachit Kumar
Published: Sep 10, 2026, 03:40 PM IST | Updated: Sep 10, 2026, 03:50 PM IST
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए आ रहे हैं. इस साल ब्रिक्स का प्रेसिडेंट नेशन भारत है. इसलिए पूरी दुनिया की नजर दिल्ली के ब्रिक्स समिट में है. लेकिन रूसी राष्ट्रपति का दौरा एक और मायने में खास है. रूसी राष्ट्रपति का दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब भारत के साथ सबसे बड़ी डिफेंस डील का मसौदा तैयार है. चीन और ईरान के साथ भी भारत के रिश्ते नए दौर में जाते दिख रहे हैं. पुतिन का ये दौरान जितना रणनीतिक रूप से अहम है, उनके लिए सुरक्षा के भारी बंदोबस्त भी दिल्ली में किए गए हैं.

ये 9 महीने में दूसरी बार है, जब रूस के राष्ट्रपति पुतिन दिल्ली पहुंचने वाले हैं. इस बार ब्रिक समिट और उससे पहले भारत से सबसे बड़ी डिफेंस डील के लिए. ये कोई आम दौरा नहीं, बल्कि इस पर दुनिया भर की नजर है, लिहाजा सुरक्षा के लिहाज से भी ये काफी अहम दौरा है. पुतिन के आने से पहले एनएसजी कमांडोड मॉल ड्रिल कर रहे हैं कि कैसे वह आपात स्थिति से निपटने में कामयाब हो सकते हैं.

इस ड्रिल से पहले रूस का मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान नोएडा के एयरपोर्ट पर लैंड कर चुका है. रूस का ये इल्यूशिन आईएल-76 विमान राष्ट्रपति के कहीं जाने से कुछ घंटे पहले ही पहुंच चुका है. इस विमान में रूसी राष्ट्रपति के सिक्योरिटी स्टाफ से लेकर उनकी कारें, और सुरक्षा के पूरे साजो सामान मौजूद होता है. तभी तो इसे चलता फिरता क्रेमलिन, यानी रूसी राष्ट्रपति का आवास कहते हैं. इस मिलिट्री प्लेन के जरिए पुतिन की सुरक्षा के लिए जरूरी रूस के विशेष सुरक्षा अधिकारी और उनकी बख्तरबंद गाड़ी दिल्ली पहुंच चुकी है.

हालांकि दिसंबर 2025 में जब पुतिन दिल्ली आए थे, तो अपने प्रोटोकॉल से अलग होकर पीएम मोदी के साथ एक ही कार में सवार हुए. तब इस कार की एयरपोर्ट से लेकर फाइनल डेस्टिनेशन तक अभूतपूर्व सिक्योरिटी देखने को मिली थी. इस बार की तैयारी इससे अलग दिख रही है.

कैसा है पुतिन का प्लेन

प्लेन से उतरने के बाद पुतिन तीन लेयर के कमांडो घेरे में चलते हैं. पहला लेयर उनके निजी कमांडोज का होता है. दूसरा घेरा केजीबी अधिकारियों का होता है और तीसरा घेरा मेजबान देश के कमांडोज और स्पेशल फोर्सेज का होता है.

व्लादिमीर पुतिन साल 2000 से सत्ता में हैं. सोवियत तानाशाह जोसेफ स्टालिन के बाद क्रेमलिन के किसी भी नेता के मुकाबले उनका कार्यकाल सबसे लंबा रहा है.

बहरहाल, पुतिन, इसी प्रोटोकॉल के साथ ब्रिक्स सम्मेलन में आ रहे हैं, जो 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाला है. इसमें रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी पहुंचेंगे. इस सम्मेलन के लिए पूरी दिल्ली में स्पेशल सिक्योरिटी ड्रिल चल रही है.

भारत पहुंचे पुतिन के स्पेशल सिक्योरिटी एजेंट्स के मुताबिक पुतिन को हेलीकॉप्टर पसंद नहीं है, वह आमतौर पर मोटरसाइकिल सवारों, कई बड़ी काली कारों के साथ एक बड़े काफिले में यात्रा करते हैं. इसके लिए कई बार हवाई क्षेत्र में कोई भी ड्रोन उड़ाने पर पाबंदियां लगा दी जाती है. यातायात रोक दिया जाता है. दिल्ली में पुतिन के लिए इसी मॉडल का सिक्योरिटी अरेंजमेंट किया गया है.
 

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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