न नौकरी पर तलवार, न छंटनी की मार: 101 साल पुरानी इस दिग्गज कंपनी में कभी नहीं हुआ Layoff, ऐसे मिलती है जॉब सिक्योरिटी
सोशल मीडिया पर इस समय अमेरिकी कंपनी टोरनी की काफी चर्चा की जा रही है. ये चर्चा तब शुरू हुई, हाल में ही माइक्रोसॉफ्ट ने कई देशों में कुछ कर्मचारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया है. टोरनी करीब 100 साल पुरानी कंपनी है, जिसने कभी भी कर्मचारियों की छंटनी नहीं की.
मंदी के समय में किसी कंपनी में कर्मचारियों की छंटनी कब हो जाए, इसको लेकर कुछ भी कहा नहीं जा सकता. जब टेक की दिग्गज माइक्रोटेक और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियां अपना खर्च कम करने के लिए कर्मचारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा सकती हैं, तो किसी सामान्य कंपनी पर कितना भरोसा किया जाए, इसको लेकर कुछ भी कहना अतिश्योक्ति होगी.
हालांकि, दुनिया में कई कंपनियां ऐसी भी हैं, जो कर्मचारियों को नौकरी से निकालने में हिचकिचाती हैं. मंदी और छंटनी के इस दौर में सोशल मीडिया पर इस समय 101 साल पुरानी अमेरिकी कंपनी 'टोरानी' काफी चर्चा में है. दावा किया जा रहा है कि करीब 100 साल से भी पुरानी इस कंपनी ने कभी अपने किसी कर्मचारी को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया. इस कंपनी ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में एक बड़ी मिसाल पेश की है.
कंपनी ने कभी किसी को नौकरी से नहीं निकाला
मंदी के समय में जब बड़ी-बड़ी कंपनियां घाटे से गुजरती हैं, तो वह खर्चों को कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी करती हैं. ऐसे समय में टोरानी की सीईओ मेलानी डुलबेको के विचार ही अलग हैं. डुलबेको का मानना है कि किसी भी कंपनी के लिए छंटनी कभी कोई मजबूरी नहीं होती, बल्कि एक चुनाव होता है.
उन्होंने कहा कि हमने कोरोना संटक और भारी कर्ज के बावजूद लोगों को नौकरी से नहीं निकाला. विज्ञापन और यात्रा खर्च काटकर नौकरियों की हिफाजत की. टोरनी की सीईओ मेलानी डुलबेको का मानना है कि किसी कंपनी में तकनीक का इस्तेमाल इंसानों को हटाने के लिए नहीं, बल्कि उनकी ताकत को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए.
क्यों नहीं छंटनी करती है ये कंपनी
टोरानी करीब 101 साल पुरानी दिग्गज टेक कंपनी है. कंपनी की वर्तमान सीईओ मेलानी डुलबेको का मानना है कि किसी भी आर्थिक मंदी या वित्तीय दबाव से निपटने के लिए कर्मचारियों को नौकरी से निकालना एकमात्र रास्ता नहीं हो सकता है. उनका मानना है कि किसी भी विपरीत समय में हुनरमंद कर्मचारी जब कंपनी में हों, तो वह उस परिस्थिति से निकालने में हमारी मदद करेंगे.
मेलानी डुलबेको का यह बयान कई मायनों में खास हो जाता है, जब बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां अपने कर्मचारियों को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाती हैं. बता दें कि हाल में ही दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में कुछ खास स्तर के कर्मचारियों को खुद से नौकरी छोड़ने का विकल्प दिया है.
जब कठिन समय था, तब कंपनी ने कैसे किया काम?
जब बात आती है कि टोरानी कंपनी ने किसी बड़े आर्थिक मंदी या किसी संकट के समय कर्मचारियों को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया, तो कंपनी ने कैसे खुद को बचाया. कंपनी की सीईओ बताती हैं कि कोरोना काल के दौरान सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा था. लॉकडाउन के कारण सभी रेस्टोरेंट्स बंद हो गए थे और उनके सिरप की डिमांड घट गई थी. ऐसी स्थिति में कंपनी ने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने बजाए विज्ञापन और मर्केटिंग में कटौती की.
कंपनी ने हर विभाग को सीधे कहा कि फालतू खर्च से बचिए. कैफे बंद होने पर कंपनी ने सीधे ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए इंटरनेट का सहारा लिया. इसके साथ ही ग्रोसरी व्यापार पर ध्यान दिया. इसका रिजल्ट काफी अच्छा रहा और अप्रैल 2020 में 20 प्रतिशत लाभ गिरने के बाद उसी साल मई में कंपनी पटरी पर लौट आई. इसके बाद पूरे साल में 15 फीसदी से अधिक कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की.
मुनाफा से पहले कर्मचारी वाला फार्मूला
कंपनी की सीईओ मेलानी डुलबेको का कहना है कि छंटनी करना किसी कंपनी का चुनाव होता, यह कभी भी मजबूरी नहीं हो सकती. टोरनी को साल 2020 में एक जगह से दूसरी जगह पर शिफ्ट किया गया, तब कंपनी की सीईओ ने सबसे पहले अपने कर्मचरियों के घरों के पिन कोड का नक्शा बनाया, जिससे किसी भी नई जगह पर आने में किसी को कोई परेशानी न उठानी पड़े.
आज के आधुनिक परिवेश में टोरनी मार्केट रिसर्च के साथ सेल्स के काम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का खूब इस्तेमाल कर रही है. कंपनी की सीईओ का कहना है कि तकनीक से कर्मचारियों का काम आसान बनाया जा सकता है, जिससे उत्पादकता में भी इजाफा देखने को मिलेगा.
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