हूती नेताओं से सीधी बात, अमेरिका नहीं देगा सऊदी का साथ! रियाद को लगा सबसे बड़ा झटका
हूतियों के खिलाफ चल रहे संघर्ष में अब सऊदी अरब को सबसे बड़ा झटका लगा है. अमेरिका ने सऊदी अरब की मदद करने से इनकार कर दिया है. इसके अलावा तुर्किये और पाकिस्तान भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं.
हूतियों के खिलाफ संघर्ष में सऊदी अरब को अमेरिका ने बड़ा झटका दिया है. अमेरिका ने फैसला किया है कि वह हूतियों और सऊदी अरब के झमेले में नहीं पड़ेगा. हाल ही में ओमान के मस्कट में अमेरिकी दूतावास में यूएस अधिकारियों ने हूथी नेताओं से मुलाकात की थी. इसके बाद अमेरिका ने यह फैसला लिया. हूतियों को ईरान का समर्थन हासिल है. इस विद्रोही गुट ने अमेरिका को भरोसा दिलाया कि दोनों पक्षों के बीच 2025 में हुआ संघर्ष-विराम समझौता अभी भी लागू है और संगठन का लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है. हूथी गुट ने साफ किया कि यमन की नाकेबंदी के कारण केवल सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को ही निशाना बनाया जा रहा है.
अमेरिका नहीं देगा दखल
इसे ऐसे समझ सकते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से आवाजाही की आजादी में खतरा पैदा करने वाले हूथी गुट की यमन के पश्चिमी तट पर बढ़त की निंदा तो की, लेकिन सऊदी अरब के समर्थन में किसी भी सैन्य कार्रवाई से इनकार कर दिया. अमेरिका पहले से ही ईरान के साथ एक भारी-भरकम खर्च वाली जंग में उलझा हुआ है. इसके अलावा, ईरान ही हूथी गुट का समर्थन करता है।
अमेरिका ने मार्च 2025 में हूथी गुट को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था, लेकिन हाल के समय में अमेरिकी अधिकारियों ने हमास, हिज्बुल्लाह और ईरान के नेताओं से मुलाकात की है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को बताया कि अमेरिका हूथी गुट के सीधे संपर्क में है.
अमेरिका के सीधे तौर पर शामिल न होने के फैसले ने सऊदी अरब पर दबाव बढ़ा दिया है. अब उसे या तो यमन के भविष्य के शासन को लेकर हूथी गुट के साथ कूटनीतिक समाधान निकालना होगा, या फिर हूथी गुट को पीछे धकेलने के लिए पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर कोई क्षेत्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश करनी होगी. पिछले हफ्ते एक तेज हमले में, हूथी गुट ने लाल सागर तट के साथ-साथ पश्चिमी यमन के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया.
'हम बेबस महसूस कर रहे'
अमेरिका ने तो मदद के लिए ना कर दी. अब सऊदी अरब में अमेरिका की इस हरकत को लेकर गुस्सा और निराशा बढ़ रही है. सऊदी अरब को लग रहा है कि उसको सहयोगियों से पूरी तरह से मदद नहीं मिल रही है.
अमेरिकी सरकार के फैसले के बाद अब सऊदी सरकार इस स्थिति से दुखी है. सऊदी अरब के शाही परिवार के करीबी सूत्र के हवाले से इजरायली वेबसाइट N12 ने बताया कि इस मामले में अमेरिकी रुख से सऊदी अरब में बेबसी की भावना बढ़ रही है. सऊदी को लगता है कि अमेरिका की ओर से कोई एक्शन नहीं लिए जाने के कारण हूती लगातार अपना असर इलाके में बढ़ा रहे हैं. इतना ही नहीं, मक्का समझौते के बावजूद तुर्किये और पाकिस्तान भी आगे नहीं आ रहे हैं. ऐसे मौके पर वह अकेला महसूस कर रहा है.