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अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में अगर हवा का रुख पलटा तो सियासी सीमाओं के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाथ कुछ हद तक बंध सकते हैं. अगर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर डेमोक्रेट्स का कब्जा हो जाता है, तो विपक्ष को प्रशासन की ओर से ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को संभालने के तरीके की जांच करने, इसके मकसद पर सवाल उठाने और आगे की सैन्य कार्रवाई को सीमित करने के लिए दबाव डालने की ज्यादा ताकत मिल जाएगी. हालांकि, ट्रंप कमांडर-इन-चीफ बने रहेंगे, और उनके पास अमेरिकी सैन्य अभियानों पर फरमान देने का हक रहेगा.
कांग्रेस के पास जंग और सैन्य खर्च को लेकर शक्तियां तो हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल करके राष्ट्रपति को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर करना मुश्किल है.
ट्रंप मिलिट्री ऑपरेशन को सीमित करने वाले किसी भी कानून पर वीटो लगा सकते हैं. इस वीटो को पलटने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी. यह एक ऐसा आंकड़ा है, जिसे हासिल करना डेमोक्रेट्स के लिए मुश्किल है, भले ही उन्हें चुनावों में बड़ी जीत क्यों न मिल जाए. इसके अलावा, सांसद उस इलाके में पहले से तैनात अमेरिकी सैनिकों के लिए फंडिंग काटने से भी हिचकिचा सकते हैं.
फिर भी, यह राजनीतिक दबाव ट्रंप की रणनीतिक सोच को प्रभावित कर सकता है. ईरान के साथ जंग अब एक घरेलू मुद्दा बन गया है, क्योंकि इसके आर्थिक नतीजे खासकर, ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और जीवन-यापन की बढ़ती लागत, मतदाताओं पर भारी पड़ रहे हैं.
'वॉशिंगटन एक्जामिनर' के कोट किए गए एक हालिया सर्वे से पता चला है कि 70% से ज्यादा अमेरिकी चाहते हैं कि कांग्रेस जीवन-यापन की लागत कम करने और 2027 तक जंग खत्म करने को तवज्जो दें. ट्रंप के अपने सपोर्टर बेस (MAGA बेस) के भीतर भी असंतोष पनपा है, जहां विदेशों में सैन्य दखलअंदाजी के विरोध ने उनके पहले के 'अमेरिका फर्स्ट' वाले वादों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है.
इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या चुनाव के बाद प्रशासन सैन्य कार्रवाई को फिर से शुरू कर सकता है या उसका विस्तार कर सकता है. NPR की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की ओर से हमलों के एक नए दौर की तैयारियों ने मिडटर्म चुनाव के बाद संघर्ष के और बढ़ने की आशंकाओं को हवा दी है.
अरब सागर में अमेरिका के दो विमानवाहक पोत मौजूद हैं और तीसरा रास्ते में है, जबकि इस क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों ने भी सैन्य अभ्यास तेज कर दिए हैं. इन घटनाक्रमों से यह पक्का तो नहीं होता कि हमला होने ही वाला है, लेकिन ये एक बड़े सैन्य अभियान की संभावना की ओर इशारा जरूर करते हैं.
इसलिए, मतदान के बाद ट्रंप के सामने तीन मुख्य रास्ते हो सकते हैं. पहला-पीछे हटकर बातचीत के जरिए कोई समझौता करना. दूसरा नाकेबंदी और टारगेटेड स्ट्राइक्स के जरिए मौजूदा दबाव बनाए रखना. तीसरा ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ सैन्य अभियान को और तेज कर देना.
चुनाव के नतीजे हर विकल्प की राजनीतिक कीमत बदल सकते हैं, लेकिन सबसे अहम फैसले व्हाइट हाउस के हाथ में ही रहेंगे.