Why US Shift B-1 Bombers from London? ईरान के साथ जंग में उलझे अमेरिका को यूरोप में अपने सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले का डर सता रहा है. उसने इंग्लैंड में अपने मिलिट्री अड्डे 'आरएएफ फेयरफोर्ड' (RAF Fairford) की रेकी की खबर सामने आने के बाद वहां से अपने सभी बॉम्बर जेट वापस बुला लिए हैं. इन विमानों को यूएस में उनके घरेलू ठिकानों पर भेजा गया है. इस मिलिट्री अड्डे पर तैनात बॉम्बर का इस्तेमाल ईरान पर अटैक करने के लिए किया जा रहा था.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन ने बॉम्बर्स को शिफ्ट किए जाने की पुष्टि की पुष्टि की है. प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी बॉम्बर्स अपने मूल ठिकानों पर वापस लौट आए हैं. ऐसे करीब एक दर्जन बी-1 (B-1) बॉम्बर जेट लंदन के पास आरएएफ फेयरफोर्ड पर तैनात थे.
यहां पर तैनात दर्जनों बी-52 और बी-1 बॉम्बर जेट ने ईरान पर हमले के अभियान में हाल में भाग लिया था. उसने लंदन से उड़ान भरकर तेहरान समेत ईरान के विभिन्न शहरों पर बम बरसाए थे. लेकिन अब ये प्लेन वहां से विदा हो चुके हैं. कई पर्यवेक्षकों ने रविवार को बी-1 बॉम्बर्स को आरएएफ फेयरफोर्ड से जाते हुए देखा.
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते लंदन में एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया था. उसके पास ब्रिटेन और ईरान की दोहरी नागरिकता थी. आरोप लगाया गया कि वह सैन्य अड्डे पर कोई आतंकी कृत्य करने की फिराक में है. उसकी निशानदेही पर 5 अन्य को पकड़ा गया था. बाद में सभी को जमानत पर छोड़ दिया गया.
इस वाकये पर ब्रिटिश अधिकारियों ने आशंका जताई कि आरोपियों का संबंध ईरान से हो सकता है. पीएम एंडी बर्न्हम ने कहा कि ब्रिटेन के पास इस मामले में ईरान की संलिप्तता के पुख्ता संकेत हैं. वहीं, ईरान ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इनकार कर दिया. इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताते हुए तेहरान में ब्रिटिश राजदूत को भी तलब किया गया.
इस घटना पर यूएस ने भी बड़ी चिंता जताई थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संदिग्धों की साजिश अमेरिकी सैन्य अड्डे को भारी नुकसान पहुंचाने की थी. उनकी हां में हां करते हुए विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस मामले में विदेशी ताकत का हाथ होने का इशारा किया था.
इन लड़ाकू जेट्स की वापसी ऐसे वक्त में हुई है, जब ट्रंप ईरान के खिलाफ युद्ध के नए तरीकों समेत विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान तबाह हो चुका है. इसके बावजूद वह बढ़िया डील नहीं दे रहा है. ऐसे में अब उन्हें कुछ कठिन फैसले लेने हैं. सवाल ये है कि यह रास्ता मुश्किल होगा या आसान.