UNGA से ठीक पहले रूस को US का झटका! डिप्टी विदेश मंत्री को नहीं दिया वीजा तो भड़के पुतिन
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक से ठीक पहले अमेरिका ने रूस के डिप्टी विदेश मंत्री को वीजा देने से इनकार कर दिया है. अमेरिका के इस फैसले पर क्रेमलिन ने सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है. जानिए दोनों देशों के बीच गहराते इस कूटनीतिक तनाव की पूरी वजह.
संयुक्त राष्ट्रसभा में होने वाली UNGA की बैठक में अमेरिका ने रूस के डिप्टी विदेश मंत्री को वीजा नहीं दिया है. इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है. रूसी अधिकारी को अमेरिकी वीजा नहीं मिलने पर क्रेमलिन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. इस मामले को लेकर ऐसी बातों के कयास भी लगाए जा रहे हैं कि हाल के दिनों में दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान रूस के दबदबे और पुतिन का रुतबे देखकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिढ़ भी हो सकती है. वहीं रूस ने इस घटनाक्रम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है.
अमेरिका और रूस के बीच लंबे समय से कई मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है. ऐसे में रूसी वरिष्ठ अधिकारी को वीजा नहीं मिलना दोनों देशों के रिश्तों में नई तल्खी के तौर पर देखा जा रहा है. बीते दिनोंअमेरिका-रूस तनाव और वीजा विवाद के बीच दुनिया की नजरें अब न्यूयॉर्क पर हैं. यहां संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मंगलवार से 81वें UN महासभा सत्र की हाई-लेवल बैठक शुरू हो रही है. दुनिया के अलग-अलग देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि इसमें हिस्सा ले रहे हैं.
BRICS के मंच पर साथ आए थे ईरान, रूस और चीन
दिल्ली में आयोजित BRICS के मंच पर रूस, ईरान और चीन जैसे कई बड़ी शक्तियां एकसाथ आई थीं. वहीं भारत इस समिट की मेजबानी कर रहा था. ऐसे में अमेरिका, जिसका इन देशों के साथ शीत युद्ध जारी है, इस सफल समिट को देखकर लगातार खुन्नस में रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने UNGA में रूसी मंत्री के खिलाफ ये कदम उठाया हो. वहीं इस दौरान UNGA में हिस्सा लेने के लिए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी न्यूयॉर्क पहुंचने वाले हैं. मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली अमेरिका यात्रा होगी. वहीं चीन ने भी अपने उपराष्ट्रपति को महासभा में भेजने की जानकारी दी है. मौजूदा समय इन तीनों ही देशों के साथ अमेरिका के तल्ख रिश्ते चल रहे हैं.
युद्ध और जलवायु परिवर्तन पर रहेगा फोकस
इस बार महासभा में युद्ध, जलवायु परिवर्तन, विकास, नई तकनीक और बहुपक्षीय व्यवस्था के भविष्य जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे. दुनिया में बढ़ते भू-राजनयिक तनाव के बीच देशों के सामने कई बड़े सवाल हैं. महासभा की आम बहस मंगलवार से शुरू होकर 26 सितंबर तक चलेगी. इसके बाद 28 सितंबर को बैठक फिर शुरू होगी. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, हाई-लेवल वीक में करीब 130 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुखों के शामिल होने की उम्मीद है.
इस बार की बैठक पर दुनिया की खास नजर
81वें सत्र की अध्यक्षता बांग्लादेश के खलीलुर रहमान कर रहे हैं. इस सत्र की थीम है, 'विश्वास बहाल करना, बदलाव को संभालना और ऐसा संयुक्त राष्ट्र बनाना जो सभी के लिए काम करे.' बढ़ते अंतरराष्ट्रीय मतभेदों और बहुपक्षीय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच इस बैठक को अहम माना जा रहा है. UN महासभा में 193 सदस्य देशों के प्रतिनिधि अपने-अपने देशों की प्राथमिकताएं और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपना पक्ष रखेंगे.
भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे एस जयशंकर
भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. वह महासभा की हाई-लेवल बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर नई दिल्ली का पक्ष रखेंगे.