Xi के नहले पर ट्रंप का दहला: जिनपिंग बोले ताइवान से काटिए कन्नी! US राष्ट्रपति बोले- THAAD, B-2 खरींदेगे? ताइवान वेट कर रहा
तीन दिन का ऐतिहासिक दौरा खत्म करके शी जिनपिंग बीजिंग लौट आए. 72 घंटे की 'पावरपैक्ड विजिट' में उन्होंने ट्रंप को संदेश दिया कि चीन को हल्के में लेकर एशिया में हमारे प्रभाव को चुनौती मत दीजिए. उसी दौरान ट्रंप ने शी को ये पूछकर चौका दिया कि ताइवान हमारे हथियारों का इंतजार कर रहा है, क्या आप खरीदोगे?
शी जिनपिंग के रेड कार्पेट वेलकम और भव्य स्वागत से अमेरिका को क्या हासिल हुआ? क्या व्यापार, ताइवान, सेमीकंडक्टर और AI जैसे मोर्चों पर लगी आंच कुछ कम हुई, या ये पूरा आयोजन महज एक 'ऑप्टिक्स' यानी तस्वीरों का खेल बनकर रह गया? मिड टर्म इलेक्शन से पहले रिपब्लिकन पार्टी के नेता ट्रंप के ऊपर विरोधी डेमोक्रेट्स नेताओं ने ऐसे तीखे सवालों की छड़ी लगा दी है. इसी बीच अमेरिका और चीन के राजदूतों और दोनों देशों मीडिया के हवाले से दोनों की मुलाकात का एक अनसुना किस्सा छनकर सामने आया है, जिससे यह पता चला कि इसी हाईप्रोफाइल मुलाकात के दौरान ट्रंप ने शी को अमेरिकी हथियार बेचने की पेशकश कर दी थी.
चीन में तैनात राजदूत डेविड पर्ड्यू ने बताया कि ट्रंप ने चीन के साथ अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता के बीच उसे अमेरिकी हथियार बेचने की संभावना का जिक्र किया था, हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि ट्रंप ने जिनपिंग के सामने यह प्रस्ताव कब रखा.
चीन-ताइवान और अमेरिका का ट्राएंगल!
सितंबर में हुई मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने ताइवान के मसले पर ट्रंप से अमेरिका का समर्थन सीमित रखने पर जोर दिया. दरअसल 'ड्रैगन' ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, दूसरी ओर अमेरिका ताइवान को हथियार और अन्य सुरक्षा सहयोग देता रहा है. इसी थीम से जुड़ा ये किस्सा वायरल हो रहा है.
दरअसल अमेरिका में कई महीनों से ये खुसुर-फुसुर चल रही है कि ताइवान को हथियारों की नई खेप काफी समय से नहीं गई, कही ऐसा तो नहीं कि ट्रंप, जिनपिंग को खुश करने के लिए ताइवान को हथियारों की सप्लाई को डिले कर रहे हों. हालांकि ऐसे सवालों को अमेरिकी दूत ने फौरन खारिज कर दिया.
अमेरिका अपने कानूनों के तहत ताइवान को अपनी रक्षा के लिए जरूरी साधन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है. अमेरिका, ताइवान को एक देश के रूप में मान्यता तो नहीं देता, लेकिन वो उसी द्वीप का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है. हालांकि, कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने तो अपने कार्यकाल में ये साफ नहीं किया कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिका अपने सहयोगी की रक्षा के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल करेगा या नहीं.
आप खरीदेंगे हथियार? ताइवान इंतजार कर रहा...
कहा जाता है कि नेचर और सिग्नेचर दोनों का बदलना बहुत मुश्किल होता है. कुछ इसी तर्ज पर कारोबारी से नेता बने ट्रंप ने लगे हाथों अपने उस प्रतिद्वंदी को थाड और एफ-35 बेचने का ऑफर दे दिया जिस पर वो रिवर्स इंजीनियरिंग का आरोप लगाकर अपनी तकनीक चुराने का आरोप लगाता आया है.
डेविड परड्यू ने फॉक्स न्यूज संडे पर यह खुलासा किया. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने चीनी समकक्ष से पूछा, ‘हम दुनिया में अलग-अलग लोगों को हथियार बेचते हैं, क्या आप हमसे हथियार खरीदना चाहते हैं?’ आगे उनसे पूछा गया कि ट्रंप गंभीर थे या मजाक कर रहे थे. आपको बताते चलें कि हथियारों की खरीदी के ऑफर का यह खुलासा सार्वजनिक होकर पब्लिक डोमेन में तब आया है जब अमेरिका को ये डाउट है कि चीन ने हांगकांग भेजे गए अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट F-35 के कुछ पार्ट्स हासिल कर लिए हैं.
ट्रंप-शी की केमिस्ट्री
2025 में चीन में हुई ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात के बाद अमेरिका ने ताइवान को 14 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हथियार पैकेज को रोक दिया था. तब ट्रंप ने इस फैसले को चीन के साथ बारगेनिंग की ट्रिक बताया था. 2026 में चीनी मीडिया खुद कह चुकी है कि व्हाइट हाउस में जिनपिंग ने एक बार फिर ट्रंप से ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने की अपील की थी. इसी बीच चीन को अमेरिकी हथियारों की खरीद फरोख्त के इस किस्से ने ट्रंप और शी की केमेस्ट्री को नया रंग दे दिया.
इस मुलाकात से 14 दिन पहले ट्रंप ने ताल ठोक कर कहा था कि वो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जासूसी करवाते हैं, क्योंकि चीन भी उनपर नजर रखता है. इस बयान पर चीन ने कोई रिएक्शन नहीं दिया था. तब ट्रंप ने कहा था कि प्रेसिडेंट शी से उनकी अलग लेवल की दोस्ती है, जिसका हमारे देश की नीतियों पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. दो प्रतिद्वंदी एक-दूसरे की खबर रखना चाहते हैं, इसमें कुछ भी गलत नहीं है.
अमेरिका-चीन में पुरानी अदावत
चीन और अमेरिका के बीच जासूसी और खुफिया गतिविधियों के इतिहास की जड़ें शीत युद्ध के दौर यानी 1950 के दशक से जुड़ती हैं. 1950 से लेकर 2025 तक यानी बीते 75 सालों में समय-समय पर दोनों देशों के एजेंट्स के एक-दूसरे की जासूसी में शामिल होने की खबरें आती रही हैं.
- चीन की रिवर्स इंजीनियरिंग से सहमा अमेरिका, उस पर अपनी उन्नत विमान तकनीक चुराने का आरोप लगा चुका है.
- चीन की मोबाइल और इंटरनेट उपकरण बनाने वाली कंपनियों पर अमेरिका जासूसी करने का आरोप लगाकर बैन कर चुका है.
गौरतलब है कि अमेरिका ने संचार उपकरण बनाने वाली चीनी कंपनियों को खासकर आईटी सेक्टर से जुड़े चीनी प्रोडक्ट्स को जासूसी के डर से ब्लैक लिस्ट कर रखा है. इसके बावजूद ट्रंप और शी जिनपिंग की दोस्ती पर किसी चीज से कोई खास फर्क नहीं पड़ा है.