ट्रंप ने दिखाई आंख तो छूट गए पसीने! अपने रिजर्व स्टॉक से 10 करोड़ डीजल जारी करेगा EU, आखिर क्यों घुटने टेकने को हुआ मजबूर?
EU Releases Reserve Diesel Stocks: ट्रंप ने जब यूरोप को आंख दिखाई तो उसके पसीने छूट गए. अमेरिका के आगे घुटने टेकते हुए यूरोप ने अपने रिजर्व स्टॉक से 10 करोड़ डीजल जारी करने का फैसला किया है.
EU Releases Reserve Diesel Stocks Amid Trump Threat: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूरोपीय देशों को डीजल एक्सपोर्ट पर बैन लगाने की धमकी काम कर गई है. ट्रंप के आगे घुटने टेकते हुए यूरोपीीय देशों ने अपने रिजर्व में मौजूद स्टॉक से डीजल जारी करने पर सहमति दे ती है. ये देश अपने कच्चे तेल के भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल रिलीज करने जा रहे हैं. जिससे यूरोपीय देशों में डीजल के बढ़ते दामों पर काफी अंकुश लग जाएगा. ट्रंप ने अपने ‘ट्रूथ सोशल’ प्लेटफॉर्म पर लिखी एक पोस्ट में यह जानकारी दी.
उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'यूरोप अपने रिजर्व स्टॉक से डीजल ऑयल की एक बहुत बड़ी मात्रा को जारी करने पर सहमत हो गया है. यह प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी. इससे यूरोप में तेल की कीमतें नीचे लाने में मदद मिलेगी.'
ट्रंप ने क्यों दी यूरोपीय देशों को धमकी?
बताते चलें कि यूएस की रिफाइनरियां विभिन्न स्रोतों से जुटाए गए कच्चे तेल के रिफाइन करके उसका काफी हिस्सा यूरोपीय देशों को एक्सपोर्ट करती हैं. लेकिन यूक्रेन और ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल के फ्लो में पिछले कुछ हफ्तों में कमी आई है. जिसके चलते अमेरिका में डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं. इन कीमतों को काबू करने के लिए लोग यूरोप को डीजल एक्सपोर्ट पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं.
ट्रंप के सामने मुसीबत ये है कि अगले महीने यानी नवंबर में यूएस में मध्यावधि चुनाव हैं. ऐसे में अगर वो डीजल के दामों पर अंकुश नहीं लगाते हैं तो उन्हें इलेक्शन में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. इसे देखते हुए उन्होंने यूरोपीय देशों को कहा था कि वे अमेरिकी डीजल पर निर्भर रहने के बजाय अब अपने रिजर्व स्टॉक में मौजूद डीजल को निकालकर उसे यूज करें.
यूरोप ने क्यों टेके ट्रंप के आगे घुटने?
उन्होंने धमकी दी थी कि ऐसा न करने पर यूरोपीय देशों को डीजल का एक्सपोर्ट रोक दिया जाएगा. उनकी इस धमकी ने तुरंत असर भी दिखाया और यूरोपीय देश घुटने पर आ गए. इसकी वजह ये है कि यूरोप अपनी जरूरत का 70 प्रतिशत डीजल खुद रिफाइन कर लेता है लेकिन बाकी 30 प्रतिशत उसे यूएस व अन्य देशों से खरीद करके पूरा करना पड़ता है. अगर यूएस उसे तेल की सप्लाई रोक दे तो वहां पर काफी उद्योग-धंधे बंद हो जाएंगे.
यूरोप के सामने संकट ये है कि रूस से अदावत की वजह से वह उससे भी डीजल-पेट्रोल नहीं मंगा सकता. साथ ही, पश्चिम एशिया से आपूर्ति में संकट की वजह से चीन की रिफाइनरियों की क्षमता भी घट गई है. ऐसे में उसके पास यूएस ही बड़ा जरिया बचता है, जहां से वह तेल मंगा सकता है. लिहाजा उसे ट्रंप की धमकियों के आगे झुकना ही पड़ा.
10 करोड़ डीजल रिलीज करेंगे- मैक्रों
ट्रंप की खुली धमकी के बाद जी7 के मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबद्ध देशों से बातचीत की. इस मीटिंग में वैश्विक तेल संकट और ट्रंप की धमकी पर चर्चा की गई. जिसके बाद यूरोपीय देश कच्चे तेल के भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर सहमत हो गए.
मैक्रों ने बताया कि जी7 और यूरोपी देश 5 करोड़ बैरल डीजल और 5 करोड़ बैरल कच्चा तेल रिलीज करेंगे. अगले 20 दिनों में यह रिजर्व ऑयल मार्केट में लाना शुरू हो जाएगा. इसके बाद बाकी तेल भी जारी किया जाएगा.