SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए सऊदी अरब की किस हद तक मदद करेगा तुर्किये? इस्तांबुल ने बता दी अपनी रेड लाइन

Mecca Defense Pact News: हूती विद्रोहियों से निपटने के लिए तुर्किये, सऊदी अरब की किस हद तक मदद करेगा? इस बारे में इस्तांबुल ने अपनी रेड लाइन क्लियर कर दी है. उसने बता दिया है कि वह इस संबंध में क्या करेगा.

Written By Devinder Kumar
Published: Oct 08, 2026, 10:19 PM IST | Updated: Oct 08, 2026, 10:22 PM IST
Join

Türkiye on Mecca Defense Pact: तुर्किये ने सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच छिड़ी जंग में अपनी सीमा स्पष्ट कर दी है. अंकारा ने कहा कि मक्का डिफेंस पैक्ट के तहत वह सऊदी अरब की मदद तो करेगा लेकिन किसी भी हालत में रियाद में अपने सैनिक नहीं भेजेगा. इसके बजाय वह तकनीक, हथियार और निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने में सऊदी की सहायता कर सकता है. यह बात तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिडान ने कही. वे गुरुवार को तुर्किये के शहर अंकारा में हंगरी की विदेश मंत्री अनिता ओर्बन के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे.

'मक्का डिफेंस पैक्ट एक रक्षात्मक समझौता'

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फिडान ने कहा कि मक्का डिफेंस पैक्ट एक रक्षात्मक समझौता है. तीनों में से किसी एक मुल्क के हमले की चपेट में आने पर उसकी रक्षा में खड़ा होना है. यह कोई आक्रामक समझौता नहीं है कि दूसरे मुल्कों पर हमले में साथ दिया जाए.

उन्होंने कहा कि अंकारा इस बात का आकलन कर रहा है कि यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष में वह सऊदी अरब की मदद कैसे कर सकता है. लेकिन यह स्पष्ट है कि तुर्किये किसी दूसरे देश में सेना नहीं भेजेगा और ही वहां पर कोई हमला नहीं करेगा.

'सऊदी की जरूरत देखकर लेंगे मदद का फैसला'

फिडान ने कहा कि देश के सैन्य अधिकारी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि सऊदी अरब को किस तरह का सहयोग दिया जा सकता है. खासकर एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और तकनीकी क्षेत्र में मदद के विकल्प तलाशे जा रहे हैं. सऊदी अरब की जरूरत समझने के बाद तुर्किये और पाकिस्तान उसे सहायता देने पर फैसला करेंगे.

तुर्किये के विदेश मंत्री ने कहा कि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार हूती विद्रोहियों से लड़ रही है. वहां पर यमनी सेना की स्थिति मजबूत है और सऊदी अरब उसे सहायता दे रहा है.  ऐसे में सऊदी की आवश्यता समझने के बाद सहायता देने के मुद्दे पर कोई फैसला लिया जा सकेगा.

लाल सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता जरूरी- फिडान

वहीं ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, फिडान ने सामूहिक सुरक्षा के लिए तीनों देशों के बीच संयुक्त योजना बनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि भविष्य के खतरों को देखते हुए इस तरह का प्लान बनाना बेहद जरूरी है. फिडान ने हूती विद्रोहियों के हमले की निंदा करते हुए कहा कि लाल सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को बाधित करने का अधिकार नहीं होना चाहिए.

मक्का समझौते पर तुर्किये क्या बोला?

बताते चलें कि तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने इस साल अगस्त में 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते में प्रावधान है कि किसी एक मुल्क पर हुआ हमला तीनों पर हमला माना जाएगा और तीनों देश मिलकर उस अटैक का जवाब देंगे. इसके बाद तुर्किये और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष तेज हुआ तो तुर्किये और पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने लगे.

अब तुर्किये ने इस बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. उसने बता दिया है कि वह किसी भी सूरत में अपने सैनिक सऊदी अरब नहीं भेजेगा. हालांकि, जंग से जुड़ी दूसरी मदद वह देने को तैयार है. रिपोर्ट के मुताबिक, मक्का डिफेंस पैक्ट को अभी तक तुर्किये की संसद की मंजूरी नहीं मिली है. फिडान ने कहा कि समझौते को संसद में भेजने का काम लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही उसे संसद के पटल पर रखा जाएगा. 
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES