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मौसम को लेकर एक बार फिर से चिंता बढ़ा देने वाली खबर सामने आई है. प्रशांत महासागर से बनने वाला सुपर अल नीन अब गर्मी के अपने पुराने सारे रिकार्ड को तोड़ दिया है. वैज्ञानिकों की नई रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशांत महासागर के सतह का तापमान इतना ज्यादा बढ़ गया है कि कि दुनिया भर का वेदर पैटर्न पूरी तरह लड़खड़ाने लगा है. इस संकट का सीधा असर आने वाले समय में ग्लोबल क्लाइमेट, खेती-किसानी और आम जनजीवन पर सीधे तौर पर पड़ने वाला है.
मौसम के जानकारों के मुताबिक इस बार का सुपर अल नीनो सामान्य स्थिति से काफी आगे निकलता दिखाई दे रहा है. वहीं कुछ जानकारों ने इसे सुपर-डुपर अल नीनो भी कहा है. इसका असर सिर्फ तापमान पर ही नहीं, बल्कि बारिश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर भी देखने को मिल सकता है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम और जलवायु एजेंसी वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन यानी WMO ने भी इसको लेकर चेतावनी जारी कर दी है. यूएस की इस एजेंसी का कहना है कि इस बार का अल नीनो 1950 के बाद देखे गए सबसे मजबूत अल नीनो में शामिल हो सकता है. WMO का कहना है कि यह स्थिति पहले से बढ़ रही इंसानी वजहों वाली ग्लोबल वार्मिंग के असर को और गंभीर कर सकती है.
जाने-माने मौसम वैज्ञानिक रयान माऊ (Ryan Maue) ने पूरी दुनिया का एक क्लाइमेट मैप सोशल मीडिया पर शेयर किया है. इस मैप में धरती का बड़ा हिस्सा लाल रंग में दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि सुपर अल नीनो ठंडी के दिनों तक अपनी सुपर पॉवर बना सकता है. उनके अनुसार, दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी बढ़ने की संभावना है, लेकिन अमेरिका इससे बच सकता है. रयान ने WMO के उस अनुमान से भी सहमति जताई है, जिसमें कहा गया है कि El Nino फरवरी 2027 तक बना रह सकता है.
As forecasted 5 months ago, we're going to need a bigger y-axis... Super-duper El Niño it is... https://t.co/8X6FK2JTIK
Leon Simons (@LeonSimons8) September 30, 2026
क्लाइमेट साइंटिस्ट जेके हाऊसफादर (Zeke Hausfather) ने भी इस स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि इस साल का अल नीनो अब ऐसे स्तर पर पहुंच रहा है, जिसे पहले नहीं देखा गया. जेके के अनुसार, Nino3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से लगभग 3.4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकार्ड किया गया है.
मौसम एक्सपर्ट लियोन सिमंस (Leon Simons8) ने मौजूदा स्थिति को सुपर-डुपर अल नीनो बताया है. उनका मानना है कि इस बार इसका असर सामान्य अल नीनो की तुलना में काफी ज्यादा हो सकता है.
WMO के पूर्वानुमान के अनुसार, साल 2026 के आखिरी महीनों में दुनिया के बड़े हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की ज्यादा संभावना है. अल नीनो के केंद्र माने जाने वाले उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में अक्टूबर से दिसंबर के बीच समुद्र की सतह का तापमान नार्मल से 3.7 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पहुंच सकता है. अगर ऐसा होता है तो यह बहुत ही असामान्य स्थिति होगी.
अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों का पानी सामान्य से काफी ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर दुनिया के दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचता है. कहीं सूखे की स्थिति बनती है तो कहीं बाढ़ जैसी स्थिति. आमतौर पर अल नीनो हर 2-7 साल के बीच देखने को मिलता है.
इस बीच शिकागो यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट इंपैक्ट लैब के रिसर्चर्स ने एक अनुमान जारी किया था. उनके अनुसार, इस साल का सुपर-अल नीनो जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनियाभर में लगभग 4.51 लाख अतिरिक्त मौत का कारण बन सकता है. लेकिन यह सिर्फ अनुमान है.