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धमाके का हथियार, आफत हजार: क्या है स्टन ग्रेनेड, जिसके कारण काटना पड़ा छात्र का हाथ; प्रदर्शन के बीच फ्रांस ने किया बैन

फ्रांस में स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट के कारण हाहाकार मचा हुआ है. लेकिन अब सरकार के लिए परेशानियां और बढ़ गई हैं. उसने स्टन ग्रेनेड पर रोक लगाने का फैसला किया है क्योंकि इसके इस्तेमाल से एक छात्र का हाथ काटना पड़ा.

धमाके का हथियार, आफत हजार: क्या है स्टन ग्रेनेड, जिसके कारण काटना पड़ा छात्र का हाथ; प्रदर्शन के बीच फ्रांस ने किया बैन
Image Credit: स्टूडेंट्स अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

फ्रांस ने छात्र आंदोलन की क्रांति ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और फ्रांस की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए फ्रांस की पुलिस ने जिस हथियार को इस्तेमाल किया, उसी को लेकर फजीहत हो रही है. यह एक न्यू जनरेशन स्टन ग्रेनेड है, जिसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है. 5 अक्टूबर को इस ग्रेनेड के कारण हाई स्कूल के एक 15 साल के छात्र का हाथ बुरी तरह घायल हो गया और उसे काटना पड़ा. फ्रांसीसी पुलिस ने इस ग्रेनेड का इस्तेमाल सिर्फ एक साल तक ही किया था.

रोक लगाने का दिया आदेश

फ्रांसीसी नेशनल पुलिस के डायरेक्टर जनरल लुई लॉजियर ने इस ग्रेनेड के इस्तेमाल पर 'अस्थायी रोक' लगाने का आदेश दिया है. लॉजियर ने कहा कि यह रोक तब तक लागू रहेगी जब तक उस लड़के के घायल होने की परिस्थितियों का पता नहीं चल जाता.'

गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने RTL रेडियो को बताया, 'मैं हाई स्कूल के छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों में इसके इस्तेमाल पर रोक लगा रहा हूं, जब तक कि इस मामले में हुई घटना से जुड़ी सभी बातें साफ नहीं हो जातीं.' उन्होंने यह भी बताया कि फ्रांसीसी पुलिस की निगरानी करने वाली संस्था IGPN ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित बर्बरता के 18 मामलों की जांच शुरू कर दी है.

पूरे फ्रांस में लाखों लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और देश में असंतोष का माहौल है. अक्सर हिंसक झड़पों के कारण कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.15 साल के लड़के के मामले ने इस विरोध-प्रदर्शन को और भड़का दिया है.

आखिर क्यों सवालों के घेरे में है यह ग्रेनेड?

जो ग्रेनेड चर्चा में है, उसका नाम EF-SON है. इसे फ्रांसीसी कंपनी Alsetex बनाती है. इस कंपनी के गृह मंत्रालय के साथ लंबे समय से कारोबारी रिश्ते रहे हैं. इसको फ्लैशबैंग, थंडरफ्लैश या साउंड बम भी कहा जाता है. यह ऐसा हथियार है, जिससे जान नहीं जाती. लेकिन यह बहुत तेज धमाका करता है और आंखों को चकाचौंध कर देता है. इससे निकलने वाली तेज रोशनी से कुछ समय के लिए इंसान की इंद्रियां भ्रमित हो जाती हैं. 2025 की गर्मियों से, फ्रांसीसी सुरक्षा बलों के पास EF-SON के साथ-साथ एक और स्टन ग्रेनेड मॉडल, GL-304 भी है, जिसे ब्राजीलियाई कंपनी Condor बनाती है.

EF-SON को 40-मिलीमीटर ग्रेनेड लॉन्चर से फायर किया जा सकता है. हालांकि, इस डायमीटर वाला ग्रेनेड 'कूगर' लॉन्चर के साथ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसका उपयोग फ्रांसीसी पुलिस एक दशक से कर रही है. EF-SON को 'कोबरा' लॉन्चर से फायर किया जा सकता है, जो एक डुअल-बैरल सिस्टम है और जिसका इस्तेमाल फ्रांसीसी पुलिस ने 2025 में शुरू किया था.

ग्रेनेड के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन

कई ग्रुप्स ने शिकायत की है कि पुलिस विरोध-प्रदर्शन में शामिल किशोरों के खिलाफ जानबूझकर जरूरत से ज्यादा फोर्स का इस्तेमाल कर रही है. 7 अक्टूबर को हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण 500 से ज्यादा स्कूल पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहे. शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने कहा कि 24 स्कूलों में इतनी ज्यादा तोड़फोड़ हुई है कि वे हफ्तों से बंद हैं.

मंगलवार को हाई-स्कूल के छात्रों के साथ कई अन्य लोग भी शामिल हुए. छात्रों ने मार्सिले, स्ट्रासबर्ग और अन्य शहरों में हाईस्कूलों को ब्लॉक कर दिया और झंडे व प्लेकार्ड लहराए.

पेरिस में, छात्रों ने स्मोक फ्लेयर्स और प्लेकार्ड पकड़े हुए थे, जिन पर लिखा था- 'हमारी किताबों के नीचे, गुस्सा'. यह मई 1968 के छात्र दंगों के मशहूर नारे 'फर्श के पत्थरों के नीचे, समुद्र तट' (under the paving stones, the beach) का ही एक रूप है.

जो लड़का घायल हुआ है, उसने बताया कि उनके बेटे का हाथ काटना पड़ा. उसने BFMTV से कहा, 'उसकी जिंदगी छीन ली गई है. वह 15 साल का बच्चा है. बच्चों के साथ ऐसा बर्ताव कैसे किया जा सकता है?' उसने यह भी कहा कि उसने ग्रेनेड नहीं उठाया था. AFP ने पुलिस यूनियन के एक सूत्र के हवाले से बताया कि 15 साल के छात्र ने शायद 'स्टिंग-बॉल ग्रेनेड' उठा लिया था, जो बाद में उसके हाथ में ही फट गया.

'उसने ग्रेनेड नहीं उठाया था'

हालांकि, स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट कुछ और ही कह रही है. स्थानीय अखबार 'ला वॉइक्स डू नॉर्ड' ने एक लड़की का बयान छापा है जो कथित तौर पर उस लड़के के पास ही खड़ी थी. उसके मुताबिक, लड़के ने ग्रेनेड नहीं उठाया था.
लड़की ने कहा, 'उसने उसे नहीं उठाया. मैं वहां थी, मैंने देखा. उसने उसे नहीं उठाया. उसने उसे पकड़ा भी नहीं.'

यह घटना उत्तरी शहर लेंस में हुई. जब इस दुखद घटना के बारे में पूछा गया, तो लेंस के मेयर सिल्वेन रॉबर्ट ने कहा कि अभी हालात के बारे में और स्पष्टता की जरूरत है.

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉबर्ट ने एक फ्रांसीसी अखबार को बताया, 'आपकी तरह और कई अन्य लोगों की तरह, मैंने भी घटना के बाद के कुछ वीडियो देखे हैं. लेकिन मैंने यह नहीं देखा कि पुलिस या छात्रों की ओर से यह ऑपरेशन कैसे किया गया था.'

मैक्रों कहां हैं?

अब सवाल उठ रहे हैं कि जब देश में छात्रों का इतना बड़ा विरोध-प्रदर्शन चल रहा है तो राष्ट्रपति मैक्रों कहां हैं? दरअसल, तब राष्ट्रपति मैक्रों फ्रांस की सुरक्षा के लिए बनाई गई एक नई बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण करते हुए देखे गए.

X यूजर कॉलिन रग ने कहा, 'फ्रांसीसी राष्ट्रपति नई बैलिस्टिक मिसाइल को टेस्ट कर रहे हैं. यह टेस्ट ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे फ्रांस में दंगे भड़क रहे हैं. मुझे यह बताते हुए बुरा लग रहा है, लेकिन खतरे तो पहले से ही आपके देश में मौजूद हैं.'

इस पूरे मामले पर उनकी चुप्पी ने संकट को और गहरा कर दिया है. पिछले हफ्ते, जब विरोध-प्रदर्शन तेज हो रहे थे, तब फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने मैड्रिड की स्टेट विजिट के दौरान कहा था, 'मैं हमारे युवाओं की चिंताओं और गुस्से को समझता हूं, चाहे वह जलवायु, नई तकनीकों या भू-राजनीतिक तनाव से संबंधित हो. हालांकि, इनमें से कोई भी डर हिंसा को सही नहीं ठहराता.'

मंगलवार रात उन्होंने गृह मंत्री और शिक्षा मंत्री को बुलाया था. हालांकि, इन कदमों का जनता पर कोई असर नहीं पड़ा है, जो केवल जवाबदेही की मांग कर रही है.

आखिर क्यों सुलग रहा फ्रांस?

सालों से बजट में कटौती, नई भर्तियां रोकने और प्रशासनिक फेरबदल ने फ्रांस के प्राइमरी और मिडिल एजुकेशन सिस्टम को टूटने की कगार पर पहुंचा दिया है. छात्रों के गुस्से की अहम वजह रोजमर्रा की कई बड़ी दिक्कतें हैं. छात्रों का कहना है कि एक कमरे में स्टूडेंट्स की तादाद 34 से 38 से ज्यादा होती है, जिससे हर छात्र पर पर्सनली ध्यान देना नामुमकिन हो जाता है. इससे क्लासरूम की क्षमता पर भी दबाव पड़ता है.

पूरे देश में हजारों टीचिंग पद खाली पड़े हैं. छात्र अक्सर मैथ्स, फिजिक्स और आधुनिक भाषाओं जैसे मेन सब्जेक्ट की पढ़ाई के बिना हफ्तों या महीनों तक रहते हैं क्योंकि सब्स्टीट्यूट टीचर्स का नेटवर्क पूरी तरह खत्म हो चुका है.

पूरे यूरोप में शरद ऋतु के मौसम में असामान्य रूप से ज्यादा तापमान ने फ्रांस के पुराने स्कूलों की इमारतों की पोल भी खोल दी है. इनमें सही इंसुलेशन, वेंटिलेशन या क्लाइमेट कंट्रोल की कमी है, जिससे हीटवेव के दौरान क्लासरूम में पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है.

 

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About the Author

Rachit Kumar

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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