बिना बिजली, बिना मोटर... वैज्ञानिकों ने बनाया जिंदा शैवाल से चलने वाला रोबोटिक हाथ, रोशनी से उठाएगा भारी चीजें!
रोबोट की दुनिया में वैज्ञानिकों ने एक अनोखा प्रयोग किया है, जहां बिना बिजली और मोटर के चलने वाला रोबोटिक हाथ तैयार किया गया है. जिंदा शैवाल और खास जेल से बना यह रोबोट रोशनी की मदद से पानी में चीजें उठा सकता है.
क्या आप एक ऐसे भी रोबोटिक हाथ के बारे में सोच सकते हैं, जो न तो बिजली से चलता हो और न ही कोई मोटर लगी हो? नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसा ही अनोखा रोबोट तैयार कर लिया है, जो ना तो बिजली से चलता है और ना ही इसमें कोई मोटर लगी है. मात्र 2 सेंटीमीटर लंबे इस अनोखे रोबोटिक हाथ को बनाने में जिंदा शैवाल और खास जेल की दो परतों का इस्तेमाल हुआ है. यह पानी के अंदर सिर्फ रोशनी के इशारे पर काम करता है और लोहे की भारी बॉल से लेकर रबर की रिंग को आसानी से उठा लेता है.
यह टेस्ट नीदरलैंड की डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के रिसर्चर्स ने किया है. रिसर्चर्स का उद्देश्य यह समझना है कि जीवित कोशिकाओं की मदद से ऐसी मशीनें कैसे बनाई जा सकती हैं, जो बिना किसी मोटर के भी काम कर सकें.
सिर्फ 2 सेंटीमीटर लंबा है रोबोटिक हाथ
यह रोबोटिक हाथ आकार में बहुत छोटा है. इसकी लंबाई लगभग 2 सेंटीमीटर और मोटाई करीब 1 मिलीमीटर है. इसे बनाने के लिए हाइड्रोजेल की दो परतों का इस्तेमाल किया गया है. इसकी सतह पर छूटे शैवाल भी मौजूद हैं. इसकी दोनों जेल परतें आसपास के रासायनिक माहौल में होने वाले बदलावों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देती हैं. वहीं, शैवाल रोशनी मिलने पर प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया शुरू करते हैं. इस दौरान वे रोशनी और कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से एनर्जी बनाते हैं.
शैवाल की इस एक्टिविटी से जेल के अंदर केमिलकल चेंज होता है और उसका PH लेवल बदल जाता है. इसके कारण जेल की दोनों परतों में सूजन अलग-अलग होती है. इसी अंतर की वजह से रोबोटिक पट्टी मुड़ने लगती है और अपना आकार बदल सकती है.
रोशनी बंद होते ही बदलने लगता है मूवमेंट
इस रोबोट की एक और खास बात यह है कि इसकी रफ्तार को रोशनी के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है. रिसर्चर्स ने पाया कि रोशनी की स्थिति बदलने पर शैवाल की जैविक एक्टिविटी में बदलाव आता है. इससे जेल की परतों पर असर पड़ता है और रोबोटिक हाथ की गति बदल जाती है. जब रोशनी बंद की जाती है, तो इसके अंदर होने वाली जैविक प्रक्रिया में बदलाव आता है. इसके बाद रोबोटिक पट्टी उल्टी दिशा में मुड़ने लगती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह लगभग 10 सेकंड के अंदर वापस मुड़ना शुरू कर देती है.
आमतौर पर रोबोट को चलाने के लिए मोटर और इलेक्ट्रिक सिग्नल की जरूरत होती है. लेकिन इस प्रयोग में जीवित शैवाल की जैविक गतिविधि ही गति पैदा करने का काम करती है.
पानी में गेंद और रबर की रिंग उठाकर दिखाया
वैज्ञानिकों ने यह देखने के लिए भी टेस्ट किया कि क्या यह छोटी सी पट्टी सिर्फ मुड़ने तक सीमित है या किसी वस्तु को पकड़ने में भी काम आ सकती है. इसके लिए पानी के अंदर टेस्ट किया गया.
टेस्ट के दौरान रोबोटिक हाथ ने एक छोटी धातु की गेंद को पकड़ा और रबर की रिंग को उठाया. इससे पता चला कि शैवाल और जेल से बनी यह आकृति सिर्फ आकार बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे स्तर पर वस्तुओं को संभालने का काम भी कर सकती है. ऐसी तकनीक भविष्य में उन जगहों पर काफी उपयोगी साबित हो सकती है, जहां नाजुक वस्तुओं को बिना नुकसान पहुंचाए संभालना जरूरी होता है. नरम रोबोटिक संरचनाएं कठोर धातु से बने रोबोट की तुलना में कुछ कामों में ज्यादा लचीली साबित हो सकती हैं.
कहां काम आ सकती है यह तकनीक?
रिसर्चर्स के अनुसार, जीवित कोशिकाओं को मशीनों में शामिल करने का विचार रोबोटिक्स के सेक्टर में नए रास्ते खोल सकता है. शैवाल रोशनी से एनर्जी ले सकते हैं, इसलिए भविष्य में ऐसी तकनीक पर काम किया जा सकता है. आने वाले समय में प्रकाश के हिसाब से अपनी दिशा बदलने वाले उपकरणों और पर्यावरण में बदलाव के मुताबिक काम करने वाली कृषि प्रणालियों में भी इस तरह के तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है. लेकिन अभी इस तरह की तकनीक को डेली लाइफ के इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं माना जा सकता है. अभी यह अपने टेस्ट के दौर में है.
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