K-Beauty: दुनियाभर में कई लोग मरने के बाद अपने शरीर के कुछ हिस्से लोगों की भलाई के लिए दान करते हैं. यह किसी पुण्य से कम नहीं है, लेकिन अगर इन्हीं अंगों का इस्तेमाल किसी गलत वजह से या कोई कंपनी अपने फायदे के लिए करे तो कैसा लगेगा? ऐसा ही मामला साउथ कोरिया में देखने को मिला है.
साउथ कोरिया अपने म्यूजिक के अलावा ब्यूटी ब्रांड्स के लिए भी काफी फेमस है. साल 2026 में इसका इसका ग्लोबल मार्केट 129.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर बताया गया है. भारत से लेकर यूरोप तक लोग कोरियन ग्लास स्किन समेत कई तरह के ब्यूटी हैक्स और ब्यूटी प्रोडक्ट्स के लिए लाखों खर्च करते हैं. वहीं, सियोल भी इसमें लगातार एक्सपेरिमेंट करने से पीछे नहीं हटता, लेकिन खरबों के इस बिजनेस के पीछे काली सच्चाई भी छिपी है. कोरिया में मरे हुए अमेरिकी लोगों की त्वचा को लैब में भेजकर इसे चेहरे की झुर्रियां मिटाने वाले ब्यूटी इंजेक्शन में बदला जा रहा है. यहां टिश्यू डोनेशन के नाम पर अरबों का कारोबार चल रहा है.
'बिजनेस इन्साइडर' ने इस ब्यूटी ट्रेंड के पीछे की सप्लाई चेन का पता लगाया, जिसमें बताया गया कि कैसे सैन एंटोनियो में मरने वाले किसी व्यक्ति की स्किन सियोल के एक ब्यूटी क्लिनिक में कॉस्मेटिक इंजेक्शन के रूप में पहुंच जाती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, आमतौर पर मृत व्यक्ति की त्वचा एक ऑर्गन प्रोक्योरमेंट ऑर्गनाइजेशन से अमेरिकी टिश्यू बैंक तक पहुंचती है. इसके बाद यह टिश्यू बैंक साउथ कोरिया की बायोटेक कंपनियों को यह स्किन भेजता है, जहां इसे 'स्किन बूस्टर' नाम के इंजेक्टेबल ब्यूटी ट्रीटमेंट में बदल दिया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में पैसों का लेन-देन होता है और तैयार प्रोडक्ट्स से करोड़ों की कमाई होती है.
अमेरिकी कानून के तहत ऑर्गन या टिश्यू दान करने वाले लोगों या उनके परिवारों को इसके बदले कोई पेमेंट नहीं किया जा सकता. 'बिजनेस इन्साइडर' के मुताबिक, इसका मुख्य प्रोडक्ट अगले साल अमेरिकी मार्केट में एंट्री लेने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रेगुलेटर्स की मंजूरी के बिना इसे अमेरिका में बेचा जा सकता है या नहीं.
दावा किया जा रहा है कि मरे हुए लोगों की स्किन से बनने वाला यह इंजेक्शन चेहरे को तुरंत चमकदार और युवा बना रहा है. वहीं, साउथ कोरिया में इस साल यह प्रोडक्ट मार्केट में 75 मिलियन डॉलर ( 712 करोड़ रुपये) तक का कारोबार कर सकता है.
बायोएथिक्स एक्सपर्ट और 'वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर' एना इल्टिस का कहना है कि, जो लोग अपने मृत परिजनों की स्किन डोनेट कर रहे हैं उन्हें पता ही नहीं है कि टिश्यू डोनेशन के नाम पर अरबों में कारोबार चल रहा है और उससे कितने लोग मोटा पैसा कमा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबतक इस ब्यूटी इंजेक्शन की 70 हजार से ज्यादा यूनिट्स चीन, सिंगापुर, थाईलैंड और UAE जैसे देशों में बेची जा चुकी है. वहीं, एलएंडसी बायो कंपनी मार्केट में चेहरे के दूसरे हिस्सों के लिए इंसान की त्वचा से बना नया फिलर भी लॉन्च कर सकती है.
साउथ कोरिया के सरकारी रिकॉर्ड्स की जांच से पता चलता है कि यह देश अपनी जरूरत का तकरीबन 90 प्रतिशत ह्यूमन टिश्यू अमेरिका से इंपोर्ट करता है. यहां अबतक 4 प्रतिशत से भी कम व्यसक ऑर्गन डोनेशन के लिए रजिस्टर्ड है, जबकि अमेरिका में आधे से ज्यादा आबादी ने डोनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है.
हैरानी की बात ये है कि अमेरिकी नागरिक मुख्य रूप से युद्ध में घायल सैनिकों और जलने के शिकार मरीजों की मदद के लिए अपनी स्किन डोनेट करते हैं. ऐसे में इस सम्मानजनक कार्य को ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल करना मेडिकल एथिक्स पर सवाल खड़े करता है.