सऊदी पर हूतियों का 'तूफान', बंकर में सलमान; रियाद एयरपोर्ट पर फिर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला
हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब को निशाना बना रहे हैं. रियाद एयरपोर्ट पर हमला कर रहे हैं. इस बीच क्राउन प्रिंस की सिक्योरिटी और बढ़ा दी गई है. उनको एक हाई सिक्योरिटी वाले महल में शिफ्ट किया गया है.
सऊदी अरब पर हूतियों का कहर बरस रहा है. आखिरी बार सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस को पब्लिक के सामने तब देखा गया था, जब वह रक्तदान कर रहे थे. यह घटना पिछले मंगलवार की है. उसके बाद जैसे-जैसे सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले तेज हुए हैं, मोहम्मद बिन सलमान को हाई सिक्योरिटी वाले एक महल से दूसरे महल में ले जाया गया है.
41 साल के क्राउन प्रिंस रक्तदान के बाद से पब्लिक के सामने नहीं आए हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने उनकी गतिविधियों की जानकारी रखने वाले अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें कड़ी सुरक्षा और बंकरों से लैस महलों के बीच ले जाया जा रहा है. एक स्पेशल टीम भी उनको सिक्योरिटी दे रही है क्योंकि सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई तेज हो गई है.
हूतियों ने फिर दे मारी मिसाइल
इस बीच हूतियों ने कहा है कि उसने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक नई बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है. शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सारे ने सोमवार शाम को कहा कि ग्रुप ने रियाद एयरपोर्ट को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया.
उन्होंने कहा कि ग्रुप ने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के खमीस मुशेत में किंग खालिद एयर बेस पर भी ड्रोन से हमला किया. इस बीच, सऊदी अरब की अगुआई वाले गठबंधन ने एक बयान में कहा कि उसकी सेना ने सोमवार शाम रियाद की ओर दागी गई हूती बैलिस्टिक मिसाइल को रोककर तबाह कर दिया.
ट्रंप बोले- हूतियों का बहुत बुरा बर्ताव
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब पर बढ़ते हमलों के लिए हूती विद्रोहियों को खरी-खरी सुनाई और कहा कि यह समूह बहुत बुरा बर्ताव कर रहा है.
जब पूछा गया कि अमेरिका हूती विद्रोहियों के बारे में क्या करेगा, तो ट्रंप ने कहा, हूती बहुत बुरा बर्ताव कर रहे हैं. यह ठीक नहीं है.' जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के कारण हूती हमले बढ़े हैं, तो ट्रंप ने कहा, 'मुझे नहीं पता कि इसका चुनाव पर क्या असर पड़ता है. मैं इस बात पर ध्यान नहीं देता.'
ट्रंप ने आगे कहा, 'मैं बस इतना जानता हूं कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा. लेकिन हूथी बुरा बर्ताव कर रहे हैं.'
गौरतलब है कि शनिवार को सऊदी अरब में पिछले एक दशक में सबसे भीषण हमला हुआ. राजधानी के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कम से कम एक हूती मिसाइल गिरी. इसमें कम से कम 13 लोग मारे गए और कम से कम 300 लोग घायल हुए, जिनमें से कई गंभीर रूप से घायल थे.
5 दिनों में 4 बार हमला
रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा कि ईरान जंग से जुड़े संघर्षों में अमेरिका या उसके खाड़ी सहयोगियों पर यह अब तक का सबसे घातक हमला था. उन्होंने बताया कि 28 साल की मिस्र की एक फ्लाइट अटेंडेंट की मौत ज्यादा खून बहने से हो गई, क्योंकि उसका हाथ उड़ गया था. वह उन कई पीड़ितों में से एक थी, जिन्होंने अपने अंग खो दिए.
वीकेंड में हुए मिसाइल हमले के बाद से किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद है. पिछले पांच दिनों में इस पर चार बार हमला हुआ है. सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने चेतावनी दी कि हमलों की गंभीरता को देखते हुए सऊदी अरब की प्रतिक्रिया भी उतनी ही घातक होगी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे हूतियों पर सऊदी हमलों में शामिल होने के बारे में सोच रहे हैं. मक्का समझौते में सऊदी के सहयोगियों ने भी अपना समर्थन जताया है. दोनों पक्षों के बीच भीषण गृहयुद्ध चल रहा है, और 2022 में एक कमजोर संघर्ष विराम समझौता हुआ था. लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल जंग के बीच इस साल जुलाई में वह समझौता टूट गया.
सऊदी अरब पर गोलीबारी का आरोप
हूतियों ने तब अपने हमले फिर से शुरू किए, जब उन्होंने सऊदी अरब पर सना हवाई अड्डे पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया, जबकि ईरान से आया एक विमान वहां उतरने की कोशिश कर रहा था. हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान अरब प्रायद्वीप में हो रही घटनाओं को लेकर परेशान है. उन्होंने आगे कहा कि इस लड़ाई से सिर्फ इजरायली सरकार को ही फायदा होगा.
सऊदी और ईरानी विदेश मंत्रियों ने रविवार देर रात तनाव बढ़ने के मुद्दे पर बातचीत की थी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उन्होंने सैन्य तरीका अपनाने पर जोर देने और राजनीतिक हालात को नजरअंदाज करने के खिलाफ चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा कि ईरान सऊदी और हूतियों के बीच बातचीत शुरू कराने में मदद करेगा. सऊदी और हूतियों के बीच लड़ाई 2015 में शुरू हुई थी, जब सऊदी अरब सरकार की तरफ से यमन के गृह युद्ध में शामिल हुआ था.