चीन से मिला धोखा: सऊदी ने दागी चीनी DF-15A मिसाइल, टारगेट से पहले ही हो गई फुस्स; मुनीर की क्यों बढ़ी टेंशन?
यमन के रेगिस्तान में चीन में बनी DF-15A शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा मिला है. माना जा रहा है कि इस मिसाइल को सऊदी अरब ने हूतियों के ठिकानों पर दागा था, लेकिन यह टारगेट से पहले फुस्स हो गई. मिसाइल के फेल होने से पाकिस्तान की टेंशन बढ़ गई है.
Saudi Arabia-Yemen conflict: सऊदी अरब और यमन के हूतियों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले कुछ दिनों में हूतियों की ओर से सऊदी अरब के अलग-अलग हिस्सों में हमले किए गए. इस बीच यमन की राजधानी सना से करीब 170 किलोमीटर दूर मारिब प्रांत के राघवन जिले में एक छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का मलबा मिला है. OSINT विश्लेषकों ने ये मलबा पाया है.
दावा किया जा रहा है कि यह चीन में बनी DF-15A शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का मलब हो सकता है. कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि संभव है कि यह मिसाइल सऊदी अरब की रॉयल सऊदी स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स यमन के हूती ठिकानों पर दागी हो, लेकिन यह फेल हो गई.
दरअसल, मलबे के एक किनारे पर DF-15A लिखा नजर आ रहा है. माना जा रहा है कि तकनीकी खराबी के कारण यह मिसाइल अपने लक्ष्य से पहले ही गिर गई है. इस मिसाइल के अपने टारगेट तक नहीं पहुंच पाने और बीच में ही फुस्स हो जाने की खबर से पाकिस्तान की टेंशन भी बढ़ गई है. मुनीर का मुल्क इस मिसाइल को चीन से खरीदता है और यह कोई पहली बार नहीं है, जब चीनी मिसाइल टारगेट से पहले ही फेल हो गई हो.
सऊदी अरब ने किससे खरीदी ये मिसाइल?
चूंकि, चीन ने अभी तक पश्चिम एशिया के किसी भी देश के साथ DF-15 मिसाइल को लेकर कोई सौदा नहीं किया है. ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान ने चीन में बनी इस मिसाइल को गुप्त रूप से सऊदी अरब तक पहुंचाया हो. फिलहाल न ही सऊदी अरब और न ही हूती विद्रोहियों ने सार्वजनिक रूप से चीन की DF-15A मिसाइल के संचालन की बात को स्वीकार की है.
हालांकि, यमन में मिले मलबे के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि सऊदी ने DF सीरीज की अपनी पिछली गुप्त तैनाती के आधार पर चीन में निर्मित DF-15A मिसाइल का आयात और संचालन किया होगा. विश्लेषकों का कहना है कि हूतियों के पास DF-15A जैसी मिसाइल के होने का कोई प्रमाण नहीं है. उनके पास अधिकांश ईरानी तकनीक पर बने मिसाइल और ड्रोन ही हैं.
टारगेट से पहले चीनी मिसाइल फुस्स
ऐसे में यह मिसाइल उड़ान के दौरान खराब हो गई और टारगेट से पहले ही फेल हो गई. सामने आए कुछ वीडियो में मिसाइल के अवशेष देखने को मिल रहे हैं. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि किसी भी मिसाइल की डील के दौरान जो क्षमताएं ब्रोशर में बताई जाती हैं, वह युद्ध क्षेत्र में कई बार अलग होती हैं. रेगिस्तानी गर्मी, रेत और कठिन परिस्थितियों में मिसाइलें क्षमता के साथ काम नहीं कर पाती हैं.
इस बीच अगर यह मिसाइल सऊदी की ओर से दागी गई, तो इसका लक्ष्य से चूकना सऊदी अरब की गुप्त मिसाइल क्षमता पर सवाल खड़ा करता है. वहीं, चीनी हथियारों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं. इस घटना के बाद सबसे अधिक चिंता पाकिस्तान की बढ़ी है.
पाकिस्तान की टेंशन बढ़ने के मुख्य कारण
पाकिस्तान अपनी डिफेंस जरूरतों के लिए चीन पर निर्भर है. ऐसे में युद्ध के मैदान में खास मिसाइल का फेल हो जाना, बीजिंग की डिफेंस तकनीक और विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है. पाकिस्तान चीनी मिसाइलों की तकनीक पर सबसे अधिक भरोसा करता है और अधिकांश हथियार उसी से खरीदता है.
वहीं, इतिहास में नजर डालें, तो पता चलता है कि चीन और किसी भी पश्चिम एशिया के देशों के साथ कोई डिफेंस डील नहीं है, ऐसे में सऊदी अरब की ओर से इस्तेमाल की गई DF-15A मिसाइल कैसे वहां पहुंची इसके लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. इसके दो पहलू माने जा रहे हैं. या तो पाकिस्तान ने किसी गुप्त तरीके से सऊदी तक इस मिसाइल को पहुंचाया हो, या फिर चीन ने गुप्त तरीके से पश्चिम एशियायी देश के साथ डिफेंस डील की हो.
पाकिस्तान भी चोरी से खरीदता है चीनी हथियार
सऊदी अरब की ओर से दागी गई इस मिसाइल के बाद पाकिस्तान की धड़कन बढ़ गई है. पाकिस्तान के पास भी चीनी हथियारों का जखीरा है. अब इस खुलासे के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी हथियारों के प्रसार की निगरानी और बढ़ गई है. ऐसे में मिसाइल के बीच रास्ते में गिरने के मतलब है कि शत्रु देशों के हाथों में सीक्रेट तकनीक लग सकती है.
मिसाइल का हूती विद्रोहियों के हाथ लगना इस बात का भी खतरा पैदा करता है कि चीन और उसके करीबी देशों की संवेदनशील तकनीक का अध्ययन विरोधी खेमे के पास पहुंच सकता है. पाकिस्तान को भी इसी बात की चिंता है कि उनके रक्षा रहस्य दुनिया के सामने न आएं.
पहली बार मक्का में हमले का अलर्ट
हूतियों की ओर से सऊदी पर किए जा रहे हमलों के बीच पहली बार रियाद के पवित्र शहर मक्का में हमले को लेकर अलर्ट जारी किया गया. पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग के बीच पहली बार ऐसा हुआ है. बता दें कि यह हवाई हमले का अलर्ट ऐसे समय पर जारी किया गया है, जब हाल के दिनों में ईरान समर्थित हूतियों ने किंगडम को बार-बार निशाना बनाया.
गौरतलब है कि इजरायली अखबार हायोम की एक रिपोर्ट के अनुसार, मदीना में प्रिंस मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (MED) के लिए हवाई ट्रैफिक भी रोक दिया गया था.