App

हूतियों के हमलों से बेहाल ईरान की शरण में पहुंचा सऊदी अरब! तुर्किये-PAK के साथ मिलकर तेहरान से मांगी 'शांति' की भीख

हूतियों के हमलों से जूझ रहे सऊदी अरब को अब वो काम करना पड़ा है, जिसे वो कभी नहीं करना चाहता है. अपने मुल्क को हमलों से बचाने के लिए सऊदी अरब के हुक्मरान ईरान की शरण में पहुंचे हैं.

हूतियों के हमलों से बेहाल ईरान की शरण में पहुंचा सऊदी अरब! तुर्किये-PAK के साथ मिलकर तेहरान से मांगी 'शांति' की भीख
Image Credit: दुश्मन ईरान की शरण में पहुंचे सऊदी अरब के नेता

क्षेत्रीय शक्ति होने के बावजूद सऊदी अरब के एयरपोर्ट, सैन्य ठिकाने और तेल कंपनियां एक-एक कर तबाह हो रहे हैं. यमन के हूती विद्रोही जहां चाहें, वहां पर सऊदी अरब को चोट पहुंचा रहे हैं. अमेरिका के साथ मजबूत रक्षा संबंध और तुर्किये-पाकिस्तान के साथ मक्का डिफेंस पैक्ट करने के बावजूद वह इस वक्त बेहद असुरक्षित देश बन चुका है. इन सब असलियतों ने सऊदी अरब को अब वो काम करने को मजबूर कर दिया, जिसे वह कभी नहीं करना चाहता था. उसने अपने क्षेत्र में हूतियों के हमले रुकवाने के लिए ईरान से संपर्क साधा है.

'शांति' की तलाश में तेहरान पहुंचे सऊदी अरब, तुर्किये और PAK

ईरान और 'मक्का एलायंस' के तीन देशों के बीच पहली बार उच्च स्तरीय संपर्क और संयुक्त बैठक तेहरान में आयोजित की गई. यह मीटिंग सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों में तेजी आने के बाद हुई है. इसके लिए सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के शीर्ष रक्षा अधिकारी तेहरान पहुंचे. जहां पर उनकी ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रजाई से लंबी बैठक हुई.

इस बैठक में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान अल सऊद, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और तुर्किये के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन ईरान पहुंचे थे. यह बैठक क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बने तनाव के बीच क्षेत्र में शांति और सुरक्षा पर केंद्रित थी.

बैठक के निष्कर्षों पर तीनों मुल्कों ने साधी चुप्पी

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, बैठक के बाद ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की ओर से बयान जारी किया गया. इस बयान में कहा गया कि चारों क्षेत्रीय देशों ने आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए चर्चा जारी रखने पर सहमति जताई है. वहीं, सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने इस बैठक में लिए गए फैसलों या चर्चा के विषयों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है.

हालांकि, सऊदी अरब के सार्वजनिक कूटनीति के उप मंत्री रायद क्रिमली की ओर से एक ढुल-मुल बयान जरूर आया है. इसमें क्रिमली ने कहा कि यह दौरा कतर और पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे मध्यस्थता प्रयासों का समर्थन करने के लिए किया गया था. संकट में शामिल पक्षों के बीच तनाव कम करने की दिशा में यह एक गंभीर प्रयास प्रयास है.

जुबानी जुमला बनकर रह गया 'मक्का एग्रीमेंट'

बताते चलें कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्किये के साथ मिलकर इसी साल 'मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट' पर साइन किया है. इस एग्रीमेंट में प्रावधान है कि एक देश पर हमला, तीनों मुल्कों पर हमला माना जाएगा. हालांकि, सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के लगातार अटैक के बावजूद पाकिस्तान और तुर्किये अभी तक उसकी मदद के लिए कोई खास सक्रिय नजर नहीं आए हैं.

दोनों मुल्क केवल जुबानी बयानबाजी कर रहे हैं और हूतियों के हमलों की निंदा कर रहे हैं. वे यह भी कह रहे हैं इस जंग में वे सऊदी अरब के साथ खड़े हैं. लेकिन वास्तव में वे उसे हमलों से बचाने के लिए अपने हथियार और सैनिक सऊदी नहीं भेज रहे हैं. मजबूत रक्षा सहयोगी अमेरिका ने भी ईरान जंग में फंसे होने की बात कहकर फिलहाल कोई मदद करने के इनकार कर दिया है.

ईरान से दोस्ती में दिख रहा सऊदी को फायदा

इन हालातों में सऊदी अरब भौंचक्का खड़ा है और उसे हालात से निकलने का एकमात्र रास्ता ईरान से दोस्ती करने में ही नजर आ रहा है. वह इस बात को अच्छी तरह जानता है कि हूती विद्रोही, असल में ईरान के ही प्रॉक्सी हैं. उन्हें हथियार, फंड और ट्रेनिंग सब कुछ ईरान से मिलता है. इस लिहाज से पर्दे के पीछे से ईरान ही सऊदी अरब के खिलाफ जंग लड़ रहा है. ऐसे में सऊदी चाह रहा है कि किसी तरह ईरान के साथ कोई शांति संधि हो जाए, जिससे वह हूतियों से कहकर उस पर अपने हमले रुकवा दे. 
 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Devinder Kumar

Devinder Kumar

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
Read More