रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत का बड़ा दांव! पुतिन और जेलेंस्की को एक मेज पर लाने के लिए जयशंकर का 3-पॉइंट प्लान
रूस और यूक्रेन के बीच जंग भले ही हजारों मील दूर लड़ी जा रही हो, लेकिन इसका झटका दुनियाभर में खाने-पीने की चीजों और तेल की कीमतों पर साफ दिख रहा है. इसी ग्लोबल टेंशन को कम करने के लिए अब भारत ने शांति की कमान संभालते हुए एक मजबूत पहल की है.
पिछले कुछ सालों से रूस और यूक्रेन के बीच जंग चल रही है. इस तनाव को खत्म कराने के लिए तमाम कोशिशें की गई हैं, लेकिन नतीजा नहीं निकला. अब इस भीषण जंग को खत्म कराने और दुनिया को बड़े आर्थिक संकट से बचाने के लिए भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा दांव चल दिया है. भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुलासा किया कि भारत इस युद्ध के सबसे संवेदनशील मसलों को सुलझाने के लिए रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ लगातार संपर्क में है.
अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एस. जयशंकर ने यह भी बताया है कि भारत ने दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने के लिए एक खास '3-पॉइंट प्लान' सामने रखा है, जिसका मकसद दुनियाभर में फूड सिक्योरिटी और एनर्जी क्राइसिस को टालना है.
तीन सबसे जरूरी मुद्दे
- नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा: पहला और सबसे अहम पॉइंट यह है कि जंग के दौरान काला सागर से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और सीफेयरर्स (नाविकों) को निशाना न बनाया जाए.
- अनाज सप्लाई की बहाली: दूसरा पॉइंट है कि ब्लैक सी के जरिए रूस और यूक्रेन से अनाज का निर्यात दोबारा शुरू हो. युद्ध के चलते इस रूट से अनाज की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया के कई देशों में खाद्यान्न संकट गहराने लगा है.
- एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों पर रोक: इस प्लान का तीसरा पॉइंट सबसे पेचीदा है, जो ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रोकना है, ताकि दुनियाभर में तेल और बिजली सप्लाई की रीढ़ न टूटे.
एस. जयशंकर ने क्या कहा?
एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा सबसे जटिल मसला है, क्योंकि हर पक्ष के लिए इसके मायने अलग-अलग हैं. उन्होंने कहा, 'एनर्जी पर हमला न करना संभवतः सबसे पेचीदा हिस्सा है, क्योंकि अलग-अलग देशों के लिए इसके अलग अर्थ हैं. किसी के लिए एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब रिफाइनरी हो सकता है, तो किसी के लिए पावर ग्रिड. इसके अलावा ईंधन ले जाने वाले तेल टैंकरों और जहाजों की सुरक्षा का मसला भी इसमें शामिल है.'
क्यों जरूरी है यह समझौता?
भारत इन सभी पक्षों को एक मेज पर लाने की कोशिश में जुटा है ताकि ग्लोबल सप्लाई चेन की कमर न टूटे, क्योंकि ब्लैक सी सिर्फ रूस या यूक्रेन का रास्ता नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के कारोबार की लाइफलाइन है. अगर वहां कमर्शियल जहाजों की आवाजाही में जरा भी रुकावट आई, तो समुद्री भाड़ा और इंश्योरेंस का खर्च आसमान छूने लगेगा, जिसका सीधा असर हमारे-आपके रोजमर्रा के सामानों के दाम पर पड़ेगा. यह ठीक वैसा है कि अगर रिफाइनरियों, पावर ग्रिड्स या तेल टैंकरों पर मिसाइलें गिरती रहीं, तो इंटरनेशनल मार्केट में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बेकाबू हो जाएंगी.