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PoK में सुलगे 'शोले': शहबाज की चुप्पी पर फिर भड़के प्रदर्शनकारी, डेडलाइन खत्म होते ही आजादी की मांग तेज

पीओके यानी पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में शासन के तरीके को लेकर एक बार फिर बगावत तेज हो गई है. यहां के प्रदर्शनकारी लंबे समय से पाकिस्तान से आजाद होने की मांग कर रहे हैं. 2026 में जिस तरह आंदोलनकारियों को गोली चलाकर मौत के घाट उतारा गया. उससे हालात बेकाबू हो गए हैं.

Written ByShwetank Ratnamber
Published: Oct 04, 2026, 06:26 AM IST|Updated: Oct 04, 2026, 07:44 AM IST
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PoK में सुलगे 'शोले': शहबाज की चुप्पी पर फिर भड़के प्रदर्शनकारी, डेडलाइन खत्म होते ही आजादी की मांग तेज
Image Credit: PoK Police (Reuters)

About the Author

Shwetank Ratnamber

Shwetank Ratnamber

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में अवामी एक्शन कमेटी की अगुवाई वाले आंदोलन की डेडलाइन 3 अक्टूबर को खत्म होने के बाद एक बार फिर प्रदर्शनकारियों के अंदर का आक्रोश चरम पर पहुंचता जा रहा है. महीनों से जारी आंदोलन में 50 से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं. सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों का कहना है शहबाज शरीफ की सरकार गूंगी और बहरी हो चुकी है. इस बार महिला प्रदर्शनकारियों की संख्या पहले से कहीं ज्यादा है. वो सीधे सुरक्षाबलों और PAK फौजियों को ललकार रही हैं. हजारों लोगों की लामबंदी ने इस संकट को गहरा दिया है.

सड़कों पर फिर उतरे लाखों लोग

पीओके में एक बार फिर से लोग सड़कों पर हैं. इस्लामाबाद जिन दो राजनीतिक संकटों को महीनों से काबू करने की कोशिश कर रहा था, वे अब तेजी से आपस में टकरा रहे हैं. पाकिस्तान में इमरान खान की जेल से रिहाई की मांग के बीच पीओके में एक बार फिर से आंदोलनकारी आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दे रहे हैं.

पाक फौज पर दमन करने का आरोप

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान की पुलिस और सेना प्रदर्शनकारियों को गोलियों से भून रही है. तमाम जुल्म और सितम सहने के बावजूद हम अपनी मांगों को पूरी करवाने के लिए किसी भी हद से गुजर सकते हैं.

Thank you @MarioNawfal for raising your voice for us . #RightsMovementAJK https://t.co/dOVnzMjAgj

— MilliChilliHaani(@Umme_Haani11) October 3, 2026

साफ है कि पाकिस्तानीे कब्जे वाले कश्मीर में हजारों लोग एक बार फिर से सड़कों पर उतर आए हैं. यह पूरा इलाका इस साल हुए चुनावों के बाद से लगातार अशांत है. इमरान खान की पार्टी PTI ने चुनावी धांधली और दखलंदाजी के आरोपों के कारण इन चुनावों का बहिष्कार किया था.

PAK Army को चुनौती

करीब पांच दिन पहले आंदोलन का ऐलान हुआ. इस दौरान सरकार को 3 अक्टूबर तक उनकी मांगे मानने का अल्टीमेटम दिया गया. उसके बाद आंदोलन को तेज करने की धमकी दी गई थी. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंधोल में हुई एक रैली में पुंछ-मेंढर का रास्ता खोलकर भारत से पुराने संपर्क बहाल करने की मांग उठी थी.

उस समय प्रदर्शनकारी नेता सरदार अमान खान ने भीड़ से पूछा, 'क्या LoC खत्म होनी चाहिए? क्या पुंछ-मेंढर के रास्ते खुलने चाहिए?' तब हजारों की भीड़ ने एक सुर में जवाब दिया, 'हां!'

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सेना प्रमुख आसिम मुनीर की फौज के दमन के खिलाफ उठी आवाजें अब सिर्फ सुविधाओं की मांग और चुनावों में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रह गई हैं. पीओके के लोग सीधे-सीधे पाकिस्तान के नियंत्रण को ही खुली चुनौती देकर आजादी की मांग कर रहे हैं.

भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से पीओके में जारी प्रदर्शनों में जारी हिंसा पर चिंता जताते हुए बयान जारी किया था. भारत 1947 से कहता आया है कि पूरा कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है. इस पर किसी तीसरे देश की बयानबाजी स्वीकार्य नहीं है.

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PoK