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पैराग्वे के राष्ट्रपति की कुर्सी बीते कई दिनों से जारी आर्थिक संकट की भेंट चढ़ गई. एक बैंकिंग संकट से खड़े हुए सियासी भूचाल के बाद प्रेसिडेंट पेना ने इस्तीफा दे दिया. बैंक के अधिग्रहण के बाद करीब 30 लाख ग्राहकों में हड़कंप मच गया, वो अपना पैसा निकलाने के लिए पहुंचे. ऑनलाइन काम न होने पर बैंकों के बाहर मौजूद लोगों ने विरोध-प्रदर्शन तेज कर दिया. संकट के बीच राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पर विपक्ष और अपनी ही पार्टी के नेताओं का दबाव बढ़ा जिसके बाद उन्होंने पद छोड़ने का ऐलान कर दिया.
राष्ट्रपति सैंटियागो पेना का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है, जब देश एक बड़े बैंकिंग संकट से जूझ रहा है. सोशल मीडिया साइट 'X' पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में पेना ने कहा कि वह देश में स्थिरता बनाए रखने, सामाजिक शांति कायम करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मेरी सबसे बड़ी इच्छा है कि लोगों के पैसों की वापसी सुनिश्चित हो, 'डिपॉजिट गारंटी फंड' अपना काम करे और देश के खजाने में मौजूद रकम जो देश के सभी नागरिकों की है वो पूरी तरह सुरक्षित रहे.'
उनका इस्तीफा कई दिनों से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और विपक्षी सांसदों के बढ़ते दबाव के बाद आया है. विपक्षी सांसद उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे थे. यह संकट तब शुरू हुआ, जब पैराग्वे के केंद्रीय बैंक ने 'उएनो बैंक' को अपने नियंत्रण में ले लिया.
पैराग्वे के रिजर्व/केंद्रीय बैंक ने इसके पीछे बैंक में पूंजी की भारी कमी और न्यूनतम वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में उसकी अक्षमता को लेकर जताई गई चिंताओं का हवाला दिया था. इसके बाद 65 लाख आबादी वाले देश के करीब 30 लाख से ज्यादा खाताधारकों के ऑनलाइन लेन-देन ठप पड़ गए थे.
राजधानी असुनसियोन में उएनो बैंक की शाखाओं के बाहर लंबी कतारें लग गईं. लोग रो रहे थे और अपनी जमा धनराशि निकालना चाह रहे थे. नाराज ग्राहकों ने पुलिस से मुठभेड़ और हाथापाई करने की कोशिश करते हुए अपना पैसा दिलाने की मांग की.
पेना को उस समूह के साथ अपने पुराने कारोबारी संबंधों को लेकर बढ़ती आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसका उएनो बैंक पर नियंत्रण था. पेना पहले 'ग्रुपो वाजक्वेज' में बड़े शेयरधारक थे, जिसके पास मार्च 2025 तक इस बैंक का स्वामित्व था.