फिलिस्तीन में 20 साल बाद होने वाले चुनाव टले: राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने किया एलान, कहा- अभी चुनाव लायक माहौल नहीं
Palestinian Elections Postponement News: फिलिस्तीन में 20 साल बाद होने जा रहे राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव एक बार फिर टल गए हैं. पिछले 21 साल से राष्ट्रपति पद पर जमे महमूद अब्बास ने इसका एलान किया. उन्होंने कहा कि अभी चुनाव लायक माहौल नहीं है.
Palestinian General Elections Postponement News: फिलिस्तीन में 20 साल बाद होने जा रहे संसदीय और राष्ट्रपति के चुनाव टल गए हैं. राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने रविवार को चुनाव टालने का एलान किया. इससे पहले वहां पर 2006 में चुनाव हुए थे, जिसमें गाजा पट्टी में हमास और वेस्ट बैंक में यासर अराफात के नेतृत्व वाले अल फतह गुट की जीत हुई थी. इसके बाद से वहां पर आज तक चुनाव नहीं हो पाए हैं.
राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव एक साल के लिए टाले गए
फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी WAFA के अनुसार, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने संसदीय चुनावों को लगभग एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया है. इसके साथ ही चुनावों की नई तारीख 11 सितंबर, 2027 तय कर दी गई है. इससे पहले यह चुनाव इस साल 28 नवंबर 2026 के लिए प्रस्तावित थे. इन चुनावों के जरिए फिलिस्तीन की जनता को अपने लोकतांत्रिक अधिकार मिलने की उम्मीद थी लेकिन अब फिर धूल-धूसरित हो गई है.
केवल संसदीय ही नहीं, राष्ट्रपति चुनाव भी अगले साल सितंबर तक के लिए टाल दिए गए हैं. फिलिस्तीन में आखिरी बार 2006 में राष्ट्रपति चुनाव हुए थे. जिसमें महमूद अब्बास जीते थे. लेकिन इसके बाद कोई चुनाव न करवाने की वजह से वे पिछले 20 सालों से फिलिस्तीन के राष्ट्रपति पद पर कब्जा किए बैठे हैं.
सवालों के घेरे में आए राष्ट्रपति अब्बास
राष्ट्रपति महमूद अब्बास की ओर से चुनाव स्थगन के एलान के बाद फिलिस्तीनी अथॉरिटी एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. साथ ही उसकी राजनीतिक वैधता और जनसमर्थन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, महमूद अब्बास ने चुनाव टाले जाने के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया.
महमूद अब्बास के नेतृत्व वाले 'फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन' (PLO) ने बयान जारी कर कहा कि पूर्वी यरुशलम, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में स्थितियां चुनावों के लिए अनुकूल नहीं हैं. इजरायल ने गाजा में चुनाव सामग्री या अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को प्रवेश करने की अनुमति भी नहीं दी है. ऐसे में स्वतंत्र माहौल में फिलहाल चुनाव आयोजित करवाया जाना संभव नहीं है.
इजरायल ने आरोपों को बताया मनगढ़ंत
इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने इन आरोपों को गलत बताते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एस्स पर लिखा, इजरायल पर आरोप मढ़ना अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से बचने के लिए गढ़ा गया एक और हास्यास्पद झूठ है. अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए अब्बास जानबूझकर इसमें इजरायल को घसीट रहे हैं.
वहीं अब्बास के फैसले पर आतंकी संगठन हमास ने खुशी जताई है. फैसले का स्वागत करते हुए हमास ने इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया. हमास ने कहा कि चुनाव की तारीख फिलिस्तीनी संस्थानों के पुनर्गठन और बातचीत के बाद तय की जानी चाहिए.
फिलिस्तीनी चुनाव क्यों महत्वपूर्ण हैं?
बताते चलें कि इजरायल पर मानवाधिकारों का आरोप लगाने वाले फिलिस्तीनियों ने पिछले 20 सालों में कोई संसदीय चुनाव नहीं देखा है. दो दशक पहले 2006 में हुए संसदीय चुनाव में हमास ने बहुमत हासिल किया था. जिसके बाद इजरायल और पश्चिमी देशों ने हमास के नेतृत्व वाली सरकार का बहिष्कार कर दिया था. हालांकि, हथियारों और जनसमर्थन के बल पर हमास 2007 में गाजा पट्टी का शासन अपने कब्जे में लेने में सफल हो गया. जबकि वेस्ट बैंक में मौजूद फिलिस्तीनी अथॉरिटी का कंट्रोल महमूद अब्बास के नेतृत्व वाले पीएलओ की पार्टी अल फतह के पास रहा. तब से फिलिस्तीनी राजनीतिक व्यवस्था दो भागों में बंटी हुई है.
पिछले 21 सालों से राष्ट्रपति पद पर कब्जा
महमूद अब्बास ने वर्ष 2005 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की थी. इसके बाद से वे लगातार परिस्थितियों का हवाला देकर राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों को स्थगित करते आ रहे हैं. चुनाव स्थगित किए जाने के एलान से पहले तक हमास, इस्लामिक जिहाद और फतह के पूर्व सुरक्षा प्रमुख मोहम्मद दहलान के नेतृत्व वाला गुट महमूद अब्बास के खिलाफ गठबंधन बनाने पर बातचीत कर रहे थे. दहलान पहले अब्बास की पार्टी में ही थे. लेकिन उनसे मतभेद होने के बाद वे वर्ष 2010 से निर्वासन में जिंदगी गुजार रहे हैं.