मुनीर-ट्रंप के सपने पर बलूचों ने लगाया ग्रहण, PAK से अमेरिका मिनरल की खेप रुकी; कंपनी भी हुई बंद
Pakistan-America Dream Project Halted: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में अमेरिका का बड़ा प्रोजेक्ट ठप हो गया है. इसकी वजह विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ( BLA) को बताया जा रहा है. BLA की ओर से लगातार हिंसा ने अमेरिकी कंपनी के ऑपरेशन को बंद कर दिया है.
Balocshistan Rare Earth Minerals: ऑपरेशन सिंदूर के बाद से लगातार पाकिस्तान-अमेरिका के बीच बढ़ती दोस्ती देखी जा रही थी. कभी शहबाज तो कभी मुनीर रह रहकर वॉशिंगटन का दौरा कर रहे थे. दोनों देशों ने एक बड़े प्रोजेक्ट पर हाथ भी मिलाया था, जो अब ठप हो चुका है.
अगस्त 2026 में पाकिस्तान से दुर्लभ खनिजों की एक खेप अमेरिका भेजी जाने वाली थी, जो नहीं भेजी गई. इससे प्रोजेक्ट पर पानी फिर चुका है. इस घटना से अमेरिकी कंपनी 'यूएस स्ट्रेटेजिक मेटल्स' (USM) के कराची और इस्लामाबाद के दफ्तरों में कामकाज ठप हो गया है.
बलूच विद्रोहियों ने बढ़ाई मुसीबत
पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रांत के वो इलाके जहां रेयर अर्थ मिनरल्स का खनन होता है, वहां विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ( BLA) के हमलों के चलते अमेरिकी कंपनी का ऑपरेशन मुश्किल हो गया है. बलूच विद्रोहियों ने चागाई जिले में स्थित रेको दीक खदान की ओर जाने वाली सड़कों को ब्लॉक कर दिया है.
पाकिस्तानी आर्मी के चीफ असिम मुनीर ने डील को लेकर व्हाइट हाउस में 'स्टोन शो' भी किया था, जिसमें उन्होंने ट्रंप को लकड़ी का एक बॉक्स दिखाया था. इसमें रेयर अर्थ मिनरल्स और जेमस्टोन के नमूने थे.
कनाडाई कंपनी भी बंद होने के कगार पर
अक्टूबर 2025 में भी अमेरिका को एंटीमनी, कॉपर कंसंट्रेट, नियोडिमियम और प्रेजियोडिमियम जैसे कई रेयर अर्थ मिनरल्स की पहली खेप भेजी गई थी. इस प्रोजेक्ट के तहत साल 2025-2026 में मिनरल्स का एक्सपोर्ट करने और साल 2027-28 में पाकिस्तान में मिनरल प्रोसेसिंग शुरू करने और 2029 में बड़े पैमाने पर खनन शुरू करने की योजना थी.
कनाडाई कंपनी 'बैरिक गोल्ड' भी बलूचिस्तान के रेको डिक में माइनिंग कर रही है. हालांकि, BLA के लगातार हमलों के चलते कंपनी के लिए वहां काम जारी रखना मुश्किल हो गया है. ऐसा में आशंका है कि यह कंपनी भी अपना ऑपरेशन सस्पेंड कर सकती है और इन्वेस्टमेंट वापस ले सकती है.
बलूचिस्तान पर चीन-अमेरिका की नजर
बलूचिस्तान को पाकिस्तान के मिनरल वेल्थ से भरपूर क्षेत्र माना जाता है. ग्वादर पोर्ट पर चीन की मजबूत उपस्थिति है. उसने CPEC के तहत ग्वादर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है. इससे यहां चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाओं की उपस्थिति भी बढ़ गई है. स्थानीय बलूच मछुआरों का आरोप है कि बड़ी चीनी नौकाएं उनकी छोटी नौकाओं को वहां से हटने के लिए मजबूर करती हैं, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होती है. अमेरिका की नजर भी बलूचिस्तान के दुर्लभ खनिजों पर भी है.
बलूचिस्तान में फैली अशांति
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है. यह देश के लगभग 45 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है और ईरान के साथ बॉर्डर शेयर करता है. इसके विशाल रेगिस्तान और पहाड़ों में लगातार हिंसा बढ़ती जा रही है. BLA लगातार स्वतंत्र बलूच राज्य के लिए लड़ रही है. स्थिति ऐसी है कि प्रांत के तकरीबन 70 फीसदी हिस्से में बलूच और पश्तून विद्रोही सक्रिय हैं.