दो दिन पहले ही पाकिस्तान को कंगाल मुल्कों का सरदार माना गया था. अब पाकिस्तान के हिस्से में एक और उपलब्धि आ गई है, जिसे सुनकर किसी भी सभ्य नागरिक का सिर शर्म से झुक सकता है. असल में, ग्लोबल हंगर इंडेक्स में पाकिस्तान भुखमरा देश घोषित हो गया है. जिसकी गवाही पाकिस्तान में आटे के लिए मची लूट भी दे रही है.
वर्ल्ड हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट बताती है कि 2018 के बाद से पाकिस्तान में हालात और खराब हुए हैं. इसी वजह से ग्लोबल हंगर इंडेक्स में पाकिस्तान को अब इथोपिया और अफगानिस्तान जैसे देशो के साथ रखा गया है. रिपोर्ट में साफ-साफ बताया गया है कि पाकिस्तान में 1 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार हैं और पाकिस्तान की 45% आबादी को दो वक्त का भरपेट खाना नहीं मिल रहा है. पाकिस्तान में हालात ये हैं कि 20 किलो आटे का बैग 3300 रुपये में मिल रहा है.
पाकिस्तान का आर्थिक संकट सिर्फ खाद्य सामग्री तक सीमित नहीं है. देश पर बढ़ता विदेशी कर्ज और विदेशी मुद्रा भंडार में आई भारी गिरावट उसके हालात को और खतरनाक बना रही है. वहां पर मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर रिकॉर्ड स्तर को छू रही है, जिसके चलते आम नागरिकों की चीजें खरीदने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो रही है. शहबाज शरीफ सरकार नीतिगत मोर्चे पर पूरी तरह विफल नजर आ रही है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से मदद की आस में बैठी है.
बिजली महंगी होने और पेट्रोल-डीजल की कमी होने की वजह से उद्योग लगातार बंद हो रहे हैं. इसके चलते बेरोजगारी चरम स्तर पर पहुंच रही है. देश का व्यापार घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसने बुनियादी अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है. संकट केवल इतने तक सीमित नहीं है. वहां के अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की भारी किल्लत हो गई है क्योंकि कच्चे माल का आयात करने के लिए उसके पास जरूरी डॉलर की भारी कमी है.
इतना कुछ होने के बावजूद ऐसा लगता है कि मुल्क चला रही सेना और सरकार पर कोई असर नहीं है. सेना का हर मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप रहता है लेकिन उसके जनरल आम जनता के बजाय अपनी तिजोरियां भरने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. इसके चलते आम जनता की तकलीफ लगातार बढ़ रही है और उन्हें इससे निकलने का कोई रास्ता सूझ नहीं रहा है.