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कूटनीति पर भी सेना का 'कब्जा'...रिटायर्ड अफसरों को राजदूत बनाकर आसिम मुनीर ने चला पैंतरा, देखते रह गए शहबाज

पाकिस्तान ने सेना के 9 रिटायर्ड अफसरों को विदेशों में उच्चायुक्त या राजदूत नियुक्त किया है. इससे सवाल खड़े हो गए हैं कि पेशेवर विदेश सेवा के अफसरों को दरकिनार कर अहम पदों पर नॉन कैडर लोगों को क्यों बैठाया जा रहा है.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 22, 2026, 12:53 PM IST | Updated: Oct 22, 2026, 01:14 PM IST
Image Credit: आसिम मुनीर का पाकिस्तान में दबदबा बढ़ता जा रहा है.
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लगता है पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर खुद को मुल्क का प्रधानमंत्री समझने लगे हैं. तभी उन्होंने अपने लोगों को पदों पर बैठाना शुरू कर दिया है. पाकिस्तान ने मिलिट्री के 9 रिटायर्ड अफसरों को विदेशों में राजदूत या उच्चायुक्त नियुक्त किया है. इसकी जानकारी विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने सीनेट में दी है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने विदेशों में अपने राजनयिक मिशनों के लिए 17 ऐसे राजदूतों और उच्चायुक्तों को नियुक्त किया है, जो पेशेवर डिप्लोमैट्स नहीं हैं. इनमें सेना के 9 रिटायर्ड सीनियर अफसर शामिल हैं.

अब इस खुलासे ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि पाकिस्तान अपने डिप्लोमैट्स का चयन कैसे करता है, और क्या पेशेवर फॉरेन सर्विस के अनुभव को दरकिनार करके मिलिट्री बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों को तवज्जो दी जा रही है.

CNN-News18 के मुताबिक, लिस्ट में सेना के रिटायर्ड जनरल, एक एयर मार्शल और एक वाइस एडमिरल शामिल हैं, जिन्हें मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, यूरोप और एशिया में विभिन्न मिशनों पर तैनात किया गया है. इन नियुक्तियों से साफ हो गया है कि आज भी पाकिस्तान में सिर्फ सेना की ही चलती है, सरकार मुखौटा है.साथ ही, गैर-करियर राजनयिकों के चयन के मानदंडों के अलावा फॉरेन सर्विस के अफसरों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

राजनयिक मिशनों में 9 रिटायर्ड सैन्य अफसर

यह जानकारी सीनेटर मुहम्मद तल्हा महमूद को दिए गए लिखिति जवाब में सामने आई है. सीनेटर ने विदेशों में तैनात नॉन-करियर डिप्लोमैट्स के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसमें उनके नाम, पेशेवर अनुभव, रहने की जगह और उनकी नियुक्ति के लिए अपनाई गई प्रक्रियाएं शामिल थीं. आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, सीनेट के जवाब में जिन नौ रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों का नाम है, वे हैं:

  1. मेजर जनरल (रिटायर्ड) कामरान तबरेज सवेरा, अबुजा, नाइजीरिया में उच्चायुक्त (नामित)
  2. मेजर जनरल (रिटायर्ड) खुर्रम सरफराज खान, अम्मान, जॉर्डन में तैनाती
  3. मेजर जनरल (रिटायर्ड) नय्यर नसीर, कोलंबो, श्रीलंका में तैनात
  4. एयर मार्शल (रिटायर्ड) मुहम्मद मुघेस अफजल, दमिश्क, सीरिया में तैनात
  5. लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद आमिर, दोहा, कतर में तैनात
  6. मेजर जनरल (रिटायर्ड) कंवर अदनान अहमद खान, कीव, यूक्रेन में तैनात
  7. वाइस एडमिरल (रिटायर्ड) फैसल रसूल लोधी, माले, मालदीव में तैनात
  8. मेजर जनरल (रिटायर्ड) मुहम्मद इरफान, सारायेवो, बोस्निया में राजदूत (नामित)
  9. मेजर जनरल (रिटायर्ड) मुमताज हुसैन, त्रिपोली, लीबिया में राजदूत (नामित)

यह लिस्ट कई इलाकों तक फैली हुई है, जिसमें पूर्व सीनियर मिलिट्री अधिकारियों को ऐसी भूमिकाओं में रखा गया है, जहां वे पाकिस्तान के प्रतिनिधि हैं.

बाकी आठ नॉन-करियर राजनयिक कौन हैं?

सीनेट के जवाब में पाकिस्तान की फॉरेन सर्विस के बाहर के आठ अन्य लोगों की भी पहचान की गई है, जिन्हें राजनयिक पदों पर नियुक्त या नामित किया गया है. वे हैं:

  1. डॉ. यूसुफ जुनैद, अंकारा, तुर्की
  2. डॉ. फरयाल लेघारी, अश्गाबात, तुर्कमेनिस्तान
  3. कोहदयार मारी, हनोई, वियतनाम
  4. मुहम्मद इरफान तरार, नियामे, नाइजर में राजदूत (नामित)
  5. जहीरुद्दीन बाबर थहीम, नोम पेन्ह, कंबोडिया
  6. अकील गिलानी, रबात, मोरक्को
  7. डॉ. नजीब सामी, ट्यूनिस, ट्यूनीशिया में राजदूत (नामित)
  8. मुहम्मद समी-उर-रहमान, वारसॉ, पोलैंड

कुल मिलाकर, इन 17 नियुक्तियों से पता चलता है कि पाकिस्तान राजनयिक प्रतिनिधित्व में किस हद तक गैर-करियर कर्मियों का इस्तेमाल करता है. हालांकि, इस खुलासे से यह पता नहीं चलता कि हर उम्मीदवार के चयन के लिए क्या मानदंड अपनाए गए थे, या क्या किसी नियुक्ति में तय प्रक्रिया को दरकिनार किया गया था.

मेरिट बनाम सेना का दबदबा

9 रिटायर्ड सैन्य अफसरों की नियुक्ति से मेरिट और प्रोफेशनल डिप्लोमैटिक एक्सपीरियंस को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. पेशेवर डिप्लोमैट्स फॉरेन सर्विस में रहते हुए आमतौर पर वार्ताओं, अंतरराष्ट्रीय कानूनों, द्विपक्षीय रिश्तों और कॉन्सुलर अफेयर्स के जरिए अनुभव हासिल करते हैं. अब इस कैडर के बाहर की नियुक्तियों से यह सवाल खड़े होते हैं कि बिना ऐसे एक्सपीरियंस के ये रिटायर्ड सैन्य अफसर बाहरी मुल्क में अपने पद से न्याय कैसे कर पाएंगे.  

पाकिस्तान की सेना का लंबे वक्त से मुल्क की सुरक्षा के अलावा सरकार पर भी दबदबा रहता है. राजनयिक मिशनों में रिटायर्ड सीनियर अधिकारियों की मौजूदगी यह भी दिखाती है कि देश के बाहरी प्रतिनिधित्व में सेना की कितनी पहुंच है.
 

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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