'क्रू मेंबर्स कब प्राणरक्षक बन जाए, कोई नहीं जानता', इजरायल में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित का वायरल इंटरव्यू
Captain Sumit Machhar Podcast Interview: इजरायल में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित का पुराना पोडकास्ट इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि क्रू मेंबर्स का सम्मान करें. कोई पता नहीं कि कब उड़ान में संकट आए और वे प्राण रक्षक बन जाएं.
Captain Sumit Machhar Personal and Professional Life: जमीन से 34 हजार फुट ऊंचाई पर हमलावर को-पायलट से भिड़कर इजरायल के 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारत के पायलट कैप्टन स्मित मछार इजराय और भारत दोनों में हीरो बन गए हैं. चाकू से हुए हमले में वे बुरी तरह घायल हो गए हैं और उनका सऊदी अरब के अस्पताल में इलाज चल रहा है. लोग उनके जल्दी स्वस्थ होने और लंबी उम्र की प्रार्थना कर रहे हैं. अब उनका 11 महीने पहले एक पोडकास्ट में दिया हुआ पुराना इंटरव्यू वायरल हो रहा है. जिसमें उन्होंने कहा था कि पैसेंजर फ्लाइट में उड़ान के दौरान क्रू मेंबर को पर्याप्त इज्जत नहीं देते हैं. लेकिन किसी को पता नहीं है कि वही क्रू मेंबर कब उनके प्राणरक्षक बन जाएं. इस इंटरव्यू में उन्होंने अपने पायलट बनने से लेकर पारिवारिक और प्रोफेशनल लाइफ के बारे में भी खुलकर बात की थी. आइए, हम आपको इस इंटरव्यू में कही गई उनकी बातों को उन्हीं की जुबानी आपको बताते हैं.
'जब विमानन मेरा सपना नहीं था'
एंकर के सवाल पर कैप्टन स्मित ने पोडकास्ट में कहा, 'मैं पिछले 17 वर्षों से मैं अलग-अलग गंतव्यों के लिए बोइंग 737 उड़ा रहा हूं. आज जब लोग मुझे पायलट के रूप में देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि यह मेरा बचपन का सपना रहा होगा. लेकिन सच तो यह है कि ऐसा बिल्कुल नहीं था. अपनी स्कूली शिक्षा के बाद, मैंने अपने पारिवारिक व्यवसाय के तहत टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी.'
स्मित ने आगे कहा, 'चूंकि मैं तब युवा था और पारिवारिक कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करना चाहता था. , इसलिए मैंने मैनेजमेंट की एक और पढ़ाई करने का फैसला किया. उसी कोर्स के दौरान मैं एक एविएशन सेमिनार में गया और बस, यहीं से मेरे अंदर विमानन का 'कीड़ा' जग गया. जब मैंने इसके बारे में गहराई से जाना, तो यह मुझे बेहद आकर्षक लगा. उस समय मेरी उम्र करीब 19 साल थी.'
'फैसला सुनते ही मां डर गई थी'
कैप्टन मछार के अनुसार, 'जब मैंने घर पर इसके बारे में बताया, तो मां काफी डर गई थीं. आज से 15-17 साल पहले विमानन की दुनिया आज जैसी नहीं थी. लोगों को पता ही नहीं होता था कि पायलट कैसे बनते हैं और ऊपर से उड़ने का डर तो था ही. लेकिन मेरे पिता एक शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं. उन्होंने हालात को अच्छे से समझा और मुझसे बस इतना पूछा कि कर लेगा तो मैंने जवाब दिया कि हां, मैं कर लूंगा. उन्होंने मुझे रास्ता खोजने को कहा और यहीं से सब कुछ शुरू हुआ.'
अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र करते हुए स्मित ने पोडकास्ट में कहा, 'उस दौर में ट्रेनिंग फीस जुटाना भी बड़ी चुनौती होती थी. तब मेरी पूरी फीस करीब 16 से 17 लाख रुपये थी. हालांकि, आज के दौर में यह बढ़कर 80 लाख रुपये से भी ऊपर हो चुकी है. भारत में 2008-09 में मंदी का दौर चल रहा था, जिससे एयरलाइंस सेक्टर भी जूझ रहा था. लोगों में हवाई यात्रा की सुरक्षा को लेकर खास जागरूकता नहीं थी. लंबी दूरियों के लिए लोग ट्रेन से जाना पसंद करते थे. टिकट बुक करवाने के लिए वे ट्रेवल एजेंट के पास जाते थे, जहां उन्हें टिकटों के रूप में एक बड़ी सी बुकलेट थमाई जाती थी.'
विमान क्षेत्र में बदलाव की बात करते हुए मछार ने कहा, 'पिछले एक दशक में चीजें पूरी तरह बदल चुकी हैं. सरकार की नीतियों और छोटे शहरों के विमानन सेक्टर से जोड़ने के प्रयासों ने बाजार का नक्शा बदल दिया. आज मांग इतनी ज्यादा है कि बोइंग और एयरबस जैसी कंपनियों के पास जितने ऑर्डर हैं, उतने पहले कभी सुने ही नहीं गए थे.'
'कॉकपिट में पहली बार कदम रखने का एहसास'
कॉकपिट में पहली बार कदम रखने के एहसास के बारे में कैप्टन स्मित ने बताया, 'कोई भी पायलट अपने जीवन में कॉकपिट में पहली बार कदम रखने का वह पल कभी नहीं भूल सकता. मैंने अपना प्रशिक्षण न्यूजीलैंड से किया था. देश से बाहर जाने का वह मेरा पहला मौका था. मुझे याद है, ट्रेनिंग के दौरान हमारी एक 'फैम फ्लाइट' यानी परिचय उड़ान होती है, ताकि हमें छोटे विमानों के साथ सहज किया जा सके.'
'मेरी पहली कमर्शियल उड़ान बेंगलुरु से दिल्ली के बीच थी. वह उड़ान काफी डरावनी थी! डर उड़ान का नहीं बल्कि उस भारी-भरकम जिम्मेदारी के एहसास का था. आप भले ही ट्रेनिंग पूरी करके एयरलाइंस में आ चुके होते हैं, फिर भी आप प्रोबेशन पर होते हैं. आपके साथ सीनियर एग्जामिनर बैठे होते हैं, जो आपकी हर गतिविधि पर नजर रखते हैं. मैं नर्वस था और खुद को साबित करने की कोशिश में बार-बार गलतियां कर रहा था. लेकिन उन सीनियर लोगों ने जिस तरह मुझे संभाला, वह गजब का था. उन्होंने मुझे आधे घंटे के भीतर बिल्कुल सहज कर दिया. उसके बाद लैंडिंग और प्लेन से बाहर आने तक का वह गर्व महसूस कराने वाला पल अद्भुत था!'
'बोइंग हमेशा से मेरा पसंदीदा रहा- कैप्टन स्मित'
कैप्टन मछार ने इंटरव्यू में कहा, 'चूंकि मैंने शुरुआत से बोइंग ही चलाया है, इसलिए बोइंग हमेशा से मेरा पसंदीदा रहा है. लेकिन जब मैक्स विमानों से जुड़ी दुर्घटनाओं की खबरें आईं, तो वह बेहद दिल दहला देने वाली थीं. एक पायलट होने के नाते, किसी भी दुर्घटना से होने वाली जानमाल की हानि हमेशा झकझोर देती है. जब लगातार दो दुर्घटनाएं हुईं, तो स्वाभाविक रूप से मन में चिंता और अनिश्चितता आ गई थी. यहां तक कि एक समय ऐसा भी आया, जब मैं खुद यह नहीं चाहता था कि मेरे परिवार के लोग मैक्स विमान से यात्रा करें, जबकि मैं खुद उसे उड़ा रहा था! बाद में हम तमाम सुधार करके फिर से सेवा में लौटे और पूरी सुरक्षा के साथ दोबारा उड़ान भरना शुरु किया.'
'हमारे यहां हर उड़ान से पहले और बाद में पायलटों की ओर से गहन 'वॉक-अराउंड' और तकनीकी जांच की जाती है. इसके अलावा 'सी-चेक' जैसी बड़ी जांचों में विमान के हर पुर्जे को खोलकर दोबारा व्यवस्थित किया जाता है.'
'घटना होने पर हर कोई बन जाता है एक्सपर्ट'
लोगों की अति सक्रियता पर उंगली उठाते हुए उन्होंने कहा'आज के डिजिटल युग में, जब भी कोई घटना होती है, तो हर कोई विशेषज्ञ बन जाता है. हर कोई गॉसिप चाहता है. सोशल मीडिया के तथाकथित इन्फ्लुएंसर और लोग बिना पूरी बात जाने तुरंत पायलटों या इंजीनियरिंग पर उंगली उठाने लगते हैं. यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आता है. अरे भाई! क्या आपको लगता है कि कॉकपिट में बैठे वे पायलट अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष नहीं कर रहे होंगे? बिना यह जाने कि गलती तकनीकी थी, विमान की थी या किसी अन्य वजह से हुई, तुरंत अपनी राय बना लेना सरासर गलत है.'
'वे कहते हैं कि जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कीजिए. आज की दुनिया में कुछ भी छिपा नहीं रहता. जब आधिकारिक रिपोर्ट आएगी, तो सबको सच पता चल जाएगा. इसलिए जब कोई मुझसे इस तरह की बातें पूछता है, तो मैं बस एक ही बात कहता हूं कि मुझे नहीं पता. मैं इन बेबुनियाद और सनसनीखेज बहसों में बिल्कुल नहीं पड़ना चाहता.'
'उड़ान के दौरान क्रू मेंबर्स का सम्मान करें'
पैसेंजर्स को सलाह देते हुए कैप्टन स्मित ने कहा, 'मैं सभी यात्रियों से ये कहना चाहता हूं कि उड़ान के दौरान क्रू मेंबर्स का सम्मान करें. उनके साथ अभद्र शब्दों में न बोलें. कोई नहीं जानता कि हवा में उड़ते समय कब कौन सी मुसीबत आ जाए. ऐसे वक्त में यही क्रू मेंबर ही यात्रियों की जान बचाने का काम करते हैं. इसलिए उनके साथ सहयोग करें और कोई गलत बर्ताव न करें.'