App

Nike खटका, आया फतवा, क्यों इस मुस्लिम देश में कंपनी के जूते-कपड़े नहीं पहनने को लेकर आया फरमान?

लीबिया में फतवा जारी किया है कि उनके मुल्क के मुस्लिम स्पोर्ट्सवियर कंपनी नाइकी के कपड़े ना पहनें. आखिर इसकी क्या वजह है और क्यों ऐसा फतवा जारी किया गया है, चलिए समझते हैं.

Nike खटका, आया फतवा, क्यों इस मुस्लिम देश में कंपनी के जूते-कपड़े नहीं पहनने को लेकर आया फरमान?
Image Credit: स्पोर्ट्सवीयर कंपनी नाइकी के खिलाफ जारी हुआ फतवा.

स्पोर्ट्सवियर कंपनी नाइकी के खिलाफ एक फतवा जारी किया गया है, जिसमें लीबिया के मुसलमानों को नाइकी का लोगो लगे कपड़े खरीदने, बेचने या पहनने से मना किया गया है.

द डेली मेल के मुताबिक, इस धार्मिक आदेश में कहा गया है कि ये कपड़े 'बहुदेववाद' (एक से ज्यादा देवताओं की पूजा) से जुड़े प्रतीकों को बढ़ावा देते हैं. दरअसल, कंपनी का नाम जीत की यूनानी देवी के नाम पर रखा गया है और इसका मशहूर लोगो भी उसी देवी के पंखों से प्रेरित है. यह आदेश लीबिया की सर्वोच्च इस्लामिक संस्था 'दार अल-इफ्ता' ने जारी किया है और देश के सबसे बड़े इस्लामिक न्यायविद, सादिक अल-घरियानी ने इसे मंजूरी दी है.

नाइकी पर इजरायल के समर्थन का आरोप

'दार अल-इफ्ता' ने नाइकी पर इजरायल का समर्थन करने का आरोप भी लगाया है और इजराइल का साथ देने वाली कंपनियों के बहिष्कार की अपील की है. लीबिया में नाइकी का अपना कोई स्टोर नहीं है, लेकिन स्पोर्ट्सवियर रिटेलर्स के जरिए इसके ब्रांडेड उत्पाद खरीदे जा सकते हैं. इसके अलावा, स्थानीय बाजारों में नाइकी के नकली उत्पाद भी मिल जाते हैं.  लीबिया में यह नया फतवा ऐसे समय में आया है, जब पिछले साल 'दार अल-इफ्ता' ने फ्रांसीसी लग्जरी ब्रांड 'वैन क्लीफ एंड अर्पेल्स' के खिलाफ भी एक आदेश जारी किया था.

उस आदेश में कहा गया था कि इस ब्रांड का 'चार पत्तियों वाले क्लॉवर' का डिजाइन ईसाई धर्म से जुड़ा है और यह इस्लामिक शिक्षाओं के खिलाफ है. 2011 में तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के तख्तापलट के बाद से लीबिया राजनीतिक रूप से बंटा हुआ है, जहां अलग-अलग गुटों की सत्ता चल रही है.

लीबिया में 'दार अल-इफ्ता' का काफी प्रभाव है, लेकिन इसके आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं. यह फतवा लीबिया में धार्मिक रूढ़िवादिता के बढ़ने को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच आया है. 2025 में, पूर्वी लीबिया के अधिकारियों ने इस्लामिक मूल्यों के उल्लंघन का हवाला देते हुए रैप संगीत, थिएटर और डांस परफॉर्मेंस पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. बाद में इन प्रतिबंधों को पश्चिमी लीबिया तक भी लागू कर दिया गया.

फतवा क्या होता है और इसे कौन जारी करता है?

फतवा, इस्लामी कानून या किसी सब्जेक्ट पर दिया गया एक धार्मिक फैसला या राय होती है, जिसे कोई हाई लेवल का इस्लामी धार्मिक नेता, धार्मिक प्राधिकरण या स्कॉलर्स की एक योग्य परिषद जारी करती है. इसमें लोगों और समूहों से जुड़े कई तरह के मुद्दों को शामिल किया जा सकता है. हालांकि, इन धार्मिक फैसलों का समाज पर काफी असर पड़ता है, लेकिन ये जरूरी नहीं कि सरकारी आदेश हों या कानूनी रूप से लागू करने लायक हों.जिन लोगों पर इस्लाम या पैगंबर का अपमान करने का आरोप लगता है, उनके खिलाफ मौत की सजा वाला फतवा जारी किया जा सकता है. फतवे समय के साथ खत्म नहीं होते और इन्हें शायद ही कभी पलटा जाता है.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Rachit Kumar

Rachit Kumar

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
Read More