6 लाख की हुंकार, मैक्रों सरकार पर वार...फिर सुलगा फ्रांस, कई इलाकों में हिंसा; पुलिस से झड़प; बंद करना पड़ा एफिल टावर
फ्रांस में गुरुवार को लाखों लोगों ने मैक्रों सरकार के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन किया. इस दौरान कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए और उनकी पुलिस से झड़प भी हुई. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े.
फ्रांस में गुरुवार को 6 लाख लोग सड़कों पर उतर आए और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया. कुछ इलाकों में रैलियां हिंसक हो गईं, जिसके बाद पुलिस को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. कई प्रदर्शनों के दौरान झड़पें भी हुईं. प्रदर्शनों की वजह से एफिल टॉवर को कुछ देर के लिए बंद भी करना पड़ा.
गृह मंत्रालय के शुरुआती अनुमान के मुताबिक,विरोध आंदोलन की शुरुआत के बाद से अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. यह आंकड़ा 17 अक्टूबर को दर्ज 550,000, 24 अक्टूबर को 410,000 और 31 अक्टूबर को 320,000 प्रदर्शनकारियों की तादाद से ज्यादा है.
लाखों लोग सड़कों पर उतरे
ट्रेड यूनियन महासंघ CGT ने दावा किया कि पूरे देश में प्रदर्शनों में लगभग 16 लाख लोगों ने हिस्सा लिया, जबकि गृह मंत्रालय का अनुमान 600,000 का है. यूनियन के मुताबिक, पेरिस में 'प्लेस डे ला रिपब्लिक' और 'प्लेस डे ला नेशन' के बीच हुए मार्च में 350,000 लोगों ने भाग लिया. शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि वेतन और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर हो रहे देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच, गुरुवार को लगभग 16% शिक्षक हड़ताल पर थे.
CGT की महासचिव सोफी बिनेट ने कहा कि यह हड़ताल बेहद असरदार रही और उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांगों पर जवाब देने को कहा. पेरिस में प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा,'हमें कोई नहीं रोक सकता.'उन्होंने सभी कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने और न्यूनतम वेतन में 10% इजाफा करने की मांग की.
स्कूल-कॉलेजों में कामकाज ठप
देशव्यापी हड़ताल के कारण स्कूलों और यूनिवर्सिटीज के कामकाज पर भी असर पड़ा. हायर एजुकेशन मंत्रालय के अनुसार, 184 संस्थानों में से 60 में कामकाज बाधित हुआ, जबकि SNES-FSU यूनियन ने बताया कि मिडिल और हाई स्कूल के 52% कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया.
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस और बोर्डो समेत कई शहरों में छात्रों के अवरोधों को हटाने के लिए पुलिस को दखलअंदाजी करनी पड़ी. गृह मंत्रालय के मुताबिक, प्रदर्शनों को संभालने के लिए प्रशासन ने 70,000 पुलिस अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था. ये विरोध प्रदर्शन उस छात्र आंदोलन के बीच हो रहे हैं, जो सितंबर में बदहाल शिक्षा, फंडिंग और स्टाफ की कमी को लेकर शुरू हुआ था.
मैक्रों पर बोला हमला
मैक्रों के बारे में बिनेट ने कहा, 'उन्हें लगता है कि वह अकेले ही सब कुछ जानते हैं. वह आम मेहनतकश लोगों के लिए नहीं, बल्कि अमीरों, मल्टीनेशनल कंपनियों और फाइनेंशियल वर्ल्ड के लिए काम करते हैं.'
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार को यूनियनों के साथ एक बैठक बुलाई, लेकिन आने वाले शनिवार को एक और विरोध प्रदर्शन पहले से ही तय है.
पेरिस के सेंट-डेनिस के मेयर बैली बागायोको ने CBS न्यूज को बताया कि मैक्रों समस्याओं को सुलझा नहीं पाएंगे. उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी एक ऐसे समाज से तंग आ चुके हैं, जहां कुछ लोगों को बहुत ज्यादा खास अधिकार मिले हुए हैं. कई प्रदर्शनकारियों ने CBS न्यूज को बताया कि वे चाहते हैं कि फ्रांसीसी सरकार अपनी सेना और घरेलू कानून-व्यवस्था पर होने वाले खर्च को कम करे, और सामाजिक सेवाओं के लिए फंड बढ़ाए.