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देश की कमान भी, घर का काम भी: जापानी PM का दावा- पुरुष प्रधानमंत्रियों से ज्यादा वर्कलोड है, मेकअप में भी जाता है टाइम

जापान की पीएम ने संसद में एक बयान के दौरान कहा कि घर के कामों और मेकअप में ही उनका कई घंटा बीत जाता है. जापानी पीएम की इस टिप्पणी के बाद नए सवाल खड़े होने लगे हैं.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 17, 2026, 06:59 AM IST | Updated: Oct 17, 2026, 08:30 AM IST
Image Credit: वर्कलाइफ बैलेंस पर जापानी पीएम का बयान. (फोटो- सोशल मीडिया)
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Japan PM New Statement: जापान की महिला पीएम सनाए ताकाइची ने हाल में ही एक ऐसा बयान दिया है, जिसने एक नई बहस छेड़ दी. पीएम ताकाइची ने कहा कि घर के काम और मेकअप करने में उनका काफी समय चला जाता है. यही कारण है कि उन्हें पुरुष प्रधानमंत्रियों के मुकाबले अपने दिन से चार घंटे ज्यादा देने पड़ते हैं. जापानी पीएम ताकाइची ने ये बातें गत बुधवार को जापान की संसद में कहीं.

दरअसल, वह एक विषय पर बोल रही थीं. इसी दौरान उन्होंने कहा कि सुबह मैं नाश्ता बनाती हूं और फिर बर्तन धुलती हूं. इसके अलावा मुझे मेकअप भी करना होता है. उन्होंने यह भी कहा कि मुझे लगता है कि इन सब कामों में पुरुष प्रधानमंत्रियों की तुलना में तीन या चार घंटे से अधिक का समय लगता है. जापानी पीएम के इस बयान के बाद एक नई बहस देखने को मिल रही है.

लोगों ने खड़े कर दिए सवाल

जापानी पीएम ताकाइची के बयान के बाद कुछ लोगों ने उनके पास संसदीय कामों के लिए बचे समय पर सवाल किए. हालांकि, कुछ लोगों ने महिलाओं पर घर के काम के अतिरिक्त बोझ का समर्थन किया है. लोगों का कहना है कि समाज में महिलाओं से हमेशा अच्छा दिखने की उम्मीद की जाती है.

ताकाइची ने 2025 में जापान के प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी. वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं. उनका बयान इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि यह जापान की एक पुरानी और बड़ी समस्या को दर्शाता है. जापान में नौकरी करने वाली महिलाएं भी पुरुषों से अधिक घर का काम करती हैं.

सर्वे में क्या कहा गया?

गौरतलब है कि जापान के साख्यिकी ब्यूरो ने 2021 में समय के उपयोग पर एक सर्वे किया गया था. उसके अनुसार, महिलाएं घर के कामों में औसतन से घंटे बिताती हैं. इनमें खाना बनाना, बच्चों की पढ़ाई और साफ-सफाई शामिल है. हालांकि, इससे ठीक इतर पुरुष इन कामों में केवल 51 मिनट का ही वक्त देते हैं. हालांकि, सर्वे ने यह भी बताया कि साल 2001 में हुए सर्वे मुकाबले यह काफी कम हुआ है, लेकिन आज के समय में अन्य देशों के मुकाबले काफी अधिक है.  

वहीं, केबिन कार्यालय ने एक बयान में बताया कि 2021 में 6 साल से कम उम्र के बच्चों वाले परिवारों में 77.4 प्रतिशत काम पत्नी करती थीं. यह आंकड़ा उस वक्त है, जब दंपती नौकरी करते हों. लेकिन जब पत्नि नौकरी नहीं करती है, तो यह आंकड़ा 84 प्रतिशत पहुंच जाता था.

जापानी में महिलाओं का जीवन हमेशा चर्चा में रहा

एसोसिएट प्रेस (एपी) की एक रिपोर्ट बताती है कि ताकाइची के इस बयान की जमकर आलोचना भी हो रही है. कुछ आलोचकों ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करने वाली आम महिलाओं की जिंदगी काफी ज्यादा मुश्किल है. इस संबंध में एक वरिष्ठ वकील फुसाको मिवा ने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी थी. उन्होंने पीएम के कार्यक्रम में देरी के लिए मेकअप को वजह बताने पर सवाल भी खड़ा किया.

सरकारी योजनाएं बनाने में समय की कमी

जापान की पीएम का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब प्रधानमंत्री के लंबे कामों के घंटों पर चर्चा की जा रही है. एनएक्सजेआई की एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि 2022 में जापान के पीएम ने 72 दिन संसद में बिताए. वहीं, इसकी तुलना में ब्रिटेन के पीएम 50 दिन और जर्मनी के चांसलर केवल 13 दिन ही संसद में रहे. इधर, ताकाइची की सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी के जुड़े एक नेता फुजिता ने अहम सुझाव दिया है. उन्होंने मंत्रियों की ओर से संसद में बिताए जाने वाले समय को कम करने की वकालत की है.

खुद को काम का दीवाना मानती हैं जापानी पीएम

जापान की पीएम ताकाइची खुद को काम का दीवाना मानती हैं. वह रात में काफी कम सोती हैं. 14 अक्टूबर को ही उन्होंने संसद में माना की उनके पास भविष्य की योजनाएं बनाने का समय काफी कम होता है. इस दौरान उन्होंने कहा था कि मैं घर ले गए दस्तावेजों को देर रात पढ़ती हूं. ईमानदारी से कहूं, तो जापान के भविष्य के बारे में सोचने के लिए समय निकालना आसान नहीं है. इस बात पर भी ध्याना दिया जाना चाहिए कि ताकाइची का पीएम बनना एक ऐतिहासिक कदम भी रहा. जापान की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब बहुत कम है. 

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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