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हिंदुस्तान बना दुनिया की 'मिलिट्री पाठशाला', ब्रिटेन के बाद अब जापानी सेना को मिसाइल ट्रेनिंग देगी इंडियन आर्मी

भारतीय सेना आने वाले समय में जापानी सेना को मिसाइल ट्रेनिंग देने जा रही है. हाल में ही जापान के रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ अधिकारियों ने भारत का दौरा किया था, जिसमें उन्होंने भारत की टेस्टिंग फैसिलिटी और लाइव फायरिंग रेंज का बारीकी से मुआयना किया था.

हिंदुस्तान बना दुनिया की 'मिलिट्री पाठशाला', ब्रिटेन के बाद अब जापानी सेना को मिसाइल ट्रेनिंग देगी इंडियन आर्मी
Image Credit: जापान की सेना को भारत ट्रेन करेगा. (फोटो- एआई)

भारत जहां एक ओर रक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है, तो दूसरी ओर भारत की ओर दुनिया अब नए विश्वास के साथ देख रही है. तभी तो अब जापान भी अपनी सेना की खास ट्रेनिंग के लिए भारत की मदद लेना चाहता है. यही कारण है कि जापान लंबी दूरी की सतह से जहाज पर मार करने वाली मिसाइलों और छोटे अटैक ड्रोन प्रशिक्षण के लिए भारत के साथ संभावनाएं तलाश रहा है. अब उद्देश्य को लेकर जापान ने अपने कुछ अधिकारियों को भारत भेजा है.  

दरअसल, जापान के प्रमुख न्यूज चैनल NHK ने हाल में ही एक रिपोर्ट जारी की थी. जिसमें दावा किया गया कि जापान के रक्षा मंत्रालय ने अपने अधिकारियों को भारत भेजा. रिपोर्ट के अनुसार, जापान से भारत आए इन अधिकारियों का उद्देश्य 'सतह से जहाज पर मार करने वाली' मिसाइलों की फायरिंग को लेकर भारत के साथ तालमेल बैठाना है. जापान के इस कदम से साफ है कि दोनों देशों के बीच रक्षा के क्षेत्र में नए रिश्ते आयाम स्थापित हो रहे हैं.

जापान क्यों उठा रहा ये कदम?

इसी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि हाल में ही जापानी अधिकारियों की एक टीम ने भारत का दौरा किया था. उस वक्त जापान की इस टीम ने भारत की टेस्टिंग फैसिलिटी और लाइव फायरिंग रेंज का बारीकी से मुआयना किया था. हालांकि, अभी यह तय नहीं किया हो सका है कि प्रपोजल फाइनल होने के बाद किन खास मिसाइलों का टेस्ट किया जाएगा. हालांकि, जानकार मानते हैं कि जापान यह कदम यूं ही नहीं उठा रहा है, उसके पीछे की सबसे बड़ी वजह चीन की बढ़ती आक्रामकता बताई जा रही है.

चूंकि, समुद्र के इस इलाके में कई द्वीपों पर कब्जे को लेकर जापान और चीन के बीच पुराना विवाद अभी भी जारी है. चीन इन इलाकों में अक्सर अपनी ताकत दिखाता रहा है. माना जा रहा है कि चीन के इसी खतरे से निपटने के लिए और अपनी सेना को और अधिक मजबूत बनाने के लिए जापान अपनी मिलिट्री क्षमता को बढ़ाने पर काम कर रहा है.

भारत आई थी जापान  की टीम

जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया था. इस प्रतिनिधिमंडल में 34 लोग शामिल थे. 4 से 9 अक्टूबर के बीच हुए इस दौरे पर उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे रक्षा सहयोग को मजबूत करना था. इस दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना और डीआरडीओ के अधिकारियों से मुलाकात भी की थी.

जापान के इस प्रतिनिधिमंडल ने सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज और वॉरगेम रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर का दौरा किया, जहां पर उन्होंने भारत की सैन्य क्षमताओं, प्रशिक्षण व्यवस्थाओं और रक्षा क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों के बारे में जानकारी ली. जानकार मानते हैं कि अगर जापान अपनी मिसाइल और ड्रोन ट्रेनिंग के लिए भारत की सुविधाओं का इस्तेमाल करता है, तो यह दोनों देशों के रक्षा संबंधों के लिए एक नया अध्याय हो सकता है.

गौर करने वाली बात है कि भारत के पास अपनी नौसेना के लिए दुनिया की बेहतरीन और लाइव फायरिंग रेंज मौजूद है. इनमें सबसे बड़ी फैसिलिटी ओडिशा के चांदीपुर में स्थित है. चांदीपुर मिसाइल टेस्टिंग के लिए दुनियाभर में जानी जाती है. इसके अलावा भारतीय नौसेना के पास केरलम के कोच्चि में भी शानदार सिमुलेटर और ट्रेनिंग सेंटर है.  यह वही जगहें हैं, जहां पर हथियारों को चलाने की बिल्कुल असली लाइव ट्रेनिंग दी जा सकती है.

इन देशों की मदद कर चुका है भारत

बता दें कि यह कोई पहली बार नहीं है, जब भारत अपनी सैन्य सुविधाएं किसी विदेशी देश को दे रहा है. इससे पहले भी भारत ने सिंगापुर की मदद भी मदद की थी. सिंगापुर के सैनिकों ने अपनी ट्रेनिंग के लिए भारत की ग्राउंड फायरिंग रेंज का इस्तेमाल किया था. इसके अलावा जापान ने हाल में ही फीलीपींस में भी मिसाइलों की ट्रेनिंग ली थी. इसके अलावा जापान काफी पहले से अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर ड्रिल करता रहा है.

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About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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