मोहम्मद आसिम ढेर, अब मसूद का नंबर: पाकिस्तान में आतंकियों के सिर पर मंडरा रही मौत; ISI की उड़ी नींद
पाकिस्तान में जिस तरह एक के बाद एक आतंकियों की हत्याएं हो रही हैं, उससे आतंकी सरगनाओं समेत आईएसआई की नीदें उड़ी हुई हैं. जैश का कमांडर मोहम्मद आसिम सड़क दुर्घटना में मारा गया है. सवाल है कि अब हिटलिस्ट में अगला नंबर किसका है?
कभी आतंकवाद की फैक्टरी कहा जाने वाला पाकिस्तान अब खूंखार आतंकियों के लिए कब्रगाह बन चुका है. जैश और लश्कर के एक के बाद एक कई बड़े कमांडरों का पाकिस्तान की जमीन पर चुन-चुनकर सफाया हो रहा है. हाल ही में जैश कमांडर मोहम्मद आसिम की सड़क हादसे में मौत ने मसूद अजहर की नींद उड़ा दी है. सवाल ये है कि इस अज्ञात हिटलिस्ट में अगला नंबर किसका होगा- मसूद अजहर का या किसी और का.
पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क, जो दशकों से दुनिया की नजरों में आतंकवाद की सबसे सुरक्षित पनाहगाह बना रहा. लश्कर-ए-तैयबा से लेकर जैश-ए-मोहम्मद तक न जाने कितने खूंखार संगठन इसी सरजमीं पर पले-बढ़े और यहीं से पूरी दुनिया में खूनी खेल खेलते रहे.
हाफिज-मसूद को मिली सरकारी सुरक्षा
मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे चेहरे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के पाले हुए आतंक का प्रतीक बन गए. पाकिस्तान ने कई सालों तक आतंकवाद की फसल बोई, उसे पानी दिया और भारत के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया. हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकियों को वहां सरकारी सुरक्षा मिलती रही.
लेकिन वक्त बदल चुका है. जिस जमीन को आतंकी अपने लिए सबसे महफूज जन्नत समझते थे, वही जमीन अब उनके लिए कब्रगाह बन चुकी है. पाकिस्तान के भीतर कोई ऐसा शहंशाह या गुप्त नेटवर्क एक्टिव है, जो इन आतंकियों के लिए काल बन चुका है.चुन-चुनकर, एक-एक कर, पाकिस्तान के पाले हुए सांपों को उसी के घर में कुचला जा रहा है.
पाकिस्तान से चलने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का ऑपरेशनल कमांडर मोहम्मद आसिम सड़क दुर्घटना में मारा गया. बताया जा रहा है कि एक भारी ट्रेलर ट्रक ने पीछे से आसिम की गाड़ी को टक्कर मार दी.
इससे जैश-ए-मोहम्मद के लाहौर जिला ऑपरेशनल कमांडर आसिम, उसकी पत्नी हुमा और बेटे तल्हा की मौत हो गई. आतंकी आसिम जैश-ए-मोहम्मद के लिए क्षेत्रीय ऑपरेशनल प्लानिंग और स्थानीय वित्तीय नेटवर्क की देखरेख करता था. आसिम बड़े पैमाने पर संगठनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन करता था. यही नहीं, वो कश्मीर तक सक्रिय था.
इस हफ्ते यह जैश के दूसरे बड़े कमांडर की मौत है. वहीं मौजूदा साल 2026 में इस आतंकवादी समूह के नेतृत्व स्तर से चौथे कमांडर को मौत के घाट उतारा गया है.
गोलियों से भून दिया गया था इमरान
मौतों का ये सिलसिला नया नहीं है, बल्कि ये एक सोची-समझी स्क्रिप्ट के तहत आगे बढ़ रहा है. कुछ दिन पहले अज्ञात बंदूकधारियों ने लश्कर कमांडर इमरान को गोलियों से भून दिया था. इस घटना को उस वक्त अंजाम दिया गया, जब वो बाइक से जा रहा था.
यही नहीं, कुछ महीने पहले पाकिस्तान के अशांत इलाके खैबर पख्तूनख्वा में लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी अपने ठिकाने पर मौजूद था. लेकिन उसे नहीं पता था कि मौत के सौदागर उसका पीछा कर रहे हैं.
अज्ञात हमलावरों ने उसे घेरा और उस पर दनादन गोलियां बरसा दीं. हमलावरों की गोलियों की रफ्तार इतनी तेज थी कि अफरीदी को संभलने या बचने का एक भी मौका नहीं मिला. काम तमाम करने के बाद हमलावर धुएं की तरह गायब हो गए.
आईएसआई की नींद हराम
हमलावर जिस सफाई, सूझबूझ और सटीक रणनीति से इन ऑपरेशन्स को अंजाम दे रहे हैं, उसने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और वहां की सुरक्षा एजेंसियों की रातों की नींद हराम कर दी है.
दिनदहाड़े हो रही इन टारगेट किलिंग्स ने दुनिया भर के एक्सपर्ट्स के बीच एक नई बहस को हवा दे दी है. क्या पड़ोसी मुल्क में छिपे बैठे भारत के दुश्मनों का सफाई अभियान अब अपने अंतिम और सबसे आक्रामक चरण में पहुंच चुका है.
अब वो दिन दूर नहीं, जब मसूद अजहर का नंबर आने वाला है. मसूद अजहर और जैश भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के मामले में आरोपी है. इनमें 2001 में संसद पर हमला, 2008 में मुंबई हमले, 2016 में पठानकोट हमला और 2019 में पुलवामा बम धमाका शामिल है.
वो पाकिस्तान में बताया जाता है, लेकिन इस्लामाबाद का कहना है कि अजहर अफगानिस्तान चला गया है. वजह जो भी हो, लेकिन पाकिस्तान के भीतर पल रहे आतंकियों के आकाओं में इस वक्त खौफ साफ देखा जा सकता है.
अब सवाल ये नहीं रह गया है कि इन आतंकियों को किसने मारा. सवाल तो अब ये है कि इस अज्ञात हिटलिस्ट में अगला नंबर किसका है मसूद अजहर का या किसी और का?