फ्रांस में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ये प्रदर्शन बड़े पैमाने पर हो रहा पलायन है और इनका मकसद 'इस्लाम का देश पर कब्जा करना' है. ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, 'फ्रांस में जो हो रहा है, वह बड़े पैमाने पर बेकाबू पलायन से कम नहीं है. यह स्कूलों के बारे में नहीं है, यह इस बारे में है कि इस्लाम इस देश पर कब्जा करना चाहता है.'
टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, फ्रांस में मुसलमानों की अनुमानित आबादी 60 लाख है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 8% से 10% है. फ्रांस में इस्लाम दूसरा सबसे बड़ा धर्म है और यहां पश्चिमी यूरोप का सबसे बड़ा मुस्लिम समुदाय रहता है. यहां की मुस्लिम आबादी काफी युवा है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा 24 साल से कम उम्र का है. ज्यादातर मुसलमान बड़े शहरी इलाकों और उनके आस-पास के उपनगरों (बैन्ल्यू) में रहते हैं, खासकर पेरिस, मार्सिले और ल्योन के आस-पास. मायोट के विदेशी इलाके में 95% से ज्यादा आबादी मुस्लिम है.
फ्रांस के गृह मंत्रालय ने बताया कि देश भर में मंगलवार को हुए प्रदर्शनों में 2,66,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए. इनमें पेरिस के 56,000 लोग शामिल थे. सितंबर के मिड में पेरिस इलाके के एक हाई स्कूल से ये विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो अब पूरे देश में फैल गए हैं. स्टूडेंट्स एजुकेशन के लिए ज्यादा फंड की मांग कर रहे हैं.
पेरिस में ज्यादातर शांतिपूर्ण मार्च के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और प्रदर्शनकारियों के छोटे समूहों के साथ झड़प हुई. मंत्रालय ने बताया कि लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया गया है.
छात्र दो हफ्ते से ज्यादा समय से स्कूलों को ब्लॉक और क्लासेज का बहिष्कार कर रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से पुलिस ने 6,500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से ज्यादातर नाबालिग हैं. किशोरों के खिलाफ आंसू गैस, लाठी और दंगा-रोधी हथियारों के इस्तेमाल की स्टूडेंट्स, उनके पैरेंट्स और टीचर्स ने आलोचना की है.
दूसरी ओर, कुछ छात्र समूहों ने गुरुवार को और विरोध-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है.
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने पुलिस के एक्शन का बचाव किया. उन्होंने कि करीब-करीब सारे मामलों में एक्शन सही था.जब विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गए, तब अधिकारियों ने दखल दिया.
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार और स्कूल अधिकारियों को स्टूडेंट्स की बात सुननी चाहिए और उनकी चिंताओं का हल निकालना चाहिए. उन्होंने स्कूलों के आसपास हुई बहुत ज्यादा हिंसा की निंदा की और पुलिस की कार्रवाई में नस्लवाद के आरोपों को 'झूठ' बताया.
सार्वजनिक खर्च, गरीबी और पैसों की असमानता को लेकर गुस्से के बीच, ये विरोध-प्रदर्शन फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में एक शुरुआती विवाद का मुद्दा बन गए हैं. ईरान जंग से जुड़ी ईंधन की बढ़ती कीमतों ने गुस्से को और बढ़ा दिया है. यूनिवर्सिटी के छात्र फेलिक्स बार्नी ने पुलिस की कार्रवाई को जरूरत से ज्यादा बताते हुए आलोचना की और कहा कि नाबालिगों को पीटने का कोई मतलब नहीं है.' हालिया तनाव तब भी बढ़ा है, जब सोमवार को पुलिस के स्टन ग्रेनेड से जुड़ी एक घटना में 15 साल के एक लड़के का हाथ कट गया. नुनेज ने बताया कि अशांति के दौरान 715 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं.