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शांति वार्ता में पंगा भारी, 'गेट आउट' का फरमान जारी: रुबियो ने अराघची समेत ईरानी डेलिगेशन को US से निकाला

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को देश छोड़ने का फरमान सुनाया है. दरअसल, यह डेलिगेशन यूएनजीए के बाद शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए न्यूयॉर्क में रुका हुआ था. लेकिन उसके बावजूद शांति वार्ता में कोई प्रगति नहीं हो पाई.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 01, 2026, 02:12 PM IST | Updated: Oct 01, 2026, 02:26 PM IST
Image Credit: शांति वार्ता अब तक किसी भी नतीजे तक नहीं पहुंची है.
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शांति वार्ता करने अमेरिका आए ईरान के डेलिगेशन को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिका छोड़ने का फरमान सुनाया है. वजह है कि डेलिगेशन अमेरिका-ईरान के बीच कई महीनों से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने में कोई खास काम नहीं कर पाया. इस ईरानी डेलिगेशन में उसके विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी शामिल थे. यह डेलिगेशन पिछले हफ्ते UN जनरल असेंबली (UNGA) के बाद न्यूयॉर्क में ही रुका हुआ था. उन्हें अमेरिका के साथ हुए उस समझौते के खत्म होने के बाद शांति वार्ता फिर से शुरू करने का काम सौंपा गया था, जो पिछले महीने ही खत्म हो गया था.

रुबियो ने देश छोड़ने का दिया फरमान

हालांकि, सोमवार को दोनों पक्षों के बीच बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई और अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने ईरानियों से तुरंत देश छोड़ने को कहा. सूत्रों ने Axios को यह जानकारी दी.

अधिकारियों के मंगलवार को बाद में जाने की उम्मीद थी, जिसका मतलब है कि बातचीत को अचानक या बहुत जल्दी खत्म नहीं किया गया. उन्हें देश से बाहर भेजने का रुबियो का फैसला यह दिखाता है कि दोनों ही देशों को एक-दूसरे पर कोई भरोसा नहीं है. साथ ही दोनों ही देशों में कोई भी नया समझौता करने के लिए झुकने को तैयार नहीं है.

सूत्रों ने 'एक्सियोस' को बताया कि ईरानी डेलिगेशन मंगलवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 1:20 बजे न्यूयॉर्क से दोहा के लिए रवाना हुआ. एक अमेरिकी अधिकारी ने न्यूज आउटलेट को बताया, रुबियो ने ईरानी डेलिगेशन को बाहर निकाल दिया, क्योंकि वे तय समय  से ज्यादा रुक गए थे. UN जनरल असेंबली खत्म हो चुकी थी, इसलिए उनके जाने का समय हो गया था.'

क्या था प्रस्ताव?

पिछले हफ्ते, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, जिसमें होर्मुज को फिर से खोलने और सात दिनों के भीतर परमाणु हथियारों पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी.

प्रस्ताव की शर्तों के तहत, अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करनी थी और तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटानी थी.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्रकारों से कहा था, 'उन्होंने एक प्रस्ताव रखा और मैंने उसे ठुकरा दिया. वे होर्मुज को तुरंत खोलने के लिए समझौता करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें बहुत बुरी तरह नुकसान हो रहा है.

ट्रंप ने ईरान को दी थी धमकी

ट्रंप ने UNGA में अपने भाषण में ईरानी सरकार को 'पूरी तरह खत्म' करने की धमकी दी और कहा कि उन्हें ईरान युद्ध को लेकर आगे बढ़ने के बारे में एक बड़ा फैसला लेना है. कतर के मध्यस्थ भविष्य की बातचीत के लिए एक कड़ी के तौर पर काम कर रहे हैं ताकि फरवरी के आखिर में शुरू हुए इस संघर्ष को खत्म किया जा सके.

UNGA के दौरान, अरागची ने एड मिलिबैंड के साथ बैठक की. यह बैठक एंडी बर्नहम के उस बयान से कुछ दिन पहले हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि RAF फेयरफोर्ड के पास संदिग्ध आतंकी साजिश में ईरान की 'भूमिका' थी. विदेश मंत्री पर ईरान के प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने का आरोप लगा और उनसे कहा गया कि वे इस मीटिंग के लिए यहूदी ब्रिटिश लोगों से माफी मांगें.

 

 

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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