नमाज के बाद मस्जिदों से परमाणु की पुकार, ईरान को अब बम की दरकार! खुलेआम अवाम से मौलवियों ने की मांग
अमेरिका के साथ एक फिर संभावित युद्ध को देखते हुए अब ईरान में खुलकर परमाणु हथियार बनाए जाने की मांग उठने लगी है. पहले इस टॉपिक पर बात करने से अवाम कतराती थी क्योंकि पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई ने इस पर फतवा जारी किया हुआ था.
ईरान में अब शुक्रवार की नमाज के दौरान बड़ी मस्जिदों से खुलेआम परमाणु हथियार बनाने की मांग उठने लगी है. पहले इस टॉपिक पर बात करना ही वर्जित माना जाता था. लेकिन अमेरिका और इजरायल से जंग में ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की फरवरी 2026 में मौत हो गई थी. उनकी मौत ने ही परमाणु हथियारों के मुद्दे को कट्टरपंथियों की एक छोटी सी सोच से निकालकर आम जनता के बीच एक मुख्य बहस का विषय बना दिया है. अब मौलवी, सरकारी मीडिया और मौजूदा सांसद खुलेआम यह मांग कर रहे हैं कि देश अपने उस पुराने आधिकारिक वादे को बदल दे, जिसके तहत उसने केवल शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक को ही अपनाने का संकल्प लिया था.
ईरान तोड़ेगा पुरानी परंपरा?
कुछ ईरानी मौलवियों और अधिकारियों का तर्क है कि देश को परमाणु बम न बनाने के अपने पुराने वादे को छोड़कर, फिर से 'डिटेरेंस' (प्रतिरोध क्षमता) कायम करनी चाहिए. कुहदाश्त में अली सेपहवंद जैसे शुक्रवार की नमाज कराने वाले धर्मगुरुओं ने अपने उपदेशों में लोगों से खुलकर कहा है कि वे अमेरिका और इजरायल का मुकाबला करने के लिए परमाणु हथियार हासिल करने की मांग करें. इन उपदेशों के दौरान, वहां मौजूद लोगों ने ऐसे नारे लगाए, जिनमें परमाणु प्रतिरोध को एक 'अधिकार' बताया गया, जिसे छीना नहीं जा सकता.
दशकों तक, इस्लामिक गणराज्य की रक्षा नीति का आधार खामेनेई की ओर से जारी किया गया एक फतवा था, जिसमें परमाणु हथियारों को बनाने, उनका जखीरा जमा करने या उनके इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी थी. अब, सीधे सैन्य टकराव के माहौल में, इस आदेश को देश के भीतर ही भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
अमेरिका ने किया था केशम द्वीप पर हमला
बता दें, हाल ही में अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया था. अमेरिका ने इसे 'सीमित हमला' बताया था. इससे पहले भी अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर अटैक किया था. इसे होर्मुज स्ट्रेट का टोल गेट कहा जाता है. वहीं, बीते दिनों ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने देश के दक्षिणी हवाई क्षेत्र में तीन अमेरिकी ड्रोन को रोक लिया. आईआरजीसी के मुताबिक, इनमें से दो ड्रोन एमक्यूएम-170 आउटलॉ थे, जिन्हें केश्म द्वीप के ऊपर रोका गया. तीसरा ड्रोन एमक्यू-9 रीपर था, जिसे होर्मुज स्ट्रेट के पूर्वी हिस्से के समुद्री क्षेत्र में मार गिराया गया.
एक रिपोर्ट में कहा गया कि संघर्ष के शुरुआती दौर के उलट, अमेरिका ने इस बार इन हमलों की सार्वजनिक घोषणा नहीं की. एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, वॉशिंगटन ने जानबूझकर इस अभियान को सार्वजनिक नहीं किया, ताकि यह संदेश न जाए कि वह बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने जा रहा है.