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किसी तीसरे मुल्क में एनरिच यूरेनियम भेज सकता है ईरान! चीन बनेगा 'पीस' गारंटर, जंग खत्म करने का आया नया 'फॉर्मूला'

यूएस और ईरान में पिछले 7 महीने से चल रहा घमासान अब थम सकता है. इसके लिए कतर की मध्यस्थता में एक प्रपोजल तैयार किया गया है, जिसमें इस जंग को खत्म करने के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं.

Written By Devinder Kumar
Published: Oct 31, 2026, 03:29 PM IST | Updated: Oct 31, 2026, 03:34 PM IST
Image Credit: यूएस-ईरान के बीच शांति करवाने के लिए आया नया फॉर्मूला
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सैन्य तनातनी अब थम सकती है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विपरीत हालात को देखते हुए ईरान अब परमाणु बम बनाने का सपना छोड़ सकता है. इसके लिए वह अपने एनरिच हो चुके यूरिनयम को आपसी सहमति वाले किसी तीसरे देश में भी भेज सकता है. साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट को भी दुनिया के जहाजों की आवाजाही के लिए खोल सकता है. यह दावा अल अरबिया इंग्लिश की रिपोर्ट में किया गया है.

यूएस-ईरान में शांति करवाएगा ये फॉर्मूला?

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के बीच संघर्ष विराम बहाल करने के लिए कतर की एक टीम तेहरान में मौजूद है. इस टीम को खुद कतर के प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार लीड कर रहे हैं. उनके साथ कतर के विदेश मंत्री के सलाहकार भी टीम में शामिल हैं. इस टीम ने ईरान के सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का एक पत्र सौंपा था. उस पत्र में आगे के अमेरिकी सैन्य हमलों को रोकने के लिए अस्थायी शांति समझौते का फॉर्मूला दिया गया था.

ये भी पढ़ें- पीस की बात: अमेरिका ने बढ़ाया बातचीत का हाथ, ईरान की चुप्पी बरकरार; किन शर्तों पर अड़ा तेहरान?

इस फॉर्मूले के तहत ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन के प्रोग्राम को धीरे-धीरे कम करेगा. इसके बाद दोनों मुल्कों में जब सुलह के लिए शुरुआती सहमति बन जाएगी तो उसके 7 दिनों के अंदर तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया भर के मालवाहक जहाजों की आवाजाही के लिए खोल देगा.

दोनों पक्षों में चीन करेगा गारंटर का काम

अल अरबिया इंग्लिश की रिपोर्ट के अनुसार, सुलह के ड्राफ्ट में चीन को एक संभावित मध्यस्थ या गारंटर के रूप में पहचाना गया है. जिससे युद्धरत दोनों मुल्कों में बातचीत और स्थिरता को सुनिश्चित किया जा सके. ड्राफ्ट में यह भी तय किया गया है कि अब ईरान-यूएस में आगे की सभी बातचीत इस्तांबुल के बजाय कतर की राजधानी दोहा में होंगी.

इसके बदले में अमेरिका भी ईरान को कई तरह की रियायतें देगा. वह उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील देगा, समंदर में नाकाबंदी हटाएगा और पुननिर्माण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाएगा. दोनों देश अपने आश्वासनों से मुकर न जाएं, इसे चेक करने के लिए एक स्वतंत्र वेरिफिकेशन सिस्टम विकसित किया जाएगा.

वे अपने सैनिकों को भुगतान नहीं कर पा रहे- ट्रंप

दोनों पक्षों में दोबारा से विवाद भड़कने से रोकने के लिए एक विवाद-समाधान तंत्र भी बनाया जाएगा. इसमें मध्यस्थ देशों और शांति-सुरक्षा की गारंटी देने वाले मुल्क शामिल होंगे. किसी भी तरह का तनाव या विवाद होने पर यह तंत्र अपने आप एक्टिव हो जाएगा और बातचीत के जरिए मामले को आगे बढ़ने से रोकेगा.

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है. हालांकि, उसे गंभीर घरेलू रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है. ओवल ऑफिस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'वे अपने सैनिकों को भुगतान नहीं कर रहे हैं, वे अपनी पुलिस को भुगतान नहीं कर रहे हैं. वे बहुत बड़ी मुसीबत में हैं. सच कहें तो हमारे पास समय है. यह एक युद्ध है, लेकिन यह कोई सामान्य युद्ध नहीं है. हम सात महीने से वहां हैं और जीत होने तक वहां बने रहेंगे.'
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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