)
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरान की ओर से अमेरिकी राजनयिकों और अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिशें तेज होने की चेतावनी दी है. सीआईए की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ साजिशें तो खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी हैं. ऐसे में अपने राजनयिकों और राजदूतों को ईरान के संभावित हमलों से बचाने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सलाहकारों की चेतावनी पर फौरन एक्शन लेते हुए सऊदी अरब समेत मध्य पूर्व के कई देशों में मौजूद अपने दूतावासों से स्टाफ को वापस बुलाने का फैसला किया है.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय से आई जानकारी के मुताबिक ट्रंप का मानना है कि खाड़ी देशों में मौजूद मिलिट्री बेसों में तैनात अमेरिकी सैनिक अपनी स्पेशल ट्रेनिंग, एयर डिफेंस सिस्टम और घातक हथियारों की वजह से सुरक्षित हैं, लेकिन उन्हीं देशों की एंबैसी और हाईकमीशन में तैनात विदेश विभाग के अफसर और जूनियर स्टाफ ईरान के एजेंटों के लिए आसान टारगेट हो सकते हैं.
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वॉशिंगटन ने कई अमेरिकी दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या घटानी शुरू कर दी है. मार्को रूबियो को मिले एक खास मेमो के बाद ये फैसला लिया गया है. जिसमें साफ-साफ और बड़े अक्षरों में लिखा था कि ईरान की जानलेवा साजिशें काफी आगे के चरण तक पहुंच चुकी हैं.
Axios को मिले एक पेज के मेमो में नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर जे क्लेटन ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को बताया है कि ईरान की ओर से हत्या की साजिशों से जुड़ी खुफिया जानकारी अभी जितने अमेरिकी अधिकारियों के साथ साझा की जा रही है, उससे अधिक लोगों तक इसे पहुंचाने की जरूरत है.
हालांकि इस मेमो में किसी का सीधा नाम नहीं लिखा है. यानी इसमें यह नहीं बताया गया है कि किन-किन लोगों को ईरान के एजेंट निशाना बना सकते है. ये हमले मिडिल ईस्ट में मौजूद यूएस दूतावासों और वाणिज्यिक दूतावासों में होंगे या कहीं और ये भी नहीं बताया गया है. इसके साथ ही टारगेट को किस तरह से हिट किया जाएगा, इसके बारे में भी खुलकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है.
अमेरिकी अधिकारियों को ये चिंता भी सता रही है कि यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब से आगे बढ़कर क्षेत्र के दूसरे देशों को भी निशाना बना सकते हैं. अमेरिका में आगामी नवंबर के पहले हफ्ते में मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के ऊपर अमेरिका और इजरायल के घातक हमलों की अटकलें तेज हुई हैं. इन बदली परिस्थितियों के चलते पूरे खाड़ी क्षेत्र में एक विनाशकारी खतरा मंडराने लगा है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बीते शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात, लेबनान, कतर और जॉर्डन स्थित अमेरिकी दूतावासों में भी राजनयिकों और सरकारी कर्मचारियों की संख्या घटाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही सभी को सतर्क रहने और खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.