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UN में PAK को धो डाला: 'आतंकवाद का ग्लोबल स्पॉन्सर, फॉर्म 47 सरकार...,' भारतीय डिप्लोमेट्स ने शहबाज शरीफ के झूठ की उड़ा दी धज्जियां

संयुक्त राष्ट्र के मंच से लगातार पाकिस्तान की बैंड बज रहा है. पाकिस्तानी हुक्मरानों के सफेद झूठ यानी 'बेसिर पैर के बयानों', उनके डिप्लोमेट्स की नादानियों से लेकर PAK पत्रकार सब मिलकर अपने मुल्क की फजीहत करा रहे हैं.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Sep 26, 2026, 08:07 AM IST | Updated: Sep 26, 2026, 11:22 AM IST
Image Credit: (UN)
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यूएन के मंच से शेख चिल्ली बनने के ख्वाब देख रहे पाकिस्तानी हुक्मरानों की एक और इंटरनेशनल बेइज्जती हुई है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जब ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करके PAK फौज की शेखी बघार रहे थे, उसी दौरान वहीं मौजूद भारतीय राजनयिक की हंसी छूट गई. अब उनका ये वीडियो वायरल हो रहा है. यानी एक भारतीय अधिकारी ने बिना कुछ कहे बस एक रिएक्शन से पाकिस्तानी पीएम को शर्म से पानी-पानी कर दिया. इस एपिसोड के बाद यूएन में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के हर एक झूठ की धज्जियां उड़ाते हुए उसकी बखिया उधेल दी.

हुआ ये था कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अपने 23 मिनट के भाषण पर भारत पर जुबानी हमले करके 'तीस मार खां' समझने वाले शहबाज ने 2025 के भारत-पाकिस्तान के सैन्य संघर्ष को लेकर अपनी कथित ‘जीत’ का जो फर्जी दावा किया, उस झूठ के गुब्बारे की फौरन हवा निकल गई. 

झेंप गए शहबाज शरीफ

खैर अपनी बेइज्जती से पाकिस्तान भला कब असहज हुआ है, इसलिए दशकों से यूएन के मंच पर बार-बार और लगातार एक ही गलती रिपीट किए जा रहा है. 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ट्रंप का शुक्रराना अदा करते हुए शहबाज शरीफ ने कश्मीर का पुराना राग अलापा तो उस समय भी भारतीय राजनयिकों ने तत्काल पाकिस्तान के झूठ की धज्जियां उड़ाने में देर नहीं लगाई.

भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास की हंसी छूटते ही यूएन महासभा का कैमरे सीधे उनकी तरफ गया. अब उनका रिएक्शन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

'पाकिस्तान रह गया हक्का-बक्का'

पेटल गहलोत ने राइट टू रिप्लाई के दौरान अपने भाषण में पाकिस्तान की मौजूदा सरकार को 'फॉर्म 47 सरकार' कहकर तंज कसा. पेटल गहलोत ने कहा, 'पाकिस्तानी प्रतिनिधि की अजीबोगरीब टिप्पणियां उस समय सामने आई हैं, जब न्यूयॉर्क और दुनिया ने भयानक 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई है. 9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तानी सेना के साये में छिपा था. आतंकवाद पर ऐसी विरोधाभासी बातों की उम्मीद उसी से की जा सकती है, जिसकी खुद की सरकार को पाकिस्तानी लोग 'फॉर्म 47 सरकार' कहते हैं.'

क्या होता है 'फॉर्म 47'?

दरअसल पाकिस्तान में चुनाव के बाद 'फॉर्म 47' वह आधिकारिक दस्तावेज होता है जिसमें हर निर्वाचन क्षेत्र के अंतिम चुनावी नतीजों का मिलान कर विजेता घोषित किया जाता है. 2024 के पाकिस्तान के संसदीय चुनावों में इमरान खान की सियासी पार्टी पीटीआई ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ने 'फॉर्म 47' में भारी धांधली करके असली विजेताओं को हराया और मौजूदा शहबाज शरीफ सरकार को धांधली से सत्ता में बिठाया. भारतीय राजनयिक ने इसी आंतरिक राजनीतिक विवाद का इस्तेमाल करके पाकिस्तान की मौजूदा सरकार की वैधता पर सवाल उठा दिया.

डेमोक्रेसी की परिभाषा के हवाले से पेटल गहलोत ने आगे अपने भाषण में लोकतांत्रिक व्यवस्था और आतंकी व्यवस्था के बीच का फर्क समझाया. गहलोत ने आतंकवादियों की रहनुमाई करने वाले पाकिस्तान के हुक्मरानों पर तंज कसते हुए कहा, 'हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर एक ऐसे शासन की ओर से पाखंडी उपदेश सुने, जिसकी राजधानी और बाकी हिस्सों में बसे लोग सिस्टम के सितम का  शिकार हैं और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए शासन है. उनकी प्रॉक्सी कठपुतलियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि फैसले कौन करता है.'

कश्मीर नहीं, PoK की बात करो: भारतीय दूत

शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था. इसके जवाब में पेटल गहलोत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा. इसलिए आपको कश्मीर नहीं पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की हालत पर ध्यान देना चाहिए, जहां आजादी की मांग के बीच PAK फौज लोगों के मानवाधिकारों का हनन करके उन्हें बेरहमी से कुचल रहे हैं.

विदेश मंत्री जयशंकर ने भी पाकिस्तान को किया शर्मिंदा

2026 में यूएन मंच से एक पाकिस्तानी पत्रकार ने भी अपने मुल्क की रुसवाई कराने में कसर नहीं छोड़ी. उसने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से आतंकवाद के विषय पर सवाल पूछा तो उन्होंने करारा पलटवार करते हुए ये कहा, ' मैं किसी आतंकवादी देश के सवालों का जवाब नहीं दिया करता'. जयशंकर के 6 शब्दों के जवाब ने पाकिस्तानी पत्रकार के प्रोपेगेंडा को वहीं ढेर कर दिया.

भारत के पत्रकारों का जवाब नहीं दे पा रहे शहबाज शरीफ

बीते कुछ सालों से इसी मंच यानी यूएनजीए की बैठक में आते और जाते दोनों समय भारतीय पत्रकार शहबाज शरीफ से सीमा पार आतंकवाद और भारत में कई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को भारत को सौंपने जैसे मुश्किल सवाल पूछते हैं, तो वो जवाब देने के बजाए मुंह छिपाकर निकल लेते हैं.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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