क्लास रूम से क्रांति तक... एक Snapchat और फ्रांस की सड़कों पर उतर पड़े हजारों छात्र!
फ्रांस में पिछले 32 दिनों से छात्र सड़कों पर हैं. एक स्कूल से शुरू हुआ यह प्रदर्शन आज उग्र हो चुका है. इसमें Snapchat का अहम रोल है, जिसकी वजह से हजारों छात्र पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर उतर आए. आइए जानते हैं कैसे...
फ्रांस इस वक्त जल रहा है. हजारों लोग सड़कों पर हैं. स्कूलों की बदहाली, महंगाई, बढ़ती लागत और सरकार की नीतियों के खिलाफ उनका गुस्सा फूटा है. यहां हम बात करेंगे छात्रों के प्रदर्शन की, जो आज बड़ी क्रांति का रूप ले चुका है. 17 सितंबर से शुरू हुआ आंदोलन 1 महीने का वक्त पार कर चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत कैसे हुई?
आपको जानकर हैरानी होगी कि फ्रांस में छात्र आंदोलन की चिंगारी किसी रैली से नहीं भड़की. यह सब स्नैपचैट के सिर्फ एक मैसेज से शुरू हुआ था. क्लासरूम से निकली यही चिंगारी आज पूरे फ्रांस में आग बन चुकी है. आइए जानते हैं कैसे एक Snapchat के दम पर फ्रांस के स्कूली बच्चों ने सरकार की नाक में दम कर दिया.
कैसे एक स्नैप से शुरू हुआ प्रदर्शन?
पेरिस के उत्तर में स्थित सेंट-डेनिस के बारथोल्डी हाई स्कूल में विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत सिर्फ एक स्नैपचैट मैसेज से हुई. 11वीं की छात्रा जेड ने बताया कि जब पास के दूसरे स्कूलों में छात्रों के जुटने की खबर मिली, तो उसकी क्लास की एक लड़की ने स्नैपचैट की मदद ली. उसने कहा कि इस बदहाली में पढ़ाई करना नामुमकिन है, इसके बाद उसने स्कूल के लगभग सभी बच्चों को जोड़कर एक स्नैपचैट ग्रुप बना दिया. बस, यहीं से विरोध की चिंगारी भड़क उठी. छात्रा जेड का कहना है, 'स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, पीने का साफ पानी नहीं और छतों से बारिश का पानी टपकता है. गर्मी के दिनों में राहत पाने का कोई इंतजाम नहीं है.'
अब सड़कों पर उतरे शिक्षक और अभिभावक
सितंबर के बीच में पेरिस के आस-पास के कस्बों से शुरू हुई बात अब पूरे फ्रांस के बच्चों का एक बड़ा आंदोलन बन चुकी है. शुरुआत में छात्रों का गुस्सा सिर्फ दो बातों पर था, एक तो स्कूलों में टीचर नहीं थे, और दूसरा स्कूल की इमारतें एकदम खस्ताहाल थीं, लेकिन अब बात सिर्फ स्कूली बच्चों तक नहीं रही. 6 अक्टूबर को देशभर की सड़कों पर ढाई लाख से ज्यादा लोग उतर आए, जिनमें टीचर्स और बच्चों के माता-पिता भी शामिल थे. 8 अक्टूबर को करीब 24,500 लोगों ने ऐतिहासिक बास्तील की तरफ कूच कर दिया, ये वही जगह है जहां से कभी 1789 की फ्रांसीसी क्रांति शुरू हुई थी.
अमीर और गरीब स्कूलों के बीच का बड़ा फर्क
फ्रांस के पॉश शहरों और गरीब बस्तियों के स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं का फर्क कोई आज का नहीं है, यह गुस्सा सालों से सुलग रहा था, जो अब सड़कों पर साफ दिख रहा है. ओईसीडी (OECD) की 2022 की रिपोर्ट बताती है कि रईस इलाकों के बच्चे गणित में पिछड़े इलाकों के बच्चों से 113 नंबर आगे थे, यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि सुविधाओं की इस कमी ने पढ़ाई-लिखाई में कितना बड़ा फासला पैदा कर दिया है.
Snapchat ही क्यों बना प्रोटेस्टर्स का सबसे बड़ा हथियार?
अब आते हैं इस बात पर कि Snapchat की मदद से फ्रांस में हजारों स्टूडेंट्स कैसे सड़कों पर उतर आए और यह आंदोलन इतना बड़ा कैसे बन गया?
दरअसल, एक स्कूल से दूसरे स्कूल तक बात पहुंचाने और रैलियां प्लान करने के लिए स्टूडेंट्स Snapchat का ही यूज कर रहे हैं. अमेरिकी मीडिया आउटलेट टीन वोग की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोटेस्ट से जुड़े 12वीं के स्टूडेंट और ऑर्गनाइजर नोइम ने बताया कि उनकी जेनरेशन के लिए Snapchat ही पहली पसंद क्यों है. नोइम के मुताबिक, 'Snapchat का सबसे बड़ा फायदा इसका इंस्टेंट वीडियो मैसेजिंग फीचर है, जिससे सबको तुरंत पता चल जाता है कि कब और कहां जुटना है.'
- वैसे तो Snapchat ग्रुप में मैक्सिमम 201 लोगों की लिमिट होती है, लेकिन स्टूडेंट्स ने इसका भी जुगाड़ निकाल लिया. नोइम ने बताया, 'जैसे ही ग्रुप में स्पेस खाली होता, दूसरे स्कूलों के स्टूडेंट्स ऐड होते और निकलते रहते, जिस दिन स्कूल की नाकेबंदी करनी होती, उस दिन कोर टीम के छोटे ग्रुप्स बना लिए जाते.'
- Snapchat ऐप पर मैसेज का गायब हो जाना (Disappearing messages), Bitmoji और रैंडम यूजरनेम की वजह से असली पहचान छुपे रहना स्टूडेंट्स को पूरी सेफ्टी देता है. साथ ही 'Snap Map' फीचर के जरिए स्टूडेंट्स यह ट्रैक कर लेते हैं कि किस लोकेशन पर प्रोटेस्ट ज्यादा तेज है और कहां पहुंचना है.
- पॉल एलुआर्ड हाई स्कूल के बाहर मौजूद यूनिवर्सिटी स्टूडेंट शाइमा ने बताया, 'हम किसी को बवाल या तोड़फोड़ के लिए नहीं भड़काते, बल्कि शांति से एक-दूसरे तक सही टाइम और सही लोकेशन की इन्फो पहुंचाने के लिए इसका यूज करते हैं.'
जब लाठीचार्ज हुआ, तो ऐप बना सॉलिड सबूत
प्रोटेस्टर स्टूडेंट शाइमा का कहना है कि जब पुलिस अपनी पावर का गलत यूज करती है, तो Snapchat पर रिकॉर्ड हुए वीडियो सबसे बड़े सबूत का काम करते हैं. उन्होंने 15 साल के एक लड़के का जिक्र किया, जिसका हाथ पुलिस के कथित ग्रेनेड ब्लास्ट में उड़ गया था. इसका वीडियो ऑनलाइन खूब वायरल हुआ और मीडिया ने भी इसकी पुष्टि की. अब यही क्लिप्स ऑफिशियल जांच में अहम सबूत माने जा रहे हैं. बाद में यही वीडियो X, Instagram और TikTok पर भी जमकर वायरल हुए. इन क्लिप्स में कहीं तो पुलिस वालों के साथ स्टूडेंट्स के हल्के-फुल्के मोमेंट्स दिखे, तो कहीं पुलिस की ज्यादती और तोड़फोड़ के रोंगटे खड़े कर देने वाले विजुअल्स सामने आए.
Snapchat पर बने ग्रुप्स चैट्स में पुलिस की एंट्री और बन गए मीम्स
छात्रों के Snapchat पर बने ग्रुप्स चैट्स में पुलिस की एंट्री की खबरें भी सामने आईं. ग्रुप में छात्रों की मैसेज स्टाइल कॉपी करते हुए मैसेज आए तो स्टूडेंट्स ने उन पर जमकर मीम्स बना डाले. 11वीं की ऑर्गनाइजर ऐसातौ ने बताया कि जैसे ही उन्हें भनक लगी कि ग्रुप में कोई बाहरी बंदा घुस आया है, स्टूडेंट यूनियन ने तुरंत दूसरे ऐप्स पर स्विच करना शुरू कर दिया.
हालांकि इस मामले में लीगल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि Snapchat पर मैसेज गायब हो जाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि एविडेंस पूरी तरह खत्म हो गए. पेरिस की ह्यूमन राइट्स लॉयर केमिली लुकोटे ने साफ किया कि अगर लीगल प्रोसेस फॉलो किया जाए, तो Snapchat जांच एजेंसियों को यूजर के रजिस्ट्रेशन डिटेल्स और IP लॉग्स तक प्रोवाइड करा सकता है.
फ्रांस में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान अब तक क्या हुआ?
- 17 सितंबर: पेरिस के एक गरीब इलाके में बने लाइसी सेंट-एक्सूपेरी स्कूल के बच्चों ने आंदोलन शुरू किया. उनकी मांग सिर्फ इतनी थी कि स्कूल में खाली पड़े टीचर्स के पद भरे जाएं और जरूरी सुविधाएं मिलें.
- 29 सितंबर: प्रशासन ने इस स्कूल में नए टीचर्स और स्टाफ भेजकर हड़ताल खत्म करवाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. महज एक हफ्ते के अंदर यह गुस्सा 410 स्कूलों तक पहुंच गया. यहीं से छात्रों ने स्नैपचैट को हथियार बनाया.
- स्कूली बच्चों के समर्थन में कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के छात्र भी आ गए. देखते ही देखते पैरेंट्स, टीचर्स और लेबर यूनियन्स भी इनके साथ सड़कों पर उतर आए.
- 5 अक्टूबर: उत्तरी फ्रांस के लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस के एक कथित ग्रेनेड से 15 साल के स्कूली लड़के का हाथ उड़ गया और डॉक्टरों को उसका हाथ काटना पड़ा. इस घटना ने आग में घी का काम किया और पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ लोगों का गुस्सा बेकाबू हो गया.
- फ्रांस के न्याय मंत्रालय के मुताबिक, 8 अक्टूबर तक इन प्रदर्शनों के सिलसिले में 5,890 नाबालिगों को पुलिस हिरासत में लिया जा चुका है.
- 17 अक्टूबर को करीब 8 लाख लोग इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे. शुरुआत में तो सब कुछ शांति से चल रहा था, लेकिन देखते ही देखते माहौल बिगड़ गया और बवाल मच गया. उपद्रवियों ने गाड़ियां और पुलिस के बैरिकेड फूंक दिए, दुकानों के शीशे तोड़ डाले और पुलिस पर जमकर पत्थर व बोतलें बरसाईं.
आंशिक कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया
फ्रांस में जारी बवाल और दंगों को देखते हुए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कुछ शहरों में आंशिक कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया है. न्यूज़ एजेंसी एपी (AP) के मुताबिक, उन्होंने लोकल अफसरों को साफ निर्देश दिए हैं कि आगे होने वाली हिंसा और लूटपाट को रोकने के लिए जरूरत के हिसाब से खास और सीमित इलाकों में ही कर्फ्यू लगाया जाए.
ये भी पढ़ें: फ्रांस की तरह धधक रहे कई देशः यूरोप से लेकर लैटिन अमेरिका तक फैली प्रदर्शन की आग