लिफाफे में पार्टी की पर्ची और 61 का जादुई आंकड़ा: भारत से कितना अलग है इजरायल का चुनाव, समझिए सरकार बनने का पूरा गणित
कल यानी 27 अक्टूबर को इजरायल में चुनाव होना है. इजरायल में चुनाव भारत की तरह नहीं होते. इसलिए इस हमने इस आर्टिकल में वहां के चुनावी सिस्टम और सरकार बनाने की पूरी समीकरण जानने की कोशिश की है.
27 अक्टूबर का दिन इजरायल के लिए खास है. इस दिन यहां आम चुनाव होना है. करीब 13 लाख वोटर वोटिंग करेंगे. यह चुनाव लंबे युद्ध और तनाव के बीच हो रही है, इसलिए दुनिया की नजरें बेंजामिन नेतन्याहू के फ्यूचर पर टिकी हैं. यहां असली मुकाबला प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड और उनके प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट के बीच मानी जा रही है, जो इजरायल के पूर्व आर्मी चीफ रह चुके हैं और यशार पार्टी के नेता हैं. हम इस आर्टिकल के जरिए यह जानेंगे कि आखिर इजरायल में चुनाव कैसे होता है, यह भारत में होने वाले आम चुनाव से कैसे अलग है और वहां सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा कितना है?
सबसे पहली बात ये है कि भारत में जिस तरह चुनाव होते हैं वैसी प्रोसेस इजरायल की नहीं है. भारत में जहां जनता अपने क्षेत्र से किसी विधायक या सासंद को चुनती है, जबकि इजरायल में लोग किसी नेता को नहीं, बल्कि सीधे पार्टी को वोट देते हैं.
5 प्वॉइंट में समझिए इजरायल में कैसे होता है चुनाव?
1. एक देश, एक निर्वाचन क्षेत्र: इजरायल में अलग अलग क्षेत्र और सीटें नहीं होती हैं. वहां पूरा देश एक ही सीट माना जाता है और लोग किसी उम्मीदवार यानी नेता को वोट नहीं देते वो सीधे अपनी पसंद की पार्टी को वोट करते हैं.
2. जितने वोट, संसद में उतनी ही कुर्सियां: इजरायल की संसद को 'नेसेट' कहा जाता है. उसमें कुल 120 सीटें हैं. चुनाव लड़ने वाली जिस पार्टी को जितने वोट मिलते हैं, संसद में उसे उसी अनुपात में सीटें मिल जाती हैं. उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी पार्टी को कुल वोटों का 10 प्रतिशत मिला, तो उसके हिस्से 120 में से 12 सीट आएंगी.
3. संसद में एंट्री के लिए 3.25% वोट जरूरी: इजरायल की संसद में किसी भी पार्टी के लिए एंट्री करने के लिए एक कट-ऑफ तय किया गया है. पार्टी कोई भी हो उसे कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट हासिल करना जरूरी है. मान लीजिए अगर किसी पार्टी को 3.25 फीसदी से कम वोट मिले तो उसका खाता खाली रहेगा और वो संसद की रेस से सीधे बाहर हो जाएगी.
4. सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें जरूरी?: इजरायल में सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 61 सीटों का है. जिस भी पार्टी के खाते में 120 में से कम से कम 61 सीटें आ गईं समझो उसकी बल्ले बल्ले है. लेकिन यहां एक दिलचस्प बात ये भी है कि इजरायल के इतिहास में आज तक किसी एक दल को खुद के दम पर पूर्णबहूमत हासिल नहीं हुआ. इसलिए हमेशा दो या तीन पार्टियों मिलकर सरकार बनाती हैं.
5. सरकार बनाने के लिए 28 दिन की मोहलत: जब चुनाव के नतीजे आ जाता हैं तो राष्ट्रपति द्वारा उस नेता को सरकार बनाने का पहला मौका मिलता है, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे ज्यादा उम्मीद हो. इसके लिए उसे 28 दिन का वक्त दिया जाता है ताकि वो दूसरे दलों को एकजुट कर पाए. मान लीजिए कि अगर वो ऐसा करने में विफल रहता है तो फिर दूसरे दल को चांस दिया जाता है. इसके बाद भी अगर बात ना बने तो 90 दिन के बाद देश में दोबारा चुनाव कराने पड़ते हैं.
अब समझिए इजरायल में वोटिंग कैसे होती है?
इजरायल में 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोग वोट डालने का हक रखते हैं. मतदान केंद्र पर हर पार्टी की पर्चियां रखी होती हैं. वोटर अपनी पसंदीदा पार्टी की एक पर्ची उठाता है और उसे लिफाफे में बंद करके बैलेट बॉक्स में डाल देता है. इस तरह उसका वोट पड़ता है.