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दलदल और मलबे में छिपे 'शिकारी' की नई चाल, रेडियो टैगिंग से खुला ग्रीन एनाकोंडा का मायाजाल

वेस्ट अमेजन के जंगलों में ग्रीन एनाकोंडा को लेकर हुई स्टडी में कई अहम खुलासे हुए हैं. पेरू के माद्रे डी डिओस इलाके में वैज्ञानिकों ने 50 विभिन्न सांपों से जुड़े 180 ऑब्जर्वेशन जमा किए हैं.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 21, 2026, 11:41 AM IST | Updated: Oct 21, 2026, 12:53 PM IST
Image Credit: अमेजन की दुनिया बहुत रहस्यमयी है.
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अमेजन का जंगल ऐसे-ऐसे रहस्यों और जीव-जंतुओं से भरा पड़ा है, जिनके बारे में जानने के लिए वैज्ञानिक हमेशा उत्सुक रहते हैं. लेकिन जिस जीव पर हर किसी की नजर है, वह है ग्रीन एनाकोंडा. पश्चिमी अमेजन में ग्रीन एनाकोंडा खोजने से ज्यादा मुश्किल है कि वह किस नदी में रहता है. घनी वनस्पति, पानी में डूबा मलबा और छिपे हुए नदी के किनारे इस बाहुबली सांप को देखना और मुश्किल कर देते हैं. भले ही वैज्ञानिकों की नजर इसकी हर एक्टिविटी पर क्यों न हो.

रेडियो टैग से किया गया ट्रैक

2025 में 'जर्नल ऑफ नेचुरल हिस्ट्री' में छपी एक स्टडी में कहा गया कि वेस्ट अमेजन में ग्रीन एनाकोंडा पानी के रास्तों और आसपास की वनस्पति का इस्तेमाल कैसे करते हैं. इस स्टडी में वेस्ट अमेजन में छिपे रहने वाले हरे एनाकोंडा के रहने की जगहों के इस्तेमाल का जिक्र है.वैज्ञानिकों ने पेरू के माद्रे डी डिओस इलाके में कम से कम 50 अलग-अलग सांपों से जुड़े 180 ऑब्जर्वेशन जमा किए हैं.

चार बड़े एनाकोंडा पर बहुत हाई फ्रीक्वेंसी वाले रेडियो टैग लगाकर उनको ट्रैक किया गया. रेडियो लोकेशन्स में से केवल 23 (यानी 17.7%) जगहों पर ही सांप बिना किसी रुकावट के नजर आए. ये नतीजे बताते हैं कि इन जानवरों का छिपा रहने का स्वभाव ही वैज्ञानिकों को उनको खोजने और आबादी का अनुमान लगाने में कितनी बड़ी चुनौती है.ये मुख्य रूप से धूप सेंकने के लिए ही बाहर आते हैं.

नतीजे बताते हैं कि एनाकोंडा की निगरानी को बेहतर बनाने, उनके रहने की जगह के इस्तेमाल को समझने और कंजर्वेशन प्लान बनाने के लिए रेडियो टेलीमेट्री और फील्ड सर्वे को एक साथ मिलाना कितना जरूरी है.

चार हरे एनाकोंडा को कैसे ट्रैक किया गया?

इस रिसर्च में दक्षिण-पूर्वी पेरू के माद्रे डी डिओस क्षेत्र में चल रही कई प्रोजेक्ट्स से मिले आवास संबंधी रिकॉर्ड को एक साथ शामिल किया गया. स्टडी में पाया गया कि पश्चिमी अमेजन में हरे एनाकोंडा आमतौर पर धूप सेंकते समय ही दिखाई देते हैं, जबकि बाकी जगहों पर वे आंशिक रूप से या पूरी तरह से छिपे रहते हैं. उनके छिपने की जगहों में गिरे हुए पेड़ के तने, पत्तों का ढेर, मलबा, पानी में डूबी वनस्पति, ताड़ के गिरे हुए तने और नदी के कटे हुए किनारे शामिल थे. एक बार तो ट्रैक किया जा रहा एक सांप किसी अज्ञात स्रोत के बनाए गए बिल के अंदर पाया गया.

धूप सेंकने की जगहें उनके रहने की जगह के मुताबिक अलग-अलग थीं. नदियों के किनारे, लकड़ी के लट्ठों का जमावड़ा धूप सेंकने के लिए उनकी पसंदीदा जगह थी. दलदली वन और नदी के मुड़ने से बनी झीलें में ये सांप घनी वनस्पति वाले किनारों और पानी पर तैरते या स्थिर वनस्पति के हिस्सों का इस्तेमाल करते थे. रिसर्चर्स ने यह भी पाया कि ये जानवर स्ट्रीम्स में बहुत कम ही रहते हैं, हालांकि कभी-कभी वे एक-दूसरे को जोड़ने वाले पानी के रास्तों और मौसमी रूप से बाढ़ वाले इलाकों का इस्तेमाल करते हैं.

अगर रिसर्चर्स सिर्फ उन्हीं सांपों की गिनती करते हैं जो उन्हें नदी के किनारों या नावों से दिखाई देते हैं, तो वे उन सांपों को नहीं देख पाएंगे जो वनस्पति, पानी में डूबे मलबे या नदी के किनारों के नीचे छिपे हुए हैं. यह फैक्ट है कि रेडियो-टैग किए गए सांप अपनी दर्ज की गई जगहों पर बिना किसी छेड़छाड़ के केवल 17.7% बार ही खुले में दिखाई दिए.

यह दिखाता है कि इन चार वयस्क सांपों को उनकी दर्ज की गई जगहों पर खुले में देखना कितना दुर्लभ था. हालांकि, इस स्टडी की कुछ सीमाएं भी हैं. इसमें सिर्फ चार वयस्क सांपों को रेडियो-टैग किया गया था. यह काम पेरू के एक ही क्षेत्र तक सीमित था. इन नतीजों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि सभी ग्रीन एनाकोंडा अपने आवासों का इस्तेमाल बिल्कुल इसी तरह करते हैं.

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About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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