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कबाड़ में छिपा था खजाना! छह दशक बाद मिली करोड़ों रुपए हो गई कीमत; हो गए मालामाल

जॉर्ज वॉशिंगटन और अमेरिकी बाज की एक दुर्लभ व ऐतिहासिक पेंटिंग ने नीलामी में उम्मीद से कहीं ज्यादा कीमत हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया है. जानिए इस दुर्लभ कलाकृति की ऐतिहासिक अहमियत और नीलामी से जुड़ी सभी बड़ी बातें.

कबाड़ में छिपा था खजाना! छह दशक बाद मिली करोड़ों रुपए हो गई कीमत; हो गए मालामाल
Image Credit: AI - Generated Image (जॉर्ज वॉशिंगटन और अमेरिकी बाज की दुर्लभ पेंटिंग ने नीलामी में पार किए सारे अनुमान)

अमेरिका में 19वीं सदी की शुरुआत में बनी एक दुर्लभ लोक कला पेंटिंग ने नीलामी में सबको चौंका दिया. जॉर्ज वॉशिंगटन और 13 सितारों वाले अमेरिकी बाज की तस्वीर वाली इस कलाकृति को 2,26,600 डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपए) में बेचा गया. खास बात यह है कि यह पेंटिंग छह दशक से ज्यादा समय तक एक साधारण मनीला फोल्डर में रखी रही.

नीलामी का आयोजन पेंसिल्वेनिया के डाउनिंगटाउन में Pook & Pook Inc. ने किया. कलाकृति की शुरुआती कीमत 15,000 से 25,000 डॉलर के बीच रखी गई थी, लेकिन बोली इससे कहीं आगे निकल गई. खरीदार की प्रीमियम फीस समेत इसकी अंतिम कीमत भारतीय रुपयों में कीमत 2 करोड़ रुपए बताई जा रही है.

60 सालों के बाद सामने आई दुर्लभ पेंटिंग

यह कलाकृति पेंसिल्वेनिया डच लोक कला परंपरा से जुड़ी है. इसे 19वीं सदी की शुरुआत में स्याही और वॉटरकलर से कागज पर बनाया गया था. दो पन्नों में फैली इस पेंटिंग को फ्रैक्टूर शैली का बुकप्लेट माना जाता है. नीलामी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, यह एक प्राइवेट कलेक्शन का हिस्सा थी और 60 साल से अधिक समय तक एक फोल्डर में बंद रही. लंबे समय तक रोशनी से दूर रहने के कारण इसका मूल रंग काफी हद तक सुरक्षित रहा.

एक पन्ने पर जॉर्ज वॉशिंगटन, दूसरे पर अमेरिकी बाज

कलाकृति के एक पन्ने पर अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन का पूर्ण लंबाई वाला चित्र है. दूसरे पन्ने पर अमेरिकी बाल्ड ईगल बना है, जिसके चारों ओर 13 सितारे हैं. ये सितारे अमेरिका की मूल 13 कॉलोनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं. एंटीक्स एंड द आर्ट्स वीकली की रिपोर्ट के अनुसार, नीलामी के दौरान फोन और ऑनलाइन बोली लगाने वालों के बीच इस कलाकृति को लेकर काफी प्रतिस्पर्धा रही. इसकी अच्छी हालत और देशभक्ति से जुड़े दुर्लभ चित्रों ने खरीदारों का ध्यान खींचा.

क्या है फ्रैक्टूर कला परंपरा?

फ्रैक्टूर कला 18वीं सदी के मध्य से 19वीं सदी के मध्य तक पेंसिल्वेनिया में जर्मन मूल के लोगों के बीच लोकप्रिय रही. इसमें स्याही और वॉटरकलर से सजावटी चित्र बनाए जाते थे. इनका इस्तेमाल पारिवारिक बाइबिल, जन्म प्रमाणपत्र और धार्मिक पुस्तकों में भी होता था. इस कला में आम तौर पर फूलों, पक्षियों और धार्मिक संदेशों को जगह मिलती थी. जॉर्ज वॉशिंगटन जैसी सियासी हस्ती और राष्ट्रीय प्रतीकों का चित्रण कुछ ज्यादा ही दुर्लभ है. इसी वजह से यह कलाकृति ऐतिहासिक और कलात्मक, दोनों लिहाज से खास मानी जा रही है.

श्वेनकफेल्डर कला से जुड़ते हैं इसके संकेत

नीलामी के कैटलॉग में दिए गए संदर्भ इस कलाकृति की शैली को दक्षिण-पूर्वी पेंसिल्वेनिया की श्वेनकफेल्डर लोक कला परंपरा से जोड़ते हैं. इसके लिए डेनिस मोयर की किताब श्वेन्कफेल्डर लाइब्रेरी संग्रह के फ़्रैक्टुर लेखन और लोक कला चित्र (Fraktur Writings and Folk Art Drawings of the Schwenkfelder Library Collection) में दर्ज समान कलाकृतियों का भी उल्लेख किया गया है. अमेरिका में बसे शुरुआती जर्मन भाषी समुदायों के लिए जॉर्ज वॉशिंगटन और राष्ट्रीय प्रतीकों को चित्रों में शामिल करना नए देश के प्रति जुड़ाव और नागरिक पहचान जाहिर करने का एक तरीका रहा होगा.

अमेरिकी लोक कला की बढ़ती मांग का संकेत

इस कलाकृति को मिली कीमत से अमेरिकी लोक कला के दुर्लभ नमूनों में खरीदारों की दिलचस्पी का पता चलता है. खास तौर पर वे कलाकृतियां अधिक आकर्षित करती हैं, जिनका इतिहास दर्ज हो और जिनके मूल रंग व स्थिति अच्छी तरह सुरक्षित हों. पूक एंड पूक (Pook & Pook) के बिक्री संबंधी आंकड़ों के मुताबिक, यह कलाकृति नीलामी की सबसे महंगी वस्तु रही. इसकी कीमत 2,26,600 डॉलर रही और इस कीमत ने शुरुआती अनुमान को काफी पीछे छोड़ दिया.

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Ravindra Pratap Singh

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रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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