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2026 Nobel Prize: फ्रांसिस लुई हाल्जेन को फिजिक्स में मिला नोबेल, ब्रह्मांड के रहस्यमय कणों की खोज के लिए मिला सम्मान

नोबेल पुरस्कार 2026 में फिजिक्स के क्षेत्र में फ्रांसिस लुई हाल्जेन को सम्मानित किया गया है. उन्हें यह पुरस्कार आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में अहम योगदान और अंतरिक्ष से आने वाले हाई एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया है.

Written ByUdbhav Tripathi
Published: Oct 06, 2026, 04:18 PM IST|Updated: Oct 06, 2026, 04:48 PM IST
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2026 Nobel Prize: फ्रांसिस लुई हाल्जेन को फिजिक्स में मिला नोबेल, ब्रह्मांड के रहस्यमय कणों की खोज के लिए मिला सम्मान
Image Credit: नोबेल प्राइज फिजिक्स

About the Author

Udbhav Tripathi

Udbhav Tripathi

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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अंतरिक्ष के रहस्यों से पर्दा उठाने वाले वैज्ञानिक फ्रांसिस लुई हाल्जेन के नाम इस साल का सबसे बड़ा वैज्ञानिक सम्मान जुड़ गया है. द रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने साल 2026 के फिजिक्स नोबेल प्राइज के लिए फ्रांसिस लुई हाल्जेन के नाम का ऐलान किया है. उन्हें यह पुरस्कार आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में उनके शानदार और निर्णायक योगदान के साथ-साथ ब्रह्मांडीय न्यूट्रिनो की खोज के लिए मिला है.

दिसंबर 2026 में स्वीडन के स्टॉकहोम में फ्रांसिस लुई हाल्जेन को सम्मानित किया जाएगा. इस दौरान उन्हें मेडल, डिप्लोमा और 11.5 करोड़ रुपये पुरस्कार राशि भी मिलेगी.

फ्रांसिस लुई हाल्जेन अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मेडिसन में प्रोफेसर हैं. उनका काम न्यूट्रिनो जैसे बहुत ही छोटे कण को समझने से जुड़ा हुआ है. न्यूट्रिनो ऐसे कण होते हैं, जो नॉर्मल पदार्थ से बहुत ही कम टकराते हैं. इस कारण से इन्हें पकड़ना और इनका पता लगाना वैज्ञानिकों के लिए बहुत ही मुश्किल भरा होता है.

दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में छिपा है IceCube

फ्रांसिस लुई हाल्जेन की खास सोच यह थी कि दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद बर्फ का इस्तेमाल न्यूट्रिनो का पता लगाने के लिए किया जा सकता है. इसी सोचे आगे चलकर आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाई.

आइसक्यूब दक्षिणी ध्रुव की बर्फ के अंदर बना एक वैज्ञानिक उपकरण है. लगभग एक घन किलोमीटर बर्फ में हजारों लाइट सेंसर यहां लगाए गए है. जब कोई न्यूट्रिनो बर्फ में मौजूद परमाणु से टकराता है तो हल्की रोशनी (Light) जलती है. इसी रोशनी यानी लाइट को सेंसर पकड़कर न्यूट्रिनो के बारे में जानकारी खोजता है.

BREAKING NEWS The Royal Swedish Academy of Sciences has decided to award the 2026 #NobelPrize in Physics to Francis Halzen “for decisive contributions to the IceCube Neutrino Observatory and the discovery of high-energy neutrinos of astrophysical origin.” https://t.co/UcPBWk0RiK

— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 6, 2026

अंतरिक्ष को देखने का मिला नया तरीका

इस खोज की खास बात यह है कि वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में होने वाली बेहद ताकतवर घटनाओं को समझने का एक नया रास्ता मिला. हाई एनर्जी न्यूट्रिनो दूर अंतरिक्ष में होने वाली बहुत ऊर्जावान घटनाओं से निकल सकते हैं. IceCube की मदद से वैज्ञानिक इन कणों को पकड़कर उनके स्रोत और उनके बनने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं.

पिछले साल किसे मिला था सम्मान?

बीते साल, तीन वैज्ञानिकों ने क्वांटम टनलिंग नामक उप-परमाणु कणों के विचित्र व्यवहार पर रिसर्च के लिए भौतिकी में नोबेल पुरस्कार जीता था. इन्होंने MRI मशीनों द्वारा प्राप्त अति-संवेदनशील मापों को संभव बनाया और बेहतर सेलफोन और तेज कंप्यूटरों के लिए आधार तैयार किया था.

 

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