ग्रीनलैंड पर मैक्रों का दांव: अमेरिका से नूराकुश्ती के बीच कनाडा के साथ फ्रांस की डील, आर्कटिक में तिलमिला उठेंगे ट्रंप!
ग्रीनलैंड नाटो जोन में आता है. ट्रंप के डेनमार्क से डील के ऐलान के बाद फ्रांस ने आर्कटिक रीजन की सिक्योरिटी अरेंजमेंट के लिए कनाडा के साथ बड़ी डील की है.
ग्रीनलैंड पर मैक्रों का दांव: ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ती तनातनी के बीच फ्रांस ने आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सुरक्षा रणनीति मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उनका देश कनाडा के साथ मिलकर पूरे ध्रुवीय क्षेत्र की सुरक्षा को और चाक-चौबंद करना चाहता है. मैक्रों के मुताबिक, बीते सालभर में बदले हालातों के मद्देनजर फ्रांस को आर्कटिक रीजन में अपनी मौजूदगी और तैयारियों को बढ़ाने की जरूरत है.
मैक्रों ने कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर सामने आई धमकियों ने पूरे क्षेत्र के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों की याद दिला दी है. उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में सम्मान बनाए रखना और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है.
तिलमिला उठेंगे ट्रंप!
मैक्रों ने यह बयान कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ मुलाकात के बाद दिया है. दोनों नेताओं की यह बैठक कनाडा के तट के पास स्थित फ्रांस के द्वीपीय क्षेत्र सेंट पियरे और मिकेलॉन में हुई. संयुक्त राष्ट्र महासभा की सालाना बैठक में हिस्सा लेने के लिए रवाना होने से पहले मैक्रों का यहां पर पहुंचना कूटनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है.
पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स में फ्रांस और कनाडाई राजनयिकों ने मैक्रों की इस यात्रा का प्रतीकात्मक महत्व भी समझाया है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद यह दौरा और चर्चा में आ गया. ट्रंप द्वारा साझा की गई तस्वीर में अमेरिका, कनाडा, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, मैक्सिको, मध्य अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र का नक्शा दिखाया गया था. तस्वीर पर ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका’ लिखा था और इसमें सेंट पियरे और मिकेलॉन के साथ फ्रांस के कैरेबियाई क्षेत्र भी शामिल थे.
मैक्रों का फैसला अस्मिता से जुड़ा
आपको बताते चलें कि फ्रांस के लिए सेंट पियरे और मिकेलॉन रणनीतिक रूप से अहम है, क्योंकि यह अमेरिका और आर्कटिक क्षेत्र के बेहद करीब स्थित है. मैक्रों ने कहा कि फ्रांस ने हमेशा से अपनी हर जिम्मेदारी बखूबी निभाई है, लेकिन अब उसे अपनी सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करना होगा. उन्होंने यह भी बताया कि फ्रांस कनाडा और डेनमार्क के साथ मिलकर इस क्षेत्र में इसी साल से अपने संयुक्त सैन्य अभ्यासों की संख्या बढ़ाएगा.
ट्रंप का डेनमार्क से डील का दावा
ट्रंप ने जनवरी में कहा था कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कंट्रोल होना जरूरी है. वो तो अपने पहले कार्यकाल यानी 2016 से ही ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की वकालत कर रहे हैं. इसके लिए वो कनाडाई पीएम पर निजी टिप्पणी करने से भी नहीं चूक रहे हैं.
ट्रंप ने बीते शुक्रवार को कहा कि उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है. इसके तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ेगी. हालांकि समझौते की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारें अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस पर हस्ताक्षर करेंगी. इसे लागू करने के लिए डेनमार्क और ग्रीनलैंड के संसद की मंजूरी जरूरी होगी.
ग्रीनलैंड की आजादी का मुद्दा क्यों अहम है?
ग्रीनलैंड लंबे समय से ज्यादा स्वायत्तता और आजादी की मांग करता रहा है. कई देश उसे स्वतंत्र देश के तौर पर देखना चाहते हैं. जबकि फिलहाल इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी डेनमार्क के पास है. लेकिन 1951 के बाद से यहां अमेरिकी सेना भी तैनात है. अब ट्रंप कह रहे हैं कि यहां रूस और चीन अपने सैन्य अड्डे न बना सके इसलिए अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने में मिलाना चाहता है.
दूसरी ओर दशकों से ग्रीनलैंड की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे यूरोप के बड़े देश ट्रंप के इस रवैये से काफी खफा हैं. इसकी सबसे बड़ी मिसाल तब मिली जब ट्रंप ईरान में यूके, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों से ईरान के युद्ध के बीच सैन्य सहायता मांग रहे थे और सभी ने उनको ठेंगा दिखा दिया था.