संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अनवर गर्गश ने फ्लाईदुबई विमान से जुड़ी घटना पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने पहली बार इस घटना को लेकर विस्तार से बात करते हुए इसे एक बेहद खतरनाक आतंकी कृत्य बताया. उनके मुताबिक, ओमानी को-पायलट की हरकत से विमान में सवार यात्रियों और क्रू की जान पर बड़ा खतरा पैदा हो गया था और अगर समय रहते स्थिति को नहीं संभाला जाता तो इसका नतीजा बेहद खतरनाक हो सकता था.
डॉ. अनवर गर्गश ने इस घटना के दौरान भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका की भी जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात में कैप्टन स्मित ने जिस तरह शांत रहते हुए अपने पेशेवर अनुभव और साहस का इस्तेमाल किया, वह काबिल-ए-तारीफ है. उनके फैसले और सूझबूझ ने विमान में सवार लोगों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई और एक बड़ी तबाही को टालने में मदद की.
अनवर गर्गश ने भारतीय कैप्टन को इस घटना का असली हीरो बताते हुए कहा कि संकट की घड़ी में उनके पेशेवर रवैये और बहादुरी ने यह साबित किया कि एक पायलट की जिम्मेदारी सिर्फ विमान उड़ाने तक सीमित नहीं होती. ऐसे मुश्किल समय में सही फैसला लेना और यात्रियों की जान बचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. कैप्टन स्मित मच्छार ने इसी जिम्मेदारी को बेहद साहस के साथ निभाया.
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के अंदर हुए हमले ने पूरी उड़ान को कुछ ही पलों में बड़े संकट में डाल दिया था. भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके को-पायलट ने कथित तौर पर हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की. घटना के बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा और इमरजेंसी सिग्नल भेजा गया. सऊदी अरब के ताबुक में विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई. संयुक्त अरब अमीरात ने मामले की जांच शुरू कर दी है. जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि घटना के पीछे कोई आतंकी मकसद, पहले से बनाई गई योजना या किसी तरह का निर्देश था या नहीं. फिलहाल जांच पूरी नहीं हुई है और हमले की मंशा को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है.
हमले में कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की. इसके बाद एक यात्री और क्रू के सदस्य कॉकपिट तक पहुंचे और को-पायलट को काबू करने में मदद की. विमान में सवार लोगों की मदद से हालात संभाले गए और बाद में विमान को ताबुक की ओर मोड़ दिया गया. फ्लाइट में 174 यात्री सवार थे, जिनमें 27 बच्चे शामिल थे. विमान के तेजी से नीचे आने के दौरान करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई कुछ ही समय में कम हो गई थी. इसके बाद विमान को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज एयरपोर्ट पर उतारा गया.
घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की और उनकी हिम्मत, सूझबूझ और संयम की तारीफ की. बातचीत में मच्छार ने बताया कि मुश्किल समय में वह हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और विमान में संकट के दौरान भी उन्होंने ऐसा किया था. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना "सबसे बड़ा आदर्श" भी बताया. मच्छार का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है. सऊदी अरब की शुरुआती जांच के बाद दोनों पायलटों को UAE ले जाया गया. को-पायलट से जुड़ी जांच अब UAE में आगे बढ़ रही है.
राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कैप्टन स्मित मच्छार को अशोक चक्र देने पर विचार करने की अपील की है. देवड़ा ने कहा कि मच्छार ने गंभीर चोट के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और उनकी कार्रवाई ने बड़ी त्रासदी को टालने में अहम भूमिका निभाई. अशोक चक्र युद्ध के मैदान से बाहर असाधारण वीरता, साहस या बलिदान के लिए दिया जाने वाला भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है. हालांकि, मच्छार को यह सम्मान देने का फैसला अभी सरकार को करना है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन मच्छार की भूमिका की सराहना की है. उन्होंने कहा कि उनकी कार्रवाई से एक ऐसी घटना टल गई, जो बेहद बड़ी त्रासदी में बदल सकती थी. वहीं इजरायली अधिकारियों ने को-पायलट को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन दावों की अलग-अलग स्तर पर जांच जारी है. फिलहाल UAE, सऊदी अरब और इजरायल की एजेंसियां इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि कॉकपिट में हमला क्यों किया गया और क्या इसके पीछे कोई सुनियोजित मकसद था. इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा.